क्या तेजी की टोन में बना रहेगा सरसों का बाजार

मैं रामप्रसाद, मंडी मार्केट मीडिया की तरफ से एक बार फिर आपके सामने सरसों के बाजार की ताजा समीक्षा लेकर आया हूँ। पिछले सप्ताह यानी साल के पहले पूरे ट्रेडिंग सप्ताह में सरसों का बाजार काफी हद तक स्थिर रहा। लगातार तीसरा सप्ताह था जब चीन से सरसों की खली की अच्छी मांग ने बाजार को नीचे गिरने से रोके रखा। नतीजा यह हुआ कि पूरे सप्ताह में सरसों के भाव में सिर्फ ₹25 प्रति क्विंटल का ही उतार-चढ़ाव देखने को मिला। यह स्थिरता अपने आप में एक बड़ी बात है, क्योंकि आमतौर पर जनवरी के महीने में बाजार में ज्यादा मूवमेंट होता है।

सोमवार को जयपुर मंडी में सरसों 7100 रुपये पर खुली थी और शनिवार को बाजार 7125 रुपये पर बंद हुआ – यानी पूरे हफ्ते में सिर्फ 25 रुपये की बढ़त। भरतपुर में थोड़ी कमजोरी दिखी और वहाँ भाव 15 रुपये गिरकर 6750 रुपये पर बंद हुए। दिल्ली लाइन में भी 6900 रुपये का स्तर बना रहा। कारखानों की बात करें तो प्लांटों में कोई खास खरीदारी नहीं दिखी। कीमतें पूरे सप्ताह ₹50 के छोटे दायरे में ही घूमती रहीं। सलोनी जैसे बड़े प्लांट में सरसों की कीमत 7725 रुपये पर पूरी तरह स्थिर बनी रही। मंडियों में सरसों की दैनिक आवक अब धीरे-धीरे कम हो रही है, जो कीमतों को नीचे जाने से कुछ हद तक रोक रही है।

सबसे अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मंडियों में सामान्य गुणवत्ता वाली सरसों भी MSP (समर्थन मूल्य) से काफी ऊपर ट्रेड कर रही है। इससे किसान भाइयों का मनोबल ऊंचा है और वे माल बेचने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखा रहे। वे इंतजार कर रहे हैं कि शायद और बेहतर भाव मिल जाएं। बुवाई के आंकड़े भी काफी सकारात्मक आए हैं। इस बार सरसों की बुवाई का रकबा बढ़कर करीब 87.80 लाख हेक्टेयर हो चुका है, जो पिछले साल से काफी बेहतर है। अनुमान है कि 2025-26 सीजन में सरसों का उत्पादन लगभग 139 लाख टन तक पहुंच सकता है। यह आंकड़ा बाजार के लिए लंबे समय में दबाव बनाने वाला हो सकता है।

अब तेल के रुझान की बात करें तो सरसों के तेल में थोड़ी कमजोरी दिखी। दिल्ली में एक्सपेलर सरसों तेल की कीमत गिरकर ₹1410 प्रति 10 किलो हो गई। जयपुर में ₹1405 और दादरी में ₹1400 का स्तर दर्ज किया गया। काची घानी तेल में भी गिरावट आई, खासकर कोटा में जहाँ एक दिन में ही लगभग ₹65 की अचानक गिरावट देखने को मिली। कुछ प्लांटों में कीमतें स्थिर जरूर रहीं, लेकिन ओवरऑल माहौल कमजोर ही रहा।

सरसों की खली के बाजार में तो कारोबार पूरी तरह सुस्त पड़ा रहा। चीन से मांग तो है, लेकिन वह भी उतनी आक्रामक नहीं जितनी पहले थी। नतीजा यह कि खली के भाव में 20-30 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई। भरतपुर में खली 20 रुपये गिरकर 2830 रुपये, अलवर में 2750 रुपये और जयपुर में 2755 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुई।

स्टॉक की स्थिति को देखें तो जनवरी की शुरुआत में सरसों का क्लोजिंग स्टॉक पिछले साल की तुलना में लगभग 27% कम है। यह कमी अभी बाजार को सहारा दे रही है, लेकिन फरवरी से नई फसल की आवक शुरू होने की संभावना है। जैसे-जैसे नई फसल नजदीक आएगी, किसान अपने पुराने स्टॉक को धीरे-धीरे बाजार में ला सकते हैं, जिससे सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव बनेगा।

आने वाले कुछ हफ्तों में मौसम का रोल बहुत अहम होने वाला है। अगर फसल पर मौसम अनुकूल रहा तो उत्पादन अनुमान के करीब पहुंच सकता है, जो बाजार के लिए नकारात्मक होगा। फिलहाल कम आवक और कम स्टॉक की वजह से कीमतों को कुछ सपोर्ट मिल रहा है, लेकिन बड़े उत्पादन की उम्मीद और अनुकूल मौसम को देखते हुए यह सपोर्ट ज्यादा दिनों तक टिकाऊ नहीं लगता। लगातार तीन हफ्तों से चीन की मांग और मजबूत बुवाई के आंकड़ों ने बाजार को स्थिर रखा है, लेकिन अब आगे का रुझान काफी हद तक मौसम पर निर्भर करेगा।

मेरी निजी राय में किसान भाइयों को अब धीरे-धीरे अपना पुराना स्टॉक निकालना शुरू कर देना चाहिए। जयपुर जैसे बड़े बाजार में कीमतें 7000 रुपये के आसपास स्थिर हैं। अगर यह महत्वपूर्ण स्तर टूटता है तो भाव 6800 रुपये तक भी फिसल सकते हैं। इसलिए सावधानी बरतें और जरूरत से ज्यादा होल्डिंग न रखें। बाजार में हमेशा जोखिम रहता है, इसलिए अपना व्यापार अपने विवेक और स्थानीय स्थिति को देखकर ही करें।

Leave a Comment