क्या तेज होगा मक्का का बाजार जाने फंडा मेंटल

क्या तेज होगा मक्का का बाजार जाने फंडा मेंटल
क्या तेज होगा मक्का का बाजार जाने फंडा मेंटल

मैं रामप्रसाद, मंडी मार्केट मीडिया की तरफ से एक बार फिर आपके सामने मक्का के बाजार की ताजा रिपोर्ट लेकर हाजिर हूँ। पिछले सप्ताह मक्का का बाजार कुल मिलाकर नरम रहा और ज्यादातर घरेलू मंडियों में कीमतें पिछले सप्ताह की तुलना में 50-60 रुपये प्रति क्विंटल कमजोर बंद हुईं। मुख्य वजह रही घरेलू मांग में सुस्ती और निर्यात ऑर्डरों में कमी। न तो पोल्ट्री फीड वाले बड़े खरीदार सक्रिय दिखे, न ही स्टार्च और इथेनॉल प्लांट्स ने कोई जोरदार खरीद की। नतीजा यह कि बाजार पर दबाव बना रहा और भाव नीचे सरकते चले गए।

शनिवार को प्रमुख मंडियों के बंद भाव कुछ इस तरह रहे – गुलाब बाग (राजस्थान) में मक्का 2150 रुपये, छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) में 1910 रुपये, दिल्ली लाइन में उत्तर प्रदेश का मक्का 2260 रुपये और बिहार का मक्का 2290 रुपये प्रति क्विंटल पर ट्रेड हुआ। इंदौर के तिरुपति स्टार्च प्लांट में भाव 1815 रुपये रहे। बुलंदशहर में 1800 रुपये, मुजफ्फरपुर (बिहार) में 2050 रुपये, सांगली (महाराष्ट्र) में 2100 रुपये और नीमच में सबसे निचला स्तर 1700 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। कुल मिलाकर सभी प्रमुख केंद्रों में कमजोरी का ही माहौल रहा।

आवक के मोर्चे पर भी कोई राहत वाली खबर नहीं आई। महाराष्ट्र की मंडियों में पहले जहां रोजाना करीब 15,000 बोरी मक्का की आवक होती थी, वह अब घटकर मात्र 5,000 बोरी के आसपास रह गई है। मध्य प्रदेश से आने वाले वाहनों की संख्या भी पूरे सप्ताह में सिर्फ 100-150 ही रही। आवक कम होने के बावजूद कीमतें नहीं संभल पाईं, क्योंकि मांग उससे भी ज्यादा कमजोर पड़ गई। इथेनॉल सेक्टर से तो बिल्कुल सुस्त खरीद देखने को मिली, जिसने बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला। निर्यात के मामले में भी कोई सकारात्मक खबर नहीं आई। बांग्लादेश के साथ चल रहा व्यापारिक विवाद अभी भी अनसुलझा है और अमेरिका में मक्के का बंपर उत्पादन हो रहा है, जिससे भारतीय मक्का की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ गई है। दक्षिण भारत के उपभोक्ता बाजारों से भी मांग सीमित ही रही, जिससे कीमतों को कोई मजबूत सहारा नहीं मिल सका।

इस सीजन की बात करें तो मक्का की बुवाई का रकबा पिछले साल की तुलना में करीब 4% बढ़ा है। केंद्र सरकार ने 145 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा है और मौजूदा अनुमान भी उसी के आसपास हैं। मतलब सप्लाई साइड पर कोई कमी नहीं है, बल्कि आपूर्ति पर्याप्त है। लेकिन मांग में वैसी बढ़ोतरी नहीं दिख रही, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है। वैश्विक स्तर पर भी अमेरिका से भरपूर आपूर्ति भारतीय निर्यात की संभावनाओं को कमजोर कर रही है।

किसान भाइयों के पास अभी भी लगभग 20% पुराना स्टॉक बचा हुआ है और वे सरकारी एमएसपी पर खरीद शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। महाराष्ट्र से अच्छी खबर यह आ रही है कि राज्य सरकार अगले सप्ताह से एमएसपी पर मक्का की खरीद शुरू कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो बाजार को कुछ सहारा मिल सकता है और कीमतों में हल्की रिकवरी देखने को मिल सकती है। लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, इसलिए इंतजार ही करना पड़ रहा है।

मंडी मार्केट मीडिया की नजर में फिलहाल बाजार का रुझान नरम ही बना हुआ है। अगर आवक और मांग मौजूदा स्तर पर ही बनी रही तो निकट भविष्य में कोई बड़ा उछाल आने की संभावना बहुत कम है। कीमतें सीमित दायरे में ही घूमती नजर आएंगी। हाँ, अगर सरकारी खरीद जोर पकड़ती है या अचानक निर्यात मांग में सुधार आता है तो 50-60 रुपये की रिकवरी संभव है, लेकिन अभी ऐसा कोई ठोस संकेत नहीं दिख रहा।

मेरी सलाह यही है कि किसान भाई जरूरत के हिसाब से धीरे-धीरे माल निकालते रहें और ज्यादा स्टॉक होल्ड करने से बचें। व्यापारी भी सावधानी से काम लें क्योंकि बाजार में अभी अनिश्चितता बनी हुई है। हमेशा की तरह अपना व्यापार अपने विवेक और स्थानीय मंडी की स्थिति को देखकर ही करें।

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