क्या अब मक्का महंगा होगा? बाजार का लेटेस्ट अपडेट

दोस्तों, आजकल मक्का बाजार की हालत देखकर लगता है कि किसान भाइयों के लिए मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। सोमवार को भी घरेलू मक्का बाजार स्थिर से ज्यादा कमजोर ही रहा, और इसका असर पूरे देश में साफ दिख रहा है—महाराष्ट्र से लेकर मध्य प्रदेश, बिहार और गुजरात तक। मैंने पिछले कुछ दिनों से बाजार की खबरें ट्रैक की हैं, और सच कहूं तो स्थिति वैसी नहीं है जैसी उम्मीद थी।
महाराष्ट्र में प्रमुख मंडियों में मक्के की आवक अभी भी अच्छी चल रही है। किसानों के पास खेतों में काफी स्टॉक बचा हुआ है, क्योंकि पिछले सीजन की फसल अच्छी आई थी। लेकिन दूसरी तरफ घरेलू मांग कमजोर पड़ गई है। इथेनॉल प्लांट्स और कुछ इंडस्ट्रियल यूजर्स की तरफ से खरीदारी बहुत सीमित है। नतीजा ये कि कीमतों पर दबाव बना हुआ है। अमलनेर में तो कीमतें 20 रुपये प्रति क्विंटल गिरकर 1700 रुपये पर आ गईं। सांगली में 2700 रुपये और गोकाक में 1965 रुपये पर स्थिर रही, लेकिन कुल मिलाकर ट्रेंड नीचे की ओर है। कुछ स्टार्च और इथेनॉल प्लांट्स ने अपनी ऑफर रेट्स में 5 से 15 रुपये तक कटौती की है, जिससे बाजार और ज्यादा दबाव में आ गया।
मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां भी हालत ज्यादा अलग नहीं है। छिंदवाड़ा में मक्का 1670 रुपये पर ट्रेड हो रहा है, जबकि इंदौर के तिरुपति स्टार्च प्लांट में 1800 रुपये मिल रहे हैं। भीकानगांव में 1841 रुपये पर थोड़ा दबाव दिखा, तिमारनी और घटाबिल्लोद में हल्की मजबूती दिखी लेकिन वो ज्यादा टिकाऊ नहीं लग रही। दिल्ली में थोड़ी राहत मिली, जहां कीमत 10 रुपये बढ़कर 1910 रुपये प्रति क्विंटल हो गई। लेकिन ये बढ़ोतरी ज्यादा दिनों तक टिकेगी, इसकी उम्मीद कम है।
बिहार में स्थिति थोड़ी अलग है। मुजफ्फरपुर जैसे इलाकों में मुर्गी पालन की वजह से मक्के की डिमांड बनी हुई है। शालीमार किस्म की मुर्गी फीड के लिए 2050 रुपये तक पहुंच गई, और कुछ डील्स में तो 2180 रुपये तक खरीदारी हुई। पोल्ट्री और पशु आहार इंडस्ट्री अभी भी सपोर्ट दे रही है, वरना गिरावट और तेज हो सकती थी। गुजरात में कीमतें लगभग स्थिर से थोड़ी नरम रहीं, ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं दिखा।
अब अंतरराष्ट्रीय बाजार की तरफ देखें तो यूएसडीए की हालिया रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है। जनवरी 2026 की रिपोर्ट में अमेरिका में मक्का की औसत उपज 186.5 बुशेल प्रति एकड़ तक पहुंच गई, जो अनुमान से ज्यादा है। तिमाही और सीजन एंड स्टॉक भी ज्यादा निकला। शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड (CBOT) पर मक्का फ्यूचर्स में करीब 5.8% की गिरावट आई, जो जून 2023 के बाद सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट है। वैश्विक मांग में कमजोरी, व्यापार तनाव और ज्यादा प्रोडक्शन—ये सब मिलकर भारतीय बाजार पर भी असर डाल रहा है। निर्यात की मांग बहुत कमजोर है, मुंबई के एक्सपोर्टर्स ने दाम 10 रुपये घटाकर 1950 रुपये कर दिए हैं।
फिलहाल जो चीज मक्का की कीमतों को बड़ी गिरावट से बचा रही है, वो है मुर्गी पालन और पशु आहार की मजबूत घरेलू मांग। अगर ये डिमांड बनी रही तो कीमतें ज्यादा नीचे नहीं जाएंगी। लेकिन अंतरराष्ट्रीय कमजोरी की वजह से ऊपर जाने की कोई गुंजाइश भी नहीं दिख रही। बाजार में अभी 20-30 रुपये प्रति क्विंटल का उतार-चढ़ाव आम है, और निकट भविष्य में यही सीमित दायरे में कमजोर ट्रेंड जारी रह सकता है।
बाजार हमेशा बदलता रहता है, लेकिन सही जानकारी और धैर्य से ही फायदा होता है। सब ठीक रहेगा, बस सतर्क रहें। क्या ख्याल है दोस्तों? आपकी मंडी में क्या हाल है, कमेंट में बताएं!