
गेहूं व्यापारियों में OMSS टेंडर को लेकर बेचैनी
पिछले कई दिनों से गेहूं का बाजार ठीक 2800 के आसपास ही अटका हुआ है – न ऊपर जा रहा है, न नीचे गिर रहा। बस एक तरह की स्थिरता बनी हुई है। गुरुवार को भी यही नजारा रहा, बाजार में कोई खास रफ्तार नहीं दिखी। वजह साफ है – सबकी नजरें कल शुक्रवार को होने वाले सरकारी टेंडर के फैसले पर लगी हुई हैं। ज्यादातर मंडियों में भाव लगभग जस के तस रहे। कुछ प्रमुख रेट्स देख लें: दिल्ली में 2800, आगरा में 2700, अहमदाबाद में 2780, इंदौर में 2760 और नागपुर में 2700 रुपये प्रति क्विंटल के करीब ट्रेडिंग हुई। उत्तर भारत की मंडियों में भी कोई बड़ी हलचल नहीं दिखी।
अभी फिजिकल मार्केट के रेट्स FCI की नीलामी कीमतों से काफी नीचे चल रहे हैं, इसलिए ज्यादातर लोगों को लग रहा है कि सरकार का टेंडर जारी होने की गुंजाइश कम है। इसी सोच के चलते बाजार में थोड़ी मजबूती होने के बावजूद कोई आक्रामक खरीदारी नहीं हो रही।
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अब कल क्या होता है, उस पर बहुत कुछ निर्भर करेगा। अगर सरकार टेंडर जारी कर देती है, तो सप्लाई बढ़ने से बाजार पर दबाव आएगा और भावों में नरमी दिख सकती है। लेकिन अगर टेंडर नहीं आता, तो मनोवैज्ञानिक रूप से बाजार को अच्छा सपोर्ट मिलेगा। ऑफ-सीजन होने के बावजूद भाव 40-50 रुपये और ऊपर जा सकते हैं। हां, बड़ी तेजी की उम्मीद मैं नहीं कर रहा, क्योंकि बाजार में अभी भी काफी स्टॉक पड़ा हुआ है जो किसी बड़े उछाल को रोक सकता है। साथ ही, इस बार गेहूं का उत्पादन करीब 122 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो भरपूर है।
कुल मिलाकर बाजार इस वक्त पूरी तरह सरकारी फैसलों के इशारे पर नाच रहा है। अगर जनवरी तक भी टेंडर नहीं आए, तो तस्वीर बदल सकती है – क्योंकि जनवरी में शादियों और त्योहारों की वजह से डिमांड बढ़ेगी, और खपत को अच्छा बूस्ट मिल सकता है।
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फिलहाल गेहूं का बाजार एक संतुलित मोड में है – न बड़ी तेजी के साफ संकेत, न भारी गिरावट का कोई दबाव। सब कुछ बैलेंस पर टिका हुआ लग रहा है।
सभी साथी अपना व्यापार सोच-समझकर करें, रिस्क को हमेशा ध्यान में रखें। अगली अपडेट में फिर मिलते हैं!