
गेहूं बाजार रिपोर्ट – 18 दिसंबर 2025
नमस्कार मेरे प्यारे किसान भाइयों और बहनों, सर्दियों की शुरुआत हो चुकी है और गेहूं की नई फसल की चर्चा जोरों पर है। लेकिन इस बार वैश्विक बाजार में गेहूं की कीमतों पर भारी दबाव दिख रहा है। शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड (CBOT) पर गेहूं के वायदा भाव लगातार गिरावट के साथ चल रहे हैं और अक्टूबर के अंत के बाद के सबसे निचले स्तरों के करीब पहुंच गए हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है दक्षिणी गोलार्ध के दो बड़े उत्पादक देशों – अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया – में इस साल रिकॉर्ड तोड़ पैदावार।
रोसारियो ग्रेन्स एक्सचेंज ने अर्जेंटीना के गेहूं उत्पादन का अनुमान पहले के 24.5 मिलियन टन से बढ़ाकर 27.7 मिलियन टन कर दिया है। वहीं ऑस्ट्रेलिया भी अपनी अब तक की तीसरी सबसे बड़ी फसल काटने की ओर बढ़ रहा है। इन दोनों देशों की बंपर पैदावार से वैश्विक बाजार में गेहूं की सप्लाई अचानक बहुत बढ़ गई है, जिससे कीमतों पर ब्रेक लग गया है। ऊपर से यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे संघर्ष में सीजफायर की संभावनाओं की खबरें भी बाजार को और कमजोर कर रही हैं। अगर युद्ध थमता है तो इन दोनों बड़े अनाज उत्पादक देशों से निर्यात फिर से आसान हो जाएगा, जो सप्लाई को और बढ़ाएगा।
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इसी माहौल में CBOT का मुख्य गेहूं अनुबंध लगभग 0.6 प्रतिशत गिरकर 5.17 डॉलर प्रति बुशल के आसपास पहुंच गया – यह 24 अक्टूबर के बाद का सबसे निचला स्तर है। मक्का के वायदा भी दबाव में रहे और 4.38 डॉलर प्रति बुशल तक फिसल गए, क्योंकि सस्ते गेहूं की वजह से पशुचारे में उसकी मांग बढ़ रही है। कुल मिलाकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई का बोझ साफ नजर आ रहा है।
लेकिन किसान भाइयों, भारत की तस्वीर थोड़ी अलग और सकारात्मक है। इस साल हमारी गेहूं की फसल अच्छी हुई है और सरकार ने केंद्रीय पूल में करीब 299 लाख मीट्रिक टन तक खरीद पूरी कर ली है। इसके अलावा कई किसानों ने पिछले सीजन की तेजी को देखते हुए अपना माल रोक रखा है। कच्ची मंडियों में भी स्टॉकिस्ट और व्यापारी बड़े स्तर पर गेहूं जमा करके बैठे हैं। यही वजह है कि दिल्ली जैसे बड़े बाजार में पिछले दस दिनों से गेहूं का भाव 2800 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बना हुआ है। न तो बहुत गिरावट आई, न ही कोई बड़ी तेजी।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में घरेलू बाजार में 40 से 50 रुपये प्रति क्विंटल की हल्की मजबूती अभी भी बन सकती है। लेकिन आगे का रुख काफी हद तक सरकार की ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) पर निर्भर करेगा। जैसे ही सरकार खुले बाजार में अपना स्टॉक बेचना शुरू करेगी, निजी व्यापारियों और किसानों का रोका हुआ माल भी बाहर आने लगेगा, जिससे भावों पर फिर दबाव पड़ सकता है।
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मेरा सभी किसान साथियों से सुझाव है कि फिलहाल अगर आपके पास गेहूं 2800 से 2850 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में बिक रहा है और उसमें उचित मुनाफा दिख रहा है, तो उसे सुरक्षित कर लें। वैश्विक स्तर पर सप्लाई का दबाव लंबा चल सकता है, जबकि हमारा घरेलू बाजार अभी संतुलित स्थिति में है। बहुत ज्यादा लालच में रोके रखने से नुकसान भी हो सकता है।
अंत में, सभी गेहूं उत्पादक भाइयों को शुभकामनाएं। आपकी मेहनत का फल सही दाम पर मिले, घर में खुशहाली आए। बाजार की हर खबर पर नजर रखें और अपने विवेक से ही व्यापार करें।
जय जवान, जय किसान!