
सरसों के बाजार में आगे क्या रहेगा रुझान
सरसों के बाजार में आगे क्या रहेगा रुझान: दोस्तों, सरसों के बाजार पर हमारी पिछली रिपोर्ट एकदम सही निकली। हमने कहा था कि अब सरसों में कोई बड़ी तेजी आने वाली नहीं है, और देखिए, पूरे हफ्ते बाजार कमजोर ही रहा। हां, सरसों की खल की अच्छी डिमांड ने थोड़ा सपोर्ट दिया, वरना और ज्यादा गिरावट हो जाती।
जयपुर में तो सरसों का रेट पूरे सप्ताह 7200 रुपये क्विंटल पर अटका रहा। शनिवार को भरतपुर में 6775, दिल्ली में 6950, चरखी दादरी में 7000 और सलोनी प्लांट पर 7750 रुपये प्रति क्विंटल तक बोला गया। जनवरी की 1 से 15 तारीख की डिलीवरी के लिए सौदे 7825 रुपये के आसपास हुए।
यह भी जरूर पड़े-लहसुन का बॉक्स वाला माल 18500 तक भाव चल रहा है लेकिन क्या 2026 मैं लहसुन का भाव 25000 तक पहुंच सकता है ?
SEA की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार सरसों की बुआई 77.06 लाख हेक्टेयर हो चुकी है, जो पिछले साल से लगभग 6% ज्यादा है। राजस्थान, एमपी, यूपी, हरियाणा और बंगाल में अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है।
विदेशी खाद्य तेलों के दाम गिरने से सरसों तेल पर भी प्रेशर रहा, लेकिन सर्दी की वजह से तेल की खपत बढ़ गई, इसलिए ज्यादा गिरावट नहीं आई। जयपुर में कच्ची घानी सरसों तेल 1431 रुपये और दिल्ली में 1435 रुपये प्रति 10 किलो के आसपास रहा।
खल की बात करें तो शनिवार को अलवर में 50 रुपये बढ़कर 2850, भरतपुर में 2900 और जयपुर में 2810 रुपये क्विंटल हो गया। यूरोप और भारत में खल के भाव लगभग बराबर हो जाने से एक्सपोर्ट डिमांड कम हुई, नवंबर में निर्यात 37% गिरकर 1.13 लाख टन रह गया। फिर भी, चीन से भारतीय कंपनियों को अप्रूवल मिलने की प्रोसेस चल रही है, तो आगे डिमांड बेहतर हो सकती है।
यह भी जरूर पड़े-2026 की बासमती बुवाई से पहले: किस वैरायटी चुनें जो ज्यादा पैसा दे?
कुल मिलाकर, मंडी मार्केट मीडिया की राय है कि सरसों तेल में सुस्ती है, सप्लाई भरपूर है और फरवरी में नई फसल आने वाली है, इसलिए तेजी के कोई मजबूत संकेत नहीं दिख रहे। बाजार यहां से स्थिर से कमजोर ही रहेगा। खल का सपोर्ट है, तो गिरावट रुक-रुक कर आएगी। दिसंबर में शायद 25-50 रुपये के दायरे में ट्रेडिंग होती रहे।
किसान साथियों, सतर्क रहिए और सही समय पर फैसला लीजिए!