गोविंद भोग चावल के बाजार से क्या मिल रही रिपोर्ट

गोविंद भोग चावल के बाजार से क्या मिल रही रिपोर्ट

गोविंद भोग चावल के बाजार से क्या मिल रही रिपोर्ट
गोविंद भोग चावल के बाजार से क्या मिल रही रिपोर्ट

साथियों, इन दिनों गोविंद भोग चावल का बाजार एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ा है – जैसे कोई पुरानी नदी नई धारा में बह रही हो। नई फसल का सीजन अब समाप्ति की ओर है, बाजार में ताजा स्टॉक के साथ-साथ पुराना कैरी फॉरवर्ड माल भी घुलमिल गया है। यहां वॉल्यूम से ज्यादा महत्व क्वालिटी का है, और सही पोजीशनिंग का। जो व्यापारी समझदारी से अच्छे लॉट्स चुन रहे हैं, वही मुस्कुरा रहे हैं।

यह भी जरूर पड़े- चने के बाजार में लगातार नरमी, कीमतें नीचे की ओर

इस बार पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों में फसल की तस्वीर एकसमान नहीं रही। कहीं एकड़ेज स्थिर रहा, तो कहीं अनियमित बारिश, कटाई में देरी और कटाई के बाद नुकसान ने यील्ड को चोट पहुंचाई। नतीजा यह कि बाजार में गोविंद भोग के नाम से तो ढेर सारा माल दिखता है, लेकिन असली एक्सपोर्ट ग्रेड – वो एकसमान, सुगंधित, साफ-सुथरे लॉट्स – बहुत सीमित हैं। मिलर्स और एक्सपोर्टर्स छोटे-छोटे पार्सल्स में ही सोर्सिंग कर पा रहे हैं, बड़े यूनिफॉर्म लॉट्स की तलाश में भटक रहे हैं।

आंकड़ों की बात करें तो गोविंद भोग धान का कुल उत्पादन इस सीजन करीब 1.25 से 1.5 लाख मीट्रिक टन के आसपास रहा। मिलिंग के बाद चावल बनता है लगभग 70 से 75 हजार मीट्रिक टन – यानी पूरे बंगाल के चावल उत्पादन का मुश्किल से 1 प्रतिशत। लेकिन भाइयो, यह छोटा सा हिस्सा वैल्यू के मामले में कितना बड़ा है! इसकी सुगंध, इसका स्वाद, पूजा-पाठ और बंगाली थाली में इसकी जगह कोई नहीं ले सकता।

एक्सपोर्ट की कहानी भी कम रोचक नहीं। बंगाल की इस फसल का 8 से 12 प्रतिशत हिस्सा विदेश जाता है – यानी लगभग 6000 से 9000 मीट्रिक टन। अमेरिका, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, कनाडा, सऊदी अरब और बांग्लादेश जैसे देशों में बंगाली प्रवासी और मंदिरों की विशेष मांग इसे खींचती है। दुर्गा पूजा, काली पूजा के बाद अब विदेशों में क्रिसमस-नए साल की बंगाली पार्टियों में गोविंद भोग की खिचड़ी और पायेस की खुशबू फैल रही होगी।

कीमतों का मिजाज देखें तो पैडी लेवल पर निचली क्वालिटी के लॉट्स ₹2500 प्रति क्विंटल के आसपास ट्रेड हो रहे हैं, जबकि असली सुगंध वाले, साफ-सुथरे लॉट्स ₹3100 तक पहुंच रहे हैं। चावल के रूप में घरेलू बल्क ट्रेड ₹60 से ₹85 प्रति किलो के दायरे में है, लेकिन ब्रांडेड पैकेट्स और एक्सपोर्ट चैनल में इससे कहीं ऊंचे दाम मिल रहे हैं। सरकारी MSP तो एक फ्लोर देती है, मगर गोविंद भोग को प्रीमियम हेरिटेज कमोडिटी की तरह अलग से नहीं देखा जाता। इसलिए इसकी ऊपरी चाल पूरी तरह प्राइवेट ट्रेडर्स की समझ, बाजार के सेंटीमेंट और स्टॉक की मनोदशा पर टिकी है।

यह भी जरूर पड़े- दालों के आयात को लेकर आई नई अपडेट 33% घटा आयात

इस समय ज्यादातर व्यापारी सीमित मात्रा में ही खरीद रहे हैं – तेज रोटेशन के साथ, ज्यादा स्टॉक नहीं पकड़ना चाहते। एक्सपोर्टर्स तो सिर्फ कंफर्म ऑर्डर आने पर ही माल उठा रहे हैं। बाजार न तो बहुत ढीला है, न ही बहुत कसा हुआ। शॉर्ट टर्म में कीमतों की दिशा मुख्य रूप से विदेशी इंक्वायरी के प्रवाह और त्योहारों से जुड़ी मांग पर निर्भर करेगी। अचानक कोई बड़ा ऑर्डर आया नहीं कि तेजी का झोंका आ जाए। लेकिन लंबी मजबूत रैली के लिए नए ट्रिगर्स की जरूरत पड़ेगी – जैसे कोई नया बाजार खुलना, या बड़े ब्रांड्स का प्रमोशन।

किसान भाइयो और व्यापारी साथियो, गोविंद भोग सिखाता है कि कम मात्रा में भी अगर क्वालिटी और पहचान हो, तो बाजार में सम्मान मिलता है। अच्छा माल संभालकर रखें, सही ग्रेडिंग करें, और धैर्य से सही खरीदार का इंतजार करें। बाजार का यह ट्रांजिशन फेज गुजर जाएगा, और जो समझदारी से चलेगा, वही आगे निकलेगा।

व्यापार हमेशा अपने विवेक और सावधानी से करें। इस सुगंधित चावल की तरह जीवन में भी मीठी सफलता आए!

Leave a Comment