गेहूं के बाजार से क्या मिल रहे हैं रुझान देख रिपोर्ट

गेहूं के बाजार से क्या मिल रहे हैं रुझान देख रिपोर्ट
गेहूं के बाजार से क्या मिल रहे हैं रुझान देख रिपोर्ट

गेहूं के बाजार से क्या मिल रहे हैं रुझान देख रिपोर्ट

गेहूं के बाजार से क्या मिल रहे हैं रुझान देख रिपोर्ट : मैं एक अनाज बाजार का पुराना विश्लेषक हूं और पिछले कई सालों से गेहूं के बाजार की हर हलचल पर नजर रखता हूं। आज, 16 दिसंबर 2025 को, मैं आपको गेहूं बाजार की ताजा स्थिति के बारे में विस्तार से बताना चाहता हूं। पिछले चार-पांच दिनों से बाजार काफी स्थिर लेकिन मजबूत बना हुआ है। यह स्थिरता कोई संयोग नहीं है – मैंने आपको पहले भी बताया था कि बाजार में यह रुझान क्यों आ रहा है। मुख्य कारण भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की ओपन मार्केट सेल स्कीम (ओएमएसएस) के तहत कोई नया बड़ा टेंडर जारी न होना है। सरकार ने इस साल ओएमएसएस के जरिए सीमित मात्रा में ही गेहूं बेचने का फैसला लिया है, जिससे बाजार में आपूर्ति का दबाव कम है और निचले स्तरों पर खरीदार सक्रिय हो रहे हैं। नतीजतन, बाजार को मजबूत आधार मिल रहा है।

आइए पहले दिल्ली की बात करें, जो पूरे उत्तर भारत के गेहूं बाजार का केंद्र बिंदु है। यहां गेहूं के भाव पिछले कुछ दिनों में 2745 रुपये से ऊपर उठकर 2800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे, लेकिन पर्याप्त आपूर्ति और मिलों की मध्यम खरीदारी की वजह से भाव अब इसी स्तर पर स्थिर हो गए हैं। दिल्ली में अच्छी क्वालिटी का गेहूं 2900 से 3150 रुपये तक बिक रहा है, जबकि औसत भाव करीब 2915 रुपये के आसपास घूम रहा है। यह तेजी मुख्य रूप से स्टॉकिस्टों और व्यापारियों की होल्डिंग से आई है, जो नीचे के स्तरों पर माल नहीं बेचना चाहते।

अगर हम अन्य प्रमुख मंडियों की ओर नजर डालें, तो तस्वीर कुछ इसी तरह की है। नरेला और नजफगढ़ में गेहूं 2600 से 2800 रुपये के दायरे में कारोबार कर रहा है। जोधपुर में राजस्थान की मंडियों से प्रभावित होकर भाव 2700 रुपये के आसपास हैं। बिहार के समस्तीपुर में 2725 रुपये और मध्य प्रदेश की पिपरिया मंडी में 2551 रुपये प्रति क्विंटल का भाव दर्ज किया गया है। कई जगहों पर 5 से 10 रुपये की मामूली तेजी देखी गई, लेकिन कोई बड़ा उछाल नहीं आया। दक्षिण भारत की मिलों की खरीदारी कल थोड़ी कमजोर रही, फिर भी मिलर्स भाव बढ़ाने की कोशिश में लगे हैं। दक्षिणी और पूर्वी भारत के कुछ मिलर्स को सस्ते दामों पर पर्याप्त माल न मिलने की वजह से अपनी बोली 5-10 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ानी पड़ी है।

वर्तमान में विक्रेताओं का रुख काफी सतर्क है। व्यापारी और स्टॉकिस्ट नीचे के स्तरों पर माल निकालने से बच रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि बाजार में और मजबूती आ सकती है। यह ऑफ-सीजन का समय है, जब नई फसल की आवक दूर है और मौजूदा स्टॉक पर निर्भरता ज्यादा है। सरकार की ओर से ओएमएसएस के तहत गेहूं बिक्री को लेकर अभी कोई स्पष्ट संकेत नहीं है। पिछले साल की तुलना में इस साल बिक्री की मात्रा काफी कम रखी गई है, जिससे बाजार में आपूर्ति नियंत्रित है।

अब बात करते हैं भविष्य की। मंडी मार्केट मीडिया के मेरे अनुमान के अनुसार, अगर निकट भविष्य में सरकार बड़े टेंडर नहीं जारी करती, तो गेहूं के भावों में 40-50 रुपये की और बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन यह तेजी रुक-रुक कर आएगी – कोई अचानक बड़ा उछाल नहीं। फिलहाल बाजार 10-20 रुपये के छोटे दायरे में कारोबार करता रहेगा। जनवरी तक धीरे-धीरे 50-75 रुपये की कुल बढ़त बन सकती है। हालांकि, यह अनुमान कई कारकों पर निर्भर है – जैसे मौसम, वैश्विक बाजार, और सरकार की नीतियां। अगर नई फसल की बुआई अच्छी रही और उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा (जैसा कि अनुमान है 117 मिलियन टन के करीब), तो लंबे समय में दबाव आ सकता है। लेकिन अभी ऑफ-सीजन में मजबूती बनी रहेगी।

गेहूं भारत की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा का आधार है। यह दूसरी सबसे महत्वपूर्ण फसल है, जो लाखों किसानों की आजीविका चलाती है। मौजूदा स्थिति में किसानों को सलाह है कि जल्दबाजी न करें – अगर स्टॉक है तो थोड़ा इंतजार करें, क्योंकि भाव ऊपर की ओर हैं। व्यापारियों को भी विवेक से फैसले लेने चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा रहता है, लेकिन सूचना और धैर्य से बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है।

धन्यवाद, और शुभकामनाएं। बाजार मजबूत रहे, आपका व्यापार फले-फूले।

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