
मटर के बाजार में क्या बना हुआ है रुझान
मटर के बाजार में क्या बना हुआ है रुझान : नमस्कार मेरे प्यारे किसान भाइयों और बहनों, सर्दियों का मौसम आते ही रसोई में मटर की चर्चा शुरू हो जाती है – चाहे वह हरी मटर की सब्जी हो या सूखी दाल। लेकिन इस बार मटर बाजार में कुछ अलग ही माहौल है। घरेलू उत्पादन में भारी कमी, रुपये की गिरावट और आयात पर बढ़ती लागत ने मिलकर मटर के दामों को मजबूती दे दी है। मैं खुद एक किसान परिवार से हूं और जानता हूं कि फसल को नुकसान देखकर किसान का दिल कितना दुखता है। इस साल मटर उगाने वाले किसानों ने दोहरी मार झेली है, जिसका असर अब बाजार तक पहुंच रहा है।
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में किसानों ने पहले से ही मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए मटर की बिजाई काफी कम की थी। ऊपर से अक्टूबर के आखिरी दिनों में चार-पांच दिनों तक लगातार तेज बारिश ने जो बचा-खुचा था, उसे भी बुरी तरह प्रभावित कर दिया। कई इलाकों में जहां बीज अंकुरित हो रहे थे, वहां पानी भर जाने से 65-70 प्रतिशत तक फसल बर्बाद हो गई। खेतों में कीचड़ और सड़न ने किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया। राजस्थान के कुछ हिस्सों, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में थोड़ी-बहुत फसल तो बची है, लेकिन कुल उत्पादन इस बार पिछले साल के मुकाबले आधे से भी कम रहने के आसार हैं। अनुमान है कि उत्पादन में 50 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आएगी।
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दूसरी तरफ, विदेश से मटर लाना भी अब पहले जितना आसान नहीं रहा। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया मुख्य निर्यातक देश हैं, लेकिन डॉलर के सामने भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। इससे आयात की लागत काफी बढ़ गई है। ऊपर से सरकार द्वारा मटर पर लगाया गया 30 प्रतिशत का आयात शुल्क भी व्यापारियों के लिए बोझ बन रहा है। बंदरगाहों पर जो पुराना स्टॉक पड़ा था, वह भी अब तेजी के साथ बिक रहा है।
बाजार की बात करें तो मुंबई जैसे बड़े केंद्रों में हाजिर मटर की कीमतों में एक-सवा दो रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हो चुकी है। अभी साधारण मटर 37 से 38 रुपये किलो तक बिक रही है, जबकि थोक बाजार में 40 से 40.5 रुपये तक की बोलियां चल रही हैं। अच्छी क्वालिटी की छनी हुई मटर तो 44-45 रुपये प्रति किलो के स्तर को छू रही है। हरी सब्जी वाली मटर भी इस बार आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही है – बाजार में भाव पहले से काफी ऊपर हैं।
मटर की खासियत यह है कि अन्य दालों की तुलना में इसकी खपत लगभग चार गुनी होती है। सर्दियों में बेसन, नमकीन, सब्जी, सूप – हर जगह मटर का इस्तेमाल बढ़ जाता है। मांग इतनी जबरदस्त है कि स्टॉक कम होने का असर सीधे दामों पर पड़ रहा है। व्यापारी और विशेषज्ञों का मानना है कि नई फसल बड़े पैमाने पर आने तक (जो मार्च-अप्रैल में होगी) मटर के भाव में 7 से 8 रुपये प्रति किलो तक की और तेजी आ सकती है।
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किसान भाइयों, अगर आपके पास पुरानी मटर का स्टॉक है तो सही समय का इंतजार करें, लेकिन बहुत ज्यादा जोखिम भी न लें। व्यापारियों और उपभोक्ताओं से भी कहूंगा कि बाजार को समझकर ही खरीद-बिक्री करें। मौसम ने इस बार किसानों को बहुत नुकसान पहुंचाया है, इसलिए जो थोड़ी-बहुत फसल बची है, उसकी कीमत तो बननी ही चाहिए।
अंत में, सभी मटर उत्पादक किसान साथियों को मेरी संवेदना और शुभकामनाएं। प्रकृति के सामने हम मजबूर हैं, लेकिन मेहनत और सही निर्णय से हम आगे बढ़ सकते हैं। आने वाला समय बेहतर हो, फसल अच्छी हो और दाम संतोषजनक मिलें।
जय जवान, जय किसान!