फिलीपींस ने किया चावल आयात नीति में बड़ा बदलाव – देखें रिपोर्ट

फिलीपींस ने किया चावल आयात नीति में बड़ा बदलाव - देखें रिपोर्ट
फिलीपींस ने किया चावल आयात नीति में बड़ा बदलाव – देखें रिपोर्ट

साथियों, फिलीपींस से एक बड़ी और सकारात्मक खबर आ रही है, जो पूरे एशियाई चावल बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे रही है। वहां की सरकार ने स्पष्ट इशारा दिया है कि 2026 में चावल आयात को काफी हद तक सीमित रखा जाएगा, क्योंकि देश रिकॉर्ड धान उत्पादन की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स बता रही हैं कि 2026 में फिलीपींस का धान उत्पादन करीब 20.3 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच सकता है – यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर होगा। इतना उत्पादन होने पर आयात को 4 मिलियन टन से नीचे लाने की योजना है, यानी लगभग 36 से 38 लाख मीट्रिक टन के आसपास। सरकार का मानना है कि यह मात्रा न केवल घरेलू मांग पूरी करेगी, बल्कि किसानों को उनके धान का उचित दाम भी दिलाएगी – जो सबसे बड़ी राहत की बात है।

याद कीजिए, 2023 में फिलीपींस ने 20.06 मिलियन टन का रिकॉर्ड बनाया था, और 2025 के लिए भी यही 20.3 मिलियन टन का लक्ष्य रखा गया है। अब 2026 में इसे पार करने की उम्मीद जग रही है। अच्छे मानसून, बेहतर बीज, उर्वरक सब्सिडी और किसानों की मेहनत ने यह संभव बनाया है।

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अब आयात नीति की बारीकियां देखिए। 2025 के अंत में चार महीने का आयात प्रतिबंध हटने से पहले, ब्यूरो ऑफ प्लांट इंडस्ट्री (BPI) 5 लाख मीट्रिक टन चावल के लिए आयात मंजूरी देगा – जिसमें 50 हजार टन सरकारी एजेंसियों के लिए आरक्षित होगा। ये खेपें फरवरी 2026 के मध्य तक देश में पहुंचनी जरूरी हैं, ताकि ग्रीष्मकालीन कटाई के समय स्थानीय धान के दाम पर कोई दबाव न पड़े। प्रतिबंध हटते ही चावल पर आयात शुल्क 15% से बढ़कर 20% हो जाएगा – इसका कारण पेसो का अवमूल्यन और वैश्विक बाजार में संभावित तेजी बताया जा रहा है।

व्यापारियों को थोड़ी राहत देते हुए सरकार ने 10% डाउन पेमेंट की शर्त को अस्थायी रूप से हटा दिया है। जनवरी-फरवरी 2026 में आयात सिर्फ 17 नामित बंदरगाहों से ही हो सकेगा, ताकि नियंत्रण बना रहे। सबसे दिलचस्प बात यह कि फिलीपींस अब वियतनाम पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है और कंबोडिया, म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों से आयात बढ़ाने पर जोर दे रहा है – यह विविधता बाजार के लिए स्थिरता ला सकती है।

पीछे मुड़कर देखें तो 2024 में फिलीपींस ने पूरे 48 लाख मीट्रिक टन चावल आयात किया था, जो 2023 से 33% ज्यादा था। 2025 में यह घटकर करीब 35 लाख टन रहने का अनुमान है। ज्यादा आयात और भारी आवक ने 2024-25 में स्थानीय धान के दाम गिरा दिए थे, किसानों की कमाई प्रभावित हुई थी। अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने 2025-26 के लिए 55 लाख टन आयात का अनुमान लगाया था, लेकिन अब सख्त नीतियों के चलते यह आंकड़ा हासिल होता नहीं दिख रहा।

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भाइयो, यह खबर सिखाती है कि जब घरेलू उत्पादन मजबूत होता है, तो आयात पर नियंत्रण रखकर किसानों की रक्षा की जा सकती है। फिलीपींस का यह कदम न केवल वहां के अन्नदाताओं को मजबूती देगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के चावल व्यापार में संतुलन लाएगा। भारत जैसे बड़े निर्यातक देशों के लिए भी यह एक संकेत है कि बड़े आयातकों की नीतियां बदल रही हैं – हमें अपनी गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी कीमतों पर और ध्यान देना होगा।

आने वाला समय फिलीपींस के किसानों के लिए उम्मीद भरा है – रिकॉर्ड फसल, उचित दाम और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम। ऐसे प्रयास हर देश को प्रेरित करते हैं।

जय किसान! जय भारत! जय फिलीपींस!

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