
एक पौधे से 50 कल्ले तक का चमत्कार: गेहूं की दूसरी सिंचाई का सुपर प्लान
नमस्ते किसान भाइयों और बहनों, मैं पिछले कई सालों से खेती कर रहा हूं और गेहूं की फसल के साथ मेरा खास लगाव है। आज मैं आपको अपनी अनुभव की बात बताना चाहता हूं – गेहूं में पहली सिंचाई तो जड़ों को मजबूत बनाने के लिए जरूरी होती है, लेकिन असली खेल दूसरी सिंचाई का होता है। यह वह समय है जब फसल कल्ले फूटने की रेस में लग जाती है। अगर इस मौके पर हमने सही कदम उठाया, तो एक पौधे से 40-50 तक कल्ले निकल आते हैं, और अंत में बालियां भारी-भरकम होकर पैदावार को आसमान छूने लगती है। लेकिन अगर यहां चूक गए, तो कल्ले कम रह जाते हैं और पैदावार पर सीधा असर पड़ता है।
दूसरी सिंचाई का सही समय और क्यों है इतनी अहम?
गेहूं की बुवाई के लगभग 40-45 दिन बाद दूसरी सिंचाई का समय आता है। इसी दौरान पौधों में कल्लों का विकास जोरों पर होता है। इस स्टेज पर अगर मिट्टी में नमी और पोषण दोनों सही मात्रा में मिलें, तो फसल हरी-भरी और घनी हो जाती है। मेरे खेत में जब मैंने इस समय पर पूरा ध्यान दिया, तो फसल की तस्वीर ही बदल गई।
यहां भी जरूर पड़े- 20 दिसंबर का नीमच मंडी भाव देखने के लिए यहां क्लिक करें
दूसरी सिंचाई के साथ क्या डालें मिट्टी में?
सिंचाई से ठीक पहले या उसके साथ ही बची हुई यूरिया की खुराक जरूर डालें। मेरी सलाह है कि प्रति एकड़ के हिसाब से:
- यूरिया: 30 से 45 किलो (जितनी आपकी कुल खुराक में बाकी हो)।
- मैग्नीशियम सल्फेट: 7 से 10 किलो।
- फेरस सल्फेट: 5 से 7 किलो।
ये दोनों सल्फेट फसल के हरापन को बढ़ाने और क्लोरोफिल बनाने में कमाल करते हैं। भले ही आपकी फसल अभी अच्छी दिख रही हो, लेकिन इनका हल्का-सा मिश्रण (कम से कम 5-5 किलो) डालने से आगे चलकर बालियों में दाने भरने की ताकत कई गुना बढ़ जाती है। मैं खुद हर साल ऐसा करता हूं और रिजल्ट हमेशा शानदार मिलता है।
स्प्रे से दें तुरंत बूस्ट
मिट्टी में खाद देने के साथ-साथ पत्तियों पर स्प्रे करना न भूलें – यह फसल को फौरी ताकत देता है। मेरा पसंदीदा फॉर्मूला है:
प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में NPK 12:61:00 का 1 किलो अच्छे से घोलकर छिड़काव करें। इसमें भरपूर फॉस्फोरस होता है, जो इस समय कल्लों को मजबूत बनाने और उनकी संख्या बढ़ाने में सीधे मदद करता है।
अगर फसल थोड़ी कमजोर या पीली दिख रही हो, तो इसमें चिलेटेड जिंक (12%) के 100-125 ग्राम मिला लें। स्प्रे करने के अगले दिन ही फसल में नई चमक और जोश नजर आने लगता है – मैंने खुद यह फर्क महसूस किया है।
यहां भी जरूर पड़े- 20 दिसंबर का नीमच मंडी भाव देखने के लिए यहां क्लिक करें
खरपतवार और छोटी-छोटी सावधानियां
दूसरी सिंचाई से पहले खेत को अच्छे से देख लें। अगर बथुआ, जंगली पालक या मंडूसी जैसे खरपतवार उग आए हैं, तो पहले सही खरपतवारनाशक का छिड़काव कर लें। खरपतवार हटाने के 2-3 दिन बाद ही खाद और सिंचाई शुरू करें, वरना मेहनत बेकार जा सकती है।
एक बात और – बाजार में कई महंगे प्रोडक्ट्स जैसे माइकोराइजा या एसिड वाले फर्टिलाइजर आते हैं, लेकिन मेरा अनुभव कहता है कि बेसिक पोषक तत्वों पर ध्यान दें तो कम खर्च में ज्यादा फायदा होता है। पैसा बचता भी है और फसल भी शानदार होती है।
किसान भाइयों, गेहूं की फसल मेहनत और सही समय का खेल है। इस बार दूसरी सिंचाई पर पूरा फोकस करें, और देखिए कैसे आपका खेत हरा-भरा लहलहाने लगता है। शुभकामनाएं!