
मैंने हाल ही में एक युवा किसान की सफलता की कहानी पढ़ी, जो सलाद पत्ता उगा कर अच्छी कमाई कर रहे हैं। उनका नाम अनुज है और वे सहेलियां गांव के रहने वाले हैं। अनुज बताते हैं कि होटलों और रेस्टोरेंट्स में सलाद पत्ते की डिमांड बहुत ज्यादा रहती है, इसलिए इसका भाव भी अच्छा मिल जाता है।
वे सिर्फ 8 से 10 हजार रुपये खर्च करके 60 से 70 हजार रुपये तक की कमाई कर लेते हैं। अनुज जैसे युवा किसानों को सही जानकारी का फायदा मिल रहा है, और वे कम मेहनत में अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। अगर आप भी कम लागत वाली फसल की तलाश में हैं, तो सलाद पत्ता एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है।
सलाद पत्ता की खेती में कितना समय लग सकता है?
इस फसल को तैयार होने में करीब 40 से 45 दिन लगते हैं। अनुज जैसे किसान पहले खेत की अच्छी जुताई करते हैं – दो-तीन बार जुताई से मिट्टी भुरभुरी हो जाती है और खरपतवार कम उगते हैं। अगर जुताई के बीच कुछ दिन का गैप रखें, तो खरपतवार और भी कम होते हैं।
फिर वे पुरानी गोबर की खाद डालते हैं, जिससे पत्ते तेजी से बढ़ते हैं, हरे-भरे रहते हैं और क्वालिटी अच्छी होती है। खाद डालने के बाद बीज बोते हैं। पौधे निकलने पर हल्की सिंचाई करते हैं। बाजार में मुख्य रूप से होटल और रेस्टोरेंट ही खरीदार होते हैं, जहां अच्छा दाम मिलता है।
सलाद पत्ता की किस्में
अगर कम जमीन है, तो भी इसकी शुरुआत की जा सकती है। अनुज दो बीघा में खेती करते हैं और दो तरह की वैरायटी लगाते हैं। एक वैरायटी के पत्ते कुरकुरे होते हैं, जो सलाद के अलावा सैंडविच में भी इस्तेमाल होते हैं। इसमें कैलोरी कम होती है, इसलिए वजन घटाने वालों के लिए अच्छा विकल्प है।
सलाद पत्ते की मुख्य किस्में हैं – बटरहेड, क्रिस्पहेड, रोमेन और लूज लीफ। इनके पत्तों का टेक्सचर और स्वाद अलग-अलग होता है। भारत में ग्रेट लेक्स चाइनीज और स्लोबोल्ट जैसी किस्में अच्छी उपज देती हैं और फायदेमंद हैं।
बटरहेड के पत्ते नरम होते हैं, हल्के हरे रंग के और गोल शेप के। इसका सिर कॉम्पैक्ट रहता है, टच में मक्खन जैसा सॉफ्ट लगता है। स्वाद हल्का मीठा और क्रिस्पी होता है, साथ ही कई जरूरी विटामिन भी मिलते हैं। अनुज हरा और लाल दोनों तरह का सलाद पत्ता उगाते हैं, जिससे बाजार में बेहतर कीमत मिल जाती है।