बासमती धान को और होल्ड करें या बेच दें

मैं रामप्रसाद, मंडी मार्केट मीडिया की तरफ से आपको बासमती धान के बाजार की ताजा स्थिति के बारे में बताने जा रहा हूँ। हाल ही में बाजार में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिले थे, जो काफी किसानों और व्यापारियों के लिए चिंता का विषय बने हुए थे। कुछ दिनों पहले बड़े मिलर्स की खरीद कमजोर पड़ने से बासमती के भाव 200 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गए थे। कई जगहों पर 1121, 1718 और 1401 जैसी प्रमुख किस्मों के रेट नीचे सरक गए थे, जिससे माहौल में मंदी की अफवाहें उड़ने लगीं। लेकिन मैंने अपनी पिछली रिपोर्ट में स्पष्ट कहा था कि बाजार में ज्यादा मंदी की गुंजाइश नहीं है, क्योंकि बुनियादी फैक्टर मजबूत हैं। और देखिए, ठीक वैसा ही हुआ! बाजार ने तेजी से रिकवरी की और ज्यादातर गिरावट कवर हो गई।

आज की तारीख में जुलाना और नजफगढ़ जैसी प्रमुख मंडियों में धान के भाव फिर से मजबूत हो रहे हैं। जहां कुछ दिन पहले रेट 4200 रुपये तक फिसल गए थे, अब वे 4400 के आसपास पहुंच चुके हैं। इसी तरह की तेज रिकवरी 1401, PB1 और 1886 (P6) किस्मों में भी दिख रही है। फतेहाबाद मंडी में 1401 धान के भाव 4200 से गिरकर अब 4500 तक का कारोबार दिखा रहे हैं। मध्य प्रदेश की पिपरिया मंडी में PB1, जो 3700 से नीचे चला गया था, अब फिर 3800 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। 1886 किस्म में भी अच्छी उछाल आई है। कुल मिलाकर, बाजार रिकवरी मोड में है और किसानों के चेहरे पर राहत लौट आई है।

अब बात करते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है। पिछले साल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ अशांति के कारण बासमती निर्यातकों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। इस वजह से इस सीजन में वे ज्यादा सतर्क हैं – फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। हर तेज उछाल के बाद थोड़ी मुनाफा वसूली होना स्वाभाविक है, लेकिन यह स्थायी मंदी नहीं है। बल्कि इस साल कई सकारात्मक फैक्टर बासमती को और ऊपर ले जाने के संकेत दे रहे हैं। सबसे पहले, वैश्विक स्तर पर माहौल काफी शांत है। इक्का-दुक्का घटनाओं को छोड़ दें तो ओवरऑल शांति बनी हुई है, जो निर्यात के लिए अच्छा संकेत है। भारत ने पिछले साल रिकॉर्ड निर्यात किया था, और इस बार रुपये की कमजोरी से निर्यातकों को अतिरिक्त सपोर्ट मिल रहा है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बड़े निर्यात के कारण पुराना स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है। नए ऑर्डर की सप्लाई ताजा फसल से ही होगी, जिससे डिमांड मजबूत बनी रहेगी। भारतीय बासमती अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाकिस्तानी बासमती से सस्ता है, और यह प्राइस गैप इतना बड़ा है कि कई खरीदार भारत की तरफ मुड़ सकते हैं। सप्लाई साइड पर भी अच्छी खबर है – इस सीजन में भारत और पाकिस्तान दोनों में बासमती का उत्पादन पिछले साल की तुलना में कम रहा है। मंडियों में धान की आवक घटने लगी है, जो प्रतिस्पर्धात्मक खरीद को बढ़ावा देगी। जल्द ही इसका असर भाव पर सकारात्मक दिखेगा।

पिछले दो सालों में स्टॉक होल्ड करने वाले कई बड़े किसानों और व्यापारियों को नुकसान हुआ था, इसलिए इस बार ज्यादातर ने सस्ते भाव में अपना माल निकाल दिया है। अब बाजार में फ्रेश बाइंग का दौर शुरू हो सकता है। इसके अलावा, 26 जनवरी से दुबई में गल्फ फूड मेला शुरू होने वाला है, जो दुनिया का सबसे बड़ा फूड एक्सपो है। यहां से नए ऑर्डर और सकारात्मक सेंटीमेंट मिलने की पूरी उम्मीद है। कुल मिलाकर, लंबे समय में बासमती बाजार में तेजी के संकेत मजबूत हैं।

अब सलाह की बात करें तो जो साथी लंबा होल्ड करना चाहते हैं, वे 1121 और 1718 जैसी प्रीमियम किस्मों को होल्ड कर सकते हैं। इनमें आगे अच्छा पोटेंशियल है। वहीं, 1401 और PB1 में अगर अच्छे भाव मिल रहे हैं तो माल निकालकर प्रॉफिट बुक करना समझदारी होगी। अगर PB1 को लंबा होल्ड करना है तो 3700 रुपये को मजबूत सपोर्ट मानें। 1401 में 4150 का सपोर्ट लेवल रखें, लेकिन अगर पिपरिया मंडी में यह लेवल टूटता है तो बिना देरी माल निकाल दें। प्रीमियम किस्मों जैसे ताज, सुगंधा और सरबती का उत्पादन इस बार कम रहा है, इसलिए इनमें अतिरिक्त फायदा मिल सकता है।

दोस्तों, बाजार हमेशा उतार-चढ़ाव भरा होता है, लेकिन बुनियादी बातें मजबूत हैं तो घबराने की जरूरत नहीं। अपना व्यापार हमेशा अपने विवेक और जोखिम क्षमता के अनुसार करें। कोई भी फैसला लेने से पहले स्थानीय मंडी की स्थिति और विश्वसनीय स्रोतों से अपडेट लें। अगर कोई सवाल हो तो कमेंट करें, मैं कोशिश करूंगा जवाब देने की।

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