
सरसों भाव चले नीचे की तरफ हमारी रिपोर्ट 100% सटीक
प्यारे किसान भाइयों और बहनों,
नमस्कार! रबी सीजन की सरसों फसल अब परिपक्वता की ओर बढ़ रही है और बाजार में उसकी स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। पिछले कुछ दिनों से सरसों बाजार में कमजोरी का रुख साफ नजर आ रहा है। पहले सरसों खल (मस्टर्ड केक) की मजबूत मांग ने बाजार को अच्छा सहारा दिया था, लेकिन जैसे ही चीन सहित विदेशी बाजारों से खल की मांग सुस्त पड़ी, इसका सीधा असर सरसों दाने और तेल दोनों पर पड़ा है।
हमने आपको पहले ही चेताया था कि सरसों में गिरावट रुक-रुक कर आएगी – कोई एक बार में बड़ा क्रैश नहीं, बल्कि धीरे-धीरे नीचे की यात्रा। यही हो रहा है। जयपुर मंडी में लगातार तीन दिन 7200 रुपये प्रति क्विंटल पर अटका भाव कल 50 रुपये टूटकर 7150 पर बंद हुआ। सलोनी प्लांट पर भी 50 रुपये की कमी आई और भाव 7700 रुपये पहुंच गए। अन्य प्रमुख मंडियों में भरतपुर में 6760, दिल्ली और चरखी दादरी में 6950 रुपये प्रति क्विंटल रहे। ब्रांडेड तेल मिलों ने भी शाम के सत्र में अपनी खरीद कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की, जिससे बाजार को अतिरिक्त सपोर्ट नहीं मिल पाया।
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मंडियों में सरसों की दैनिक आवक अभी भी मजबूत बनी हुई है – करीब 2.25 लाख बोरी के आसपास। इस साल बुवाई क्षेत्रफल भी पिछले साल के 86.57 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 87.80 लाख हेक्टेयर हो चुका है, जो सामान्य औसत 79.17 लाख हेक्टेयर से काफी ऊपर है। अच्छा मौसम और बेहतर बीजों के कारण उत्पादन भी उम्मीद से ज्यादा होने के संकेत हैं। फरवरी से नई सरसों की आवक शुरू हो जाएगी, जो बाजार पर और दबाव डालेगी।
तेल के मोर्चे पर भी कमजोरी दिखी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों (पाम, सोया) की कीमतें गिरने से सरसों तेल पर भी असर पड़ा। जयपुर में 10 किलो तेल का भाव 10 रुपये टूटकर 1431, दिल्ली में 1425 और भरतपुर में 1440 रुपये रहा। हालांकि सर्दियों में खपत का पीक सीजन चल रहा है, इसलिए तेल में बहुत बड़ी गिरावट नहीं आ रही – घरेलू मांग इसे कुछ हद तक थामे हुए है। आगे तेल का रुख काफी हद तक आयातित पाम और सोया तेल के भावों पर निर्भर करेगा।
सबसे बड़ा झटका सरसों खल को लगा। चीन से मांग कमजोर होने के कारण मंगलवार को खल बाजार में 100 रुपये तक की गिरावट आई। अलवर में 2750, भरतपुर में 2850 और जयपुर में 2755 रुपये प्रति क्विंटल भाव रहे। खल की कमजोरी सीधे सरसों दाने को प्रभावित कर रही है, क्योंकि क्रशिंग मिलें अब कम मार्जिन पर काम कर रही हैं।
किसान भाइयों, कुल मिलाकर बाजार का रुझान कमजोरी की ओर ही है। फरवरी में नई फसल की भारी आवक से पहले बाजार रुक-रुक कर नीचे जाएगा। बीच-बीच में 50-75 रुपये का मामूली उछाल भी आ सकता है, लेकिन समग्र ट्रेंड मंदा ही रहेगा। इसलिए हमारी सलाह है कि अगर भंडारण की सुविधा नहीं है या जरूरत हो, तो धीरे-धीरे माल हल्का करते रहें। अभी के भाव पिछले महीने के हाई से काफी नीचे हैं, लेकिन नई फसल आने तक और दबाव बन सकता है।
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हमारा उद्देश्य सिर्फ आपको सटीक और समय पर जानकारी देना है ताकि आप अपनी मेहनत की फसल को सही समय पर और उचित दाम पर बेच सकें। बाजार अप्रत्याशित होता है – मौसम, निर्यात मांग, आयात नीतियां और वैश्विक कीमतें सब प्रभाव डालती हैं। इसलिए हमारी सलाह को आधार बनाएं, लेकिन अंतिम निर्णय अपनी आर्थिक स्थिति, भंडारण क्षमता और स्थानीय मंडी की स्थिति देखकर लें।
आगे भी सरसों सहित सभी रबी फसलों की ताजा अपडेट देते रहेंगे। कोई सवाल हो तो जरूर पूछें। आपकी फसल सुरक्षित रहे और मेहनत रंग लाए, यही कामना है।
जय जवान, जय किसान!