मूंग मसूर दाल की तेजी मंदी रिपोर्ट – 03 जनवरी 2026

मूंग मसूर दाल की तेजी मंदी रिपोर्ट – 03 जनवरी 2026 : शुक्रवार को मंडी में घूमते हुए लगा कि मूंग और मसूर का बाजार अभी किसी एक दिशा में पूरी तरह नहीं झुका है। मिला-जुला रुख था – कहीं स्थिरता, कहीं हल्की तेजी, कहीं अच्छी क्वालिटी पर जोरदार बोलियां। मैं पिछले कई सालों से इन दोनों दालों को ट्रैक करता हूं और जानता हूं कि इनका बाजार हमेशा क्वालिटी पर टिका रहता है। आम माल पर दबाव रहेगा, लेकिन चुनिंदा और साफ-सुथरा माल हमेशा अपना दाम वसूलता है। इस बार भी यही कहानी दोहराई गई।

सबसे पहले मूंग की बात करें। ज्यादातर घरेलू मंडियों में भाव स्थिर ही रहे, लेकिन जहां अच्छी क्वालिटी थी, वहां खरीदारों ने हाथ खोलकर खरीदा। अकोला में चमकी मूंग ने 100 रुपए का उछाल लिया और 7,600 प्रति क्विंटल पर पहुंच गई। इंदौर में बोल्ड मूंग 8,300 पर टिकी रही, जयपुर में चमकी 7,300 और दिल्ली की एमपी लाइन में 7,100 प्रति क्विंटल पर कारोबार हुआ। स्थिरता का ये माहौल इसलिए बना क्योंकि एक तरफ सरकारी बिकवाली का दबाव है, तो दूसरी तरफ चुनिंदा माल की कमी ने बाजार को संभाल लिया।

नेफेड ने 31 दिसंबर को ओडिशा में ई-नीलामी के जरिए 2025 की मूंग को 6,601 से 6,617 रुपए प्रति क्विंटल की रेंज में बेचा। केंद्र सरकार केंद्रीय पूल से लगातार स्टॉक निकाल रही है, जिसका सीधा असर आम और औसत क्वालिटी की मूंग पर पड़ रहा है। कई व्यापारी यही कह रहे थे कि इस बिकवाली ने नीचे का दबाव बनाए रखा है। लेकिन दूसरी तरफ राजस्थान की अच्छी क्वालिटी मूंग में 100 रुपए की तेजी आई और भाव 7,700 तक पहुंच गए। कुछ चुनिंदा लॉट तो 8,000 रुपए तक बोले गए। ये देखकर लगा कि बाजार अभी भी अच्छे माल को सम्मान दे रहा है।

फसल को अब चार महीने से ज्यादा हो चुके हैं। शुरू में जो दागी और नमी वाली मूंग आई थी, उसकी आवक अब भी जारी है, लेकिन अब माल सूखा और साफ आने लगा है। धोया मूंग और छिलका बनाने वाली मिलें धीरे-धीरे निचले भाव पर फिर से खरीद में लौट रही हैं। मुझे लगता है कि जैसे-जैसे पुरानी फसल खत्म होगी और नई फसल (गर्मी की मूंग) आने में अभी समय है, अच्छी क्वालिटी के माल में और सुधार देखने को मिल सकता है। आम मूंग पर सरकारी बिकवाली का दबाव रहेगा, लेकिन सिलेक्टेड माल की कमी बाजार को नीचे ज्यादा गिरने नहीं देगी।

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अब मसूर की तरफ आते हैं। यहां भी क्वालिटी ने बाजार की दिशा तय की। देसी मसूर में हल्की मजबूती दिखी, जबकि आयातित मसूर ज्यादातर स्थिर रही। दिल्ली में देसी मसूर 25 रुपए तेज होकर 6,625 प्रति क्विंटल पर बंद हुई। पटना में 6,850 पर स्थिरता बनी रही। पोर्ट्स पर मुंद्रा और कांडला में मसूर 5,450, हजीरा पर 5,550 और कनाडा कंटेनर यार्ड में 5,750 प्रति क्विंटल बोली गई। कनाडा मसूर मुंद्रा से दिल्ली पहुंच में क्वालिटी अनुसार 5,870 तक बोली गई।

सबसे दिलचस्प बात छोटी मसूर की रही – भारी कमी के चलते बढ़िया माल 85 रुपए प्रति किलो तक बिक गया। मध्य प्रदेश की मुख्य मंडियों – मुंगावली, गंज बासौदा, सागर, भोपाल और अशोक नगर में ताजा आवक घट रही है। लोकल और चालानी खरीदारों की मांग बनी हुई है, जिससे मोटी मसूर बिल्टी 6,600 पर अच्छे से टिकी हुई है। ये कमी बाजार को सपोर्ट दे रही है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कनाडा में इस साल मसूर का उत्पादन 38% बढ़कर 33.63 लाख टन आंका जा रहा है। इसका मतलब है कि आयातित माल की उपलब्धता अच्छी रहेगी और पोर्ट्स पर दबाव बना रहेगा। लेकिन घरेलू नई मसूर फसल अप्रैल में आएगी, तब तक देसी मसूर की लोकल मांग और आवक की कमी बाजार को संभाले रखेगी। बहुत बड़ी मंदी के संकेत अभी नहीं दिख रहे।

कुल मिलाकर दोनों दालों में यही पैटर्न दिख रहा है – औसत और आयातित माल पर स्थिरता या हल्का दबाव, लेकिन अच्छी देसी क्वालिटी और चुनिंदा माल में मजबूती। मूंग में सरकारी बिकवाली का असर ज्यादा है, इसलिए आम माल सस्ता रहेगा, लेकिन साफ-सुथरी और राजस्थान की मूंग में आगे और सुधार की गुंजाइश है। मसूर में आवक घटने और मांग बने रहने से मौजूदा स्तर फिलहाल टिके रह सकते हैं।

मेरा मानना है कि इन दोनों दालों में बड़ा दांव लगाने की जल्दबाजी न करें। क्वालिटी देखकर, अपनी जरूरत और स्टॉक पोजीशन के हिसाब से खरीदें। जो साथी अच्छा माल होल्ड कर सकते हैं, उनके लिए ये समय फायदेमंद हो सकता है। बाकी के लिए छोटे-छोटे ट्रेड और सतर्कता बेहतर रहेगी।

मैं तो बस अपनी नजर से जो देख और समझ रहा हूं, वो आपके साथ साझा कर रहा हूं। बाजार हमेशा नई कहानी लिखता है – कभी तेजी, कभी स्थिरता, कभी करेक्शन। बस धैर्य और विवेक से साथ चलें तो रास्ता आसान हो जाता है।

व्यापार अपने विवेक और जोखिम सहने की क्षमता के अनुसार करें। आने वाला सप्ताह फिर नई तस्वीर दिखाएगा, तब तक सतर्क रहें, सकारात्मक रहें।

जय हिंद, जय किसान!

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