
मक्का के घरेलू और विदेशी बाजार रुझान अपडेट
नए साल के पहले ही ट्रेडिंग दिन यानी बुधवार को घरेलू मक्का बाजार में ज्यादा हलचल नहीं दिखी। कहीं भाव स्थिर रहे, कहीं हल्की-सी तेजी आई, लेकिन कुल मिलाकर बाजार निचले स्तरों पर थोड़ा सहारा लेकर चल रहा है। शाम की क्लोजिंग में गुलाब बाग मंडी (मंदसौर) में मक्का ₹30 की बढ़त के साथ 2,150 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। छिंदवाड़ा में 1,930, सह्याद्री स्टार्च प्लांट पर 1,900, सांगली में 2,100 और इंदौर के तिरुपति स्टार्च प्लांट पर 1,800 रुपये का भाव बोला गया। कैटल फीड क्वालिटी का इंदौर में भाव 1,550 रुपये पर टिका रहा। अच्छी क्वालिटी वाले मक्के की डिमांड तो तेज बनी हुई है, लेकिन नियमित आवक और निर्यात मांग की सुस्ती की वजह से बड़ी तेजी नहीं बन पाई।
निर्यात के मोर्चे पर थोड़ी चिंता वाली खबर है। मुंबई पोर्ट पर मक्का के भाव गिरकर ₹1,925 प्रति क्विंटल रह गए, जो हाल के हाई लेवल से करीब 125 रुपये नीचे हैं। गांधीधाम और गांधीनगर जैसे प्रमुख लोडिंग सेंटर्स से भी खरीदारी काफी कमजोर बनी हुई है। दक्षिण भारत में कर्नाटक के बाजारों में भाव 1,960 रुपये के आसपास घूम रहे हैं, जो पिछले 4-5 दिनों में ही 60-70 रुपये टूट चुके हैं। वहां एथेनॉल प्लांट्स का उठान कम है और थोक मांग भी सुस्त पड़ी है।
कर्नाटक में एक बड़ा विवाद चल रहा है। इस साल राज्य में करीब 16 लाख हेक्टेयर में मक्का की बुआई हुई और अनुमानित उत्पादन लगभग 54 लाख मीट्रिक टन है। सरकार ने 10 लाख टन की MSP पर खरीद का ऐलान किया था, लेकिन अभी तक एक भी खरीद केंद्र नहीं खुला। किसान परेशान हैं और प्रदर्शन भी हो रहे हैं। अगर जल्दी खरीद शुरू नहीं हुई तो लोकल सप्लाई और बढ़ सकती है, जिससे भावों पर दबाव बनेगा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो वहां स्थिति थोड़ी अलग है। यूक्रेन इस समय मक्का का बड़ा सप्लायर बना हुआ है। 22 दिसंबर तक उसने करीब 15 लाख टन मक्का एक्सपोर्ट कर दिया है, जिसमें स्पेन, इटली और तुर्की मुख्य खरीदार हैं। अमेरिका का जनवरी शिपमेंट पहले ही बिक चुका है और फरवरी की बुकिंग भी लगभग पूरी हो चुकी है। वैश्विक स्तर पर सप्लाई के विकल्प सीमित होने से इंटरनेशनल प्राइस बढ़कर 208 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गए हैं। यह घरेलू बाजार के लिए लंबे समय में पॉजिटिव सिग्नल है, क्योंकि अगर ग्लोबल डिमांड बनी रही तो भारतीय मक्का की निर्यात मांग भी लौट सकती है।
कुल मिलाकर नए साल में घरेलू बाजार की तस्वीर यह है कि सप्लाई पर्याप्त है, स्टॉकिस्टों के पास पुराना माल भी पड़ा है और निर्यात अभी कमजोर है। इसलिए बड़ी तेजी की गुंजाइश फिलहाल कम दिख रही है। लेकिन जैसे ही क्रिसमस-न्यू ईयर की अंतरराष्ट्रीय छुट्टियां खत्म होंगी और निचले स्तरों पर औद्योगिक व निर्यात खरीदारी लौटेगी, भावों में हल्का सुधार जरूर आ सकता है। स्टार्च और एथेनॉल प्लांट्स अगर अपना उठान बढ़ाते हैं तो भी बाजार को सपोर्ट मिलेगा।
सबसे बड़ी नजर रखने वाली बात है सरकारी खरीद नीति। अगर कर्नाटक में जल्दी खरीद शुरू हुई या केंद्र सरकार ने कोई नया ऐलान किया, तो बाजार की दिशा बदल सकती है। वरना सप्लाई प्रेशर बना रहेगा।
किसान भाइयों, अगर आपके पास अच्छी क्वालिटी का मक्का है तो उसे होल्ड करके रखें, क्योंकि आगे डिमांड बढ़ने पर बेहतर भाव मिल सकता है। कम क्वालिटी वाले माल में जल्दबाजी न करें, लेकिन मौका देखकर निकालते रहें। व्यापारी साथियों से कहूंगा कि बड़े पोजीशन लेने से पहले ग्लोबल मार्केट और सरकारी नीति पर नजर बनाए रखें। बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा रहता है, इसलिए रिस्क मैनेजमेंट सबसे जरूरी है।
अंत में वही पुरानी बात – व्यापार अपने विवेक और अपनी जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार करें। किसी की सलाह पर पूरा भरोसा न करें।
अगली अपडेट में फिर मिलते हैं। तब तक सावधान रहें और शुभकामनाएं!