क्या सरकार गेहूं निर्यात खोलने पर विचार कर रही है? ताजा अपडेट

क्या सरकार गेहूं निर्यात खोलने पर विचार कर रही है?
क्या सरकार गेहूं निर्यात खोलने पर विचार कर रही है?

गेहूं बाजार में थोड़ी राहत की सांस

नमस्ते दोस्तों, पिछले कुछ दिनों से गेहूं के बाजार को देखकर लग रहा है कि आखिरकार थोड़ी सी राहत मिलनी शुरू हो गई है। OMSS टेंडर बंद होने के बाद बाजार में सपोर्ट आने लगा है और भाव धीरे-धीरे ऊपर की ओर रेंगने लगे हैं। मैं आपको अपनी नजर से पूरी स्थिति बताता हूं।

दिल्ली में फिर से 2800 का आंकड़ा पार

दिल्ली के बाजार में तो पिछले कई दिनों से भाव 2730 तक फिसल चुके थे, लेकिन अब फिर से 2800-2815 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। हां, सप्लाई अभी भी भरपूर है, इसलिए तेजी की रफ्तार कछुए जैसी ही है – जल्दबाजी बिल्कुल नहीं।

प्रमुख मंडियों के ताजा भाव

आज की तारीख में कुछ मुख्य मंडियों के भाव इस प्रकार रहे:

  • नरेला: 2640 रुपये
  • नजफगढ़: 2600 रुपये
  • गोरखपुर: 2650 रुपये
  • अलवर: 2730 रुपये
  • मैनपुरी: 2700 रुपये प्रति क्विंटल

इस बार उत्पादन और खरीद दोनों मजबूत

चालू सीजन में गेहूं का उत्पादन करीब 1153 लाख मीट्रिक टन अनुमानित है, जो पिछले साल के 1090 लाख मीट्रिक टन से काफी बेहतर है। सरकार की खरीद भी इस बार 299.7 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई, जो पिछले वर्षों की तुलना में बहुत मजबूत आंकड़ा है।

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OMSS टेंडर का असर और बंद होना

नवंबर की शुरुआत में सरकार ने OMSS के तहत 2550 रुपये प्रति क्विंटल के रिजर्व प्राइस पर गेहूं बेचना शुरू किया था। लेकिन उठाव कम रहा और बाजार में पहले से ही अच्छी सप्लाई थी, इसलिए टेंडर ज्यादा सफल नहीं हो पाते। आखिरकार इन्हें बंद कर दिया गया। जैसे ही टेंडर बंद हुए, बाजार में 40-60 रुपये का तुरंत उछाल देखने को मिला।

क्या जल्द खुलेगा निर्यात?

बाजार में ये चर्चा जोरों पर है कि बंपर उत्पादन और पर्याप्त स्टॉक को देखते हुए सरकार एक-दो हफ्तों में गेहूं का निर्यात फिर से खोल सकती है। अगर ऐसा हुआ तो भाव 3000 के स्तर को भी छू सकते हैं। उम्मीद तो सबको यही है!

ट्रेडर्स का पुराना नुकसान और सरकार का मूड

पिछले साल जनवरी-फरवरी में भाव 3350 तक पहुंचे थे, उसी उम्मीद में कई ट्रेडर्स और स्टॉकिस्टों ने 2500-2650 के बीच भारी माल उठाया था। ब्याज और भाड़े जोड़कर इस बार उन्हें अच्छा खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि मौजूदा भाव पिछले साल से 350-400 रुपये नीचे चल रहे हैं। इसी को देखते हुए सरकार फिलहाल बाजार को राहत देने के मूड में है और OMSS दोबारा शुरू करने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखा रही।

रबी बुआई का ध्यान रखते हुए सावधानी

अब तक गेहूं की करीब 70% बुआई हो चुकी है, बाकी 30% पूर्वी यूपी और बिहार में बाकी है। सरकार नहीं चाहती कि भाव बहुत नीचे जाकर अगले सीजन की बुवाई प्रभावित हो। इसलिए बाजार को बहुत ज्यादा दबाने का इरादा नहीं दिख रहा।

आगे क्या हो सकता है?

ऑफ सीजन होने की वजह से आने वाले दो महीनों में आवक सीमित रहेगी और सर्दियों में मिल क्वालिटी गेहूं की डिमांड बढ़ेगी। ऐसे में अच्छी क्वालिटी के गेहूं 2900 रुपये तक जा सकते हैं। लेकिन पिछले सीजन जैसी तेजी की तो दूर-दूर तक कोई गुंजाइश नहीं दिख रही।

अंत में यही कहूंगा – बाजार अभी संभल रहा है, लेकिन बहुत बड़ी उम्मीद न पालें। अपना व्यापार सोच-समझकर और अपने विवेक से करें।

शुभकामनाएं! आपका बाजार मित्र

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