DOC हुई तेज, क्या और बढ़ेंगे सोयाबीन के भाव

पिछले कुछ समय से सोयाबीन के बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मैं खुद एक किसान हूं और बाजार की इन हलचलों पर नजर रखता हूं, इसलिए आज आपके साथ सोयाबीन की मौजूदा स्थिति पर अपनी राय साझा करना चाहता हूं। पिछले एक महीने में कीर्ति प्लांट जैसी जगहों पर सोयाबीन की कीमतें ₹4860 से बढ़कर ₹5150 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं, यानी करीब ₹290 की बढ़ोतरी। यह देखकर अच्छा लगता है, क्योंकि पिछले साल की भारी गिरावट के बाद किसानों को थोड़ी राहत मिली है। पूरे एक साल की बात करें तो बाजार में करीब ₹700 की वृद्धि हुई है। फिर भी, हैरानी की बात यह है कि ये कीमतें अभी भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे चल रही हैं। सरकार ने इस साल MSP को बढ़ाकर अच्छा कदम उठाया है, लेकिन बाजार में असल कीमतें अभी उस स्तर तक नहीं पहुंच पाई हैं।

मैंने देखा है कि इस साल घरेलू स्तर पर सोयाबीन की उपलब्धता कम रही है। कमजोर आवक और पेराई मिलों के पास सीमित स्टॉक होने से कीमतों को लगातार सपोर्ट मिल रहा है। अक्टूबर-नवंबर में शुरुआती आवक सिर्फ 33 लाख टन के आसपास थी, जबकि पेराई 20.5 लाख टन तक पहुंच गई। अब आगे के महीनों के लिए कैरी-इन स्टॉक बहुत कम बचा है। कुल मिलाकर, पेराई के लिए उपलब्ध सोयाबीन का अनुमान 104 लाख टन के करीब है, जो पिछले साल से लगभग 19 लाख टन कम है। इससे बाजार में मजबूती बनी हुई है। घरेलू बुनियादी स्थिति अभी भी मजबूत लग रही है, लेकिन उच्च कीमतों के कारण बढ़ोतरी रुक-रुक कर हो रही है। किसानों को लगता है कि अगर आवक और बढ़ी तो दबाव आ सकता है, लेकिन फिलहाल सप्लाई टाइट है।

खाद्य तेलों के आयात की बात करें तो नवंबर में कुल आयात घटकर 11.5-11.8 लाख टन रह गया। कच्चे सोयाबीन तेल का आयात 3.7 लाख टन के आसपास था और दिसंबर की शुरुआत में बंदरगाहों पर स्टॉक सिर्फ 2.65 लाख टन अनुमानित था। इससे घरेलू बाजार पर कम दबाव पड़ा और कीमतें ऊपर रहीं। वैश्विक स्तर पर चीन की सोया मील (DOC) की मांग लगातार मजबूत है, जिसने पूरी दुनिया के सोयाबीन बाजार को सपोर्ट दिया है। इसका असर हमारे यहां भी साफ दिख रहा है। सोमवार को ओम श्री धुलिया प्लांट में DOC की कीमत ₹1000 बढ़कर ₹40,000 प्रति टन हो गई। सोया DOC की भारी डिमांड के चलते मिलें मजबूती से खरीदारी कर रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में CBOT सोयाबीन की कीमतें थोड़ी बढ़ी हैं – करीब 0.45% की तेजी के साथ 10.50 डॉलर प्रति बुशेल पर पहुंचीं। हालांकि ब्राजील से आने वाली भारी सप्लाई के कारण अमेरिकी बाजार पर दबाव बना हुआ है। ब्राजील के बारे में ताजा खबरें हैं कि 2025-26 सीजन में उनका उत्पादन रिकॉर्ड 178 मिलियन टन तक जा सकता है, जो USDA के 175 मिलियन टन अनुमान से भी ज्यादा है। अगर ब्राजील का उत्पादन इतना बढ़ा तो निश्चित रूप से हमारे घरेलू बाजार पर कुछ दबाव पड़ेगा, क्योंकि वैश्विक सप्लाई बढ़ने से कीमतें नीचे आ सकती हैं। भारत से चीन को सोया DOC का निर्यात अभी नगण्य है, लेकिन भविष्य में इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

कुल मिलाकर, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फैक्टर्स को देखते हुए सोयाबीन के फंडामेंटल अभी मजबूत हैं। कीमतें ₹4800-₹5300 प्रति क्विंटल के दायरे में ऊपरी स्तरों पर टेस्ट हो रही हैं। मुझे लगता है कि बाजार में अभी ₹100-150 की और तेजी की गुंजाइश है, लेकिन कमजोर सप्लाई को देखते हुए खरीदारों को ज्यादा रिस्क नहीं लेना चाहिए। किसान भाइयों से मेरी सलाह है कि मौका देखकर बेचें, क्योंकि ब्राजील की बड़ी फसल आगे दबाव डाल सकती है। अगर आप सोयाबीन की प्रीमियम सर्विस या सटीक सलाह चाहते हैं तो विशेषज्ञों से संपर्क करें। बाजार अनिश्चित है, लेकिन सही जानकारी से हम अच्छा फैसला ले सकते हैं।

यह सब देखकर लगता है कि सोयाबीन किसानों के लिए अभी भी उम्मीद की किरण है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है। आने वाले महीनों में मौसम, आयात और वैश्विक डिमांड पर नजर रखें। उम्मीद है कि कीमतें MSP के ऊपर स्थिर रहें और किसानों को मेहनत का पूरा फल मिले। जय जवान, जय किसान!

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