चने के बाजार में लगातार नरमी, कीमतें नीचे की ओर

चने के बाजार में लगातार नरमी, कीमतें नीचे की ओर

किसान साथियों और व्यापारियों, चने का बाजार इन दिनों काफी कमजोर चल रहा है। गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही और भाव लगातार नीचे जा रहे हैं। पिछले हफ्ते में भी बाजार में करीब 25 रुपये प्रति क्विंटल की कमी देखी गई। इसका मुख्य कारण दाल और बेसन की मांग में कमी है। दाल मिल वाले सिर्फ अपनी जरूरत भर का माल खरीद रहे हैं, जिससे मंडियों में बिक्री का भारी दबाव बना हुआ है। उपभोक्ताओं की खपत कम होने से स्टॉक बढ़ रहा है और कीमतें दबाव में हैं।

शनिवार को बिल्टी कारोबार में दिल्ली में राजस्थान लाइन का चना 5575 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गया। जयपुर बिल्टी में थोड़ी बढ़त के साथ 5550 रुपये रहा। मध्य प्रदेश की मंडियों में इंदौर (माही) में 5425, विदिशा में 5200, हरदा में 5100 रुपये के भाव देखे गए। राजस्थान के अलवर में 5330 और महाराष्ट्र के अकोला में 5550 रुपये प्रति क्विंटल चना कारोबार हुआ। आयातित चने की कीमतें भी नरम हैं। मुंबई पोर्ट पर ऑस्ट्रेलियाई चना 5250 और तंजानिया का 5125 रुपये रहा, जबकि कांडला पर ऑस्ट्रेलियाई लाइन 5225 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई।

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नए सीजन का ऑस्ट्रेलियाई देसी चना लगातार भारत आ रहा है, जिसने घरेलू बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला है। चना दाल के भाव भी कमजोर हैं। जयपुर में 6200, इंदौर में 6150 और अकोला में 6250 रुपये के आसपास दाल कारोबार हुई। चना बेसन मुंबई में 4025 रुपये प्रति 50 किलो बैग पर स्थिर बना रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऑस्ट्रेलियाई चना जनवरी शिपमेंट के लिए CNF 510 डॉलर और तंजानिया ओरिजिन 560 डॉलर पर टिका हुआ है।

इस साल जनवरी से अक्टूबर 2025 तक भारत में करीब 12.39 लाख टन चने का आयात हो चुका है, जो पिछले साल से कई गुना ज्यादा है। मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया और तंजानिया से यह माल आया, जिसने घरेलू कीमतों को नीचे रखा है। हालांकि, हाल के महीनों में आयात की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है, लेकिन पहले का स्टॉक अभी भी बाजार को प्रभावित कर रहा है।

सकारात्मक पक्ष यह है कि रबी सीजन में चने की बुवाई अच्छी हुई है। अब तक बुवाई क्षेत्र 4 प्रतिशत बढ़कर 100.99 लाख हेक्टेयर पहुंच चुका है। राजस्थान में 34 प्रतिशत और गुजरात में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अच्छी नमी और अनुकूल मौसम से फसल की स्थिति बेहतर है, जिससे अगले साल अच्छी पैदावार की उम्मीद जगी है।

कुल मिलाकर बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर मांग, भारी आयात का असर और आने वाली नई फसल की अच्छी संभावना के कारण चने में बड़ी तेजी मुश्किल दिख रही है। अगर सरकार आयात शुल्क को और सख्त नहीं करती, तो निकट भविष्य में बाजार नरम ही रहेगा। लेकिन अच्छी बात यह है कि भाव इतने नीचे आ चुके हैं कि यहां से बहुत बड़ी गिरावट की गुंजाइश कम है। बाजार रेंज बाउंड रह सकता है, जिसमें हल्की-फुल्की रिकवरी के मौके भी बन सकते हैं।

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किसान भाइयों, अगर आपके पास पुराना स्टॉक है तो जरूरत के हिसाब से बेचें और नई फसल का इंतजार करें। व्यापारी भी सतर्क रहें, क्योंकि मांग बढ़ने पर थोड़ी तेजी आ सकती है, लेकिन फिलहाल धैर्य रखना बेहतर है। बाजार में उतार-चढ़ाव आम है, लेकिन सही समय पर फैसला लेकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। व्यापार अपने विवेक और बाजार की स्थिति देखकर करें। आने वाले दिनों में फसल की रिपोर्ट पर नजर रखें, क्योंकि वही आगे की दिशा तय करेगी।

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