चना बाजार रिपोर्ट 23 Dec 2025

चना बाजार रिपोर्ट 23 Dec 2025
चना बाजार रिपोर्ट 23 Dec 2025

साथियों, इन दिनों चने का बाजार एक गहरे दबाव के दौर से गुजर रहा है, और इसका सबसे बड़ा कारण है ऑस्ट्रेलिया से लगातार आ रहा भारी आयात। यह सस्ता विदेशी चना घरेलू बाजार पर भारी पड़ रहा है, बिकवाली का बोझ बढ़ता जा रहा है, जबकि खरीदारी बेहद सुस्त पड़ी हुई है। सोमवार को यह दबाव साफ दिखा – दिल्ली में राजस्थान का बेस्ट चना ₹50 टूटकर ₹5500 प्रति क्विंटल पर आ गया।

दूसरी मंडियों की स्थिति भी कमोबेश यही रही। विदिशा में ₹5500, इंदौर में ₹5425, हरदा में ₹5100, अकोला में ₹50 की गिरावट के साथ ₹5500, खमगांव में ₹5150 और अलवर में ₹20 कमजोर होकर ₹5310 पर कारोबार हुआ। चना दाल के सेगमेंट में भी कमजोरी का साया बना रहा – जयपुर में चना दाल ₹75 गिरकर ₹6125 प्रति क्विंटल पर दर्ज की गई।

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घरेलू बाजार में यह सुस्ती कोई अचानक नहीं आई। दाल मिलें सीमित ही खरीद कर रही हैं, क्योंकि खुदरा बाजार में चना दाल और बेसन की मांग कमजोर बनी हुई है। मार्जिन पहले से ही दबाव में हैं, ऊपर से आयातित माल की भरमार ने बिकवाली को और तेज कर दिया है। इस रबी सीजन चने की बुवाई में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है, जो आगे चलकर घरेलू आपूर्ति को और मजबूत करेगी – यानी भविष्य में भी कीमतों पर ऊपरी दबाव बना रह सकता है।

आयातित चने की बात करें तो बंदरगाहों पर तस्वीर थोड़ी मिली-जुली है। मुंबई में तंजानिया चना ₹25 गिरकर ₹5150, जबकि ऑस्ट्रेलियाई चना ₹100 तेज होकर ₹5400 पर पहुंच गया। कांडला पर ऑस्ट्रेलियाई चना ₹5250, सूडान चना ₹6000 और तंजानिया ₹5125 दर्ज किया गया। डॉलर इंडिकेशन में ऑस्ट्रेलिया $510 और तंजानिया $560 पर स्थिर रहे। कुल मिलाकर बंदरगाहों पर स्टॉक भरपूर है, आयात सुचारू रूप से चल रहा है, और सस्ती पीली मटर (येलो पीज) की अच्छी उपलब्धता ने चने की मांग को और सीमित कर दिया है।

भाइयो, सच्चाई यह है कि जब तक सरकार की तरफ से कोई हस्तक्षेप नहीं आता – जैसे आयात पर प्रतिबंध या स्टॉक लिमिट – तब तक कमजोर मांग और भरपूर आपूर्ति के इस माहौल में चना बाजार का रुख स्थिर से हल्का कमजोर ही रहने की संभावना है। निकट अवधि में बड़ी तेजी की उम्मीद कम ही है।

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किसान साथियो और व्यापारी भाइयो, ऐसे समय में धैर्य और समझदारी सबसे बड़ा हथियार है। जो स्टॉक पकड़ रखा है, उसे जरूरत पड़ने पर ही बेचें, और नई खरीद में बहुत सावधानी बरतें। बाजार नीचे जा रहा है तो घबराएं नहीं, लेकिन जोखिम भी कम न आंकें। लंबे समय में भारत का अपना उत्पादन बढ़ेगा, आयात पर निर्भरता घटेगी – तब फिर चने के दिन बहुरेंगे।

व्यापार हमेशा अपने विवेक, अपनी पूंजी और पूरी जानकारी के साथ करें। कोई जल्दबाजी न करें, बाजार का इंतजार करने वाले ही अंत में मजबूत रहते हैं।

जय किसान! जय भारत!

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