क्या सोयाबीन की कीमते 5000 तक पहुंच सकती है जाने रिपोर्ट में

क्या सोयाबीन की कीमते 5000 तक पहुंच सकती है जाने रिपोर्ट में
क्या सोयाबीन की कीमते 5000 तक पहुंच सकती है जाने रिपोर्ट में

क्या सोयाबीन की कीमते 5000 तक पहुंच सकती है जाने रिपोर्ट में

क्या सोयाबीन की कीमते 5000 तक पहुंच सकती है जाने रिपोर्ट में : आज 17 दिसंबर 2025 है और मैं आप सभी को सोयाबीन के बाजार की ताजा स्थिति के बारे में बताने जा रहा हूं। पिछले कुछ समय से सोयाबीन की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही थी, जिससे कई किसान भाई चिंतित थे। लेकिन अब अच्छी खबर यह है कि बाजार में फिर से तेजी आनी शुरू हो गई है। कीमतें बढ़ रही हैं और आगे भी बेहतर होने के संकेत मिल रहे हैं। मैं आपको सरल भाषा में सब कुछ समझाऊंगा, ताकि हर किसान भाई आसानी से समझ सके और सही निर्णय ले सके।

सबसे पहले समझते हैं कि इस तेजी के पीछे मुख्य कारण क्या हैं। पहला बड़ा कारण अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता का खत्म होना है। पहले खबरें थीं कि भारत अमेरिका से GM (जेनेटिकली मोडिफाइड) सोयाबीन का आयात कर सकता है, जिससे हमारे देश के किसानों को नुकसान होने का डर था। लेकिन अब साफ हो गया है कि भारत GM सोयाबीन का आयात नहीं करेगा। इससे बाजार में जो गिरावट और अनिश्चितता का माहौल था, वह थम गया है। किसान भाइयों को राहत मिली है क्योंकि हमारी अपनी फसल की कीमतों पर बाहर से सस्ता माल आने का खतरा कम हो गया।

दूसरा महत्वपूर्ण कारण सोया डीओसी (डी-ऑइल्ड केक) की मांग में बढ़ोतरी है। सोया डीओसी पशु चारे के रूप में बहुत इस्तेमाल होता है, खासकर मुर्गी पालन और डेयरी उद्योग में। जैसे-जैसे पोल्ट्री और दूध का उत्पादन बढ़ रहा है, सोया डीओसी की डिमांड भी तेजी से बढ़ रही है। इससे सोयाबीन की प्रोसेसिंग ज्यादा हो रही है और कीमतों को मजबूती मिल रही है।

अब कल की एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट की बात करें। कल एक खबर आई कि SEBI (सेबी) का एक पैनल अगले साल की शुरुआत में केंद्र सरकार से सात कृषि कमोडिटीज पर लगे वायदा कारोबार (फ्यूचर्स ट्रेडिंग) की रोक हटाने की सिफारिश करने वाला है। यह रोक 2021 से लगी हुई है और इसकी अवधि 31 जनवरी 2026 तक है। इन सात कमोडिटीज में सोयाबीन भी शामिल है। अभी तक सरकार के पास इस पर कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं था, लेकिन सेबी पैनल की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई हो सकती है। अगर सरकार इस बैन को हटा देती है, तो बाजार में और ज्यादा तेजी आएगी। क्योंकि वायदा कारोबार से कीमतों की सही जानकारी मिलती है, व्यापारी और किसान दोनों को फायदा होता है, और बाजार ज्यादा स्थिर रहता है। इस खबर के आने के बाद कल शाम को ही बाजार 25 से 50 रुपये तक तेज हो गया।

बाजार की वर्तमान स्थिति देखें तो महाराष्ट्र के कीर्ति प्लांट पर सोयाबीन का भाव दो दिनों में 60 रुपये बढ़कर 4820 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है। यह 4900 के स्तर की ओर बढ़ रहा है। अन्य मंडियों में भी यही ट्रेंड दिख रहा है। आवक की बात करें तो पहले ज्यादा आवक से दबाव था, लेकिन अब आवक धीरे-धीरे घट रही है। नई फसल कम आ रही है और स्टॉक भी खत्म हो रहा है, जिससे कीमतों को और सहारा मिल रहा है।

किसान भाइयों, हमारा मानना है कि जनवरी महीने में सोयाबीन की कीमतें फिर से 5000 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर को छू सकती हैं। सर्दी में पशु चारे की डिमांड और बढ़ेगी, साथ ही अगर वायदा कारोबार की रोक हटी तो बाजार में नई तेजी आएगी। लेकिन याद रखें, बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा रहता है। मौसम, अंतरराष्ट्रीय कीमतें और सरकार की नीतियां सब प्रभाव डालती हैं।

मेरी सलाह है कि अपनी फसल बेचने से पहले मंडी के ताजा भाव अच्छी तरह चेक करें। अगर संभव हो तो सोयाबीन को साफ-सुथरा और अच्छी तरह सुखाकर बेचें, ताकि बेहतर दाम मिलें। प्लांटों में सीधे बेचने का विकल्प भी देखें, क्योंकि वहां कभी-कभी मंडी से ज्यादा भाव मिल जाता है। स्टॉक रखने की क्षमता हो तो थोड़ा इंतजार करें, लेकिन जोखिम अपने विवेक से लें। व्यापार हमेशा अपने जोखिम पर करें और ज्यादा जानकारी के लिए लोकल व्यापारियों या कृषि विशेषज्ञों से बात करें।

उम्मीद है यह जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी। सोयाबीन की अच्छी कीमतें मिलें और आपकी फसल बंपर बिके, यही दुआ है। कोई सवाल हो तो कमेंट में पूछें। अगली अपडेट में फिर मिलेंगे।

जय जवान, जय किसान!

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