
बांग्लादेश की चावल निविदा: भारतीय चावल फिर सबसे सस्ता, निर्यातकों के लिए अच्छी खबर
बांग्लादेश की चावल निविदा : साथियों, मैं लंबे समय से चावल बाजार और निर्यात की दुनिया को करीब से देखता हूं, और हाल की यह खबर सुनकर सच में भारतीय निर्यातकों के लिए राहत की सांस महसूस हो रही है। बांग्लादेश की सरकारी एजेंसी द्वारा 50,000 मीट्रिक टन चावल खरीदने के लिए जारी की गई ताज़ा अंतरराष्ट्रीय निविदा में भारतीय चावल सबसे सस्ती कीमत पर सामने आया है। सबसे कम बोली 355.77 अमेरिकी डॉलर प्रति टन दर्ज की गई है, और यह कीमत भारत से आपूर्ति होने वाले गैर-बासमती उबले चावल के लिए मानी जा रही है। मेरे अनुभव से, ऐसी निविदाओं में भारतीय चावल की मजबूत स्थिति हमेशा से रही है, क्योंकि हमारी उत्पादन क्षमता, क्वालिटी और फ्रेट एडवांटेज दूसरों से बेहतर है। यह निविदा सोमवार को बंद हुई, लेकिन अभी तक किसी भी बोली को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। आने वाले दिनों में फैसला आने की उम्मीद है।
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इस निविदा में शर्तें काफी सख्त रखी गई थीं, जिसमें जहाज से माल उतारने की लागत भी विक्रेता द्वारा वहन की जाती है – यानी CIF लाइनर आउट टर्म्स। फिर भी, भारतीय कंपनियां आगे निकल आईं। सबसे कम बोली भारत की पट्टाभी एग्रो फूड्स नामक कंपनी ने $355.77 प्रति टन लगाई है। मैंने इस कंपनी के बारे में सुना है – वे आंध्र प्रदेश से बड़े निर्यातक हैं और गैर-बासमती चावल में मजबूत पकड़ रखते हैं। इसके अलावा, मोंडल स्टोन ने भारतीय मूल के चावल के लिए 359.00 डॉलर प्रति टन, बगड़िया ब्रदर्स ने भारतीय या वैकल्पिक मूल के चावल के लिए 357.77 डॉलर प्रति टन और इंट्रा बिजनेस ने भारतीय चावल के लिए लगभग 366 डॉलर प्रति टन का मूल्य प्रस्ताव रखा है। ज्यादातर बोलियां भारतीय मूल की ही हैं, जो दिखाता है कि वैश्विक बाजार में हमारी प्रतिस्पर्धात्मकता कितनी मजबूत है।
यह निविदा बांग्लादेश द्वारा अंतरराष्ट्रीय बाजार से बड़े पैमाने पर चावल खरीदने की जारी रणनीति का हिस्सा है। मैंने पिछले कुछ सालों में देखा है कि बांग्लादेश ने घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कई बार ऐसी निविदाएं निकाली गई हैं। अच्छी घरेलू फसल होने के बावजूद बांग्लादेश में पिछले एक वर्ष के दौरान चावल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर दबाव बढ़ा है। महंगाई, बाढ़ के नुकसान और सप्लाई चेन की समस्याओं ने वहां की स्थिति को जटिल बना दिया है। इसी वजह से वे लगातार इंपोर्ट पर निर्भर हो रहे हैं। इसी कड़ी में बांग्लादेश ने 50,000 टन चावल के लिए एक और अलग निविदा भी जारी की है, जिसके लिए मूल्य प्रस्ताव 22 दिसंबर तक जमा किए जाएंगे। इससे साफ है कि आने वाले महीनों में भारतीय निर्यातकों को और ऑर्डर मिलने की संभावना है।
मौजूदा निविदा में दी गई सभी बोलियां 29 दिसंबर तक वैध रहेंगी और अंतिम निर्णय आने वाले दिनों में लिए जाने की उम्मीद है। मैंने बाजार के जानकारों से बात की है, और उनका मानना है कि ज्यादातर कॉन्ट्रैक्ट भारतीय कंपनियों को ही मिलेंगे। मौजूदा वैश्विक बाजार में भारतीय चावल कीमत के लिहाज से मजबूत स्थिति में बना हुआ है। थाईलैंड और वियतनाम जैसे प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में हमारा चावल सस्ता और क्वालिटी में बराबर है। भारत में रिकॉर्ड उत्पादन, अच्छी स्टॉक पोजीशन और रुपए की स्थिति ने हमें एडवांटेज दिया है।
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इस पूरी स्थिति को समझने के लिए थोड़ा पीछे देखें। बांग्लादेश दुनिया का तीसरा बड़ा चावल उत्पादक देश है, लेकिन मौसम की मार और आंतरिक समस्याओं की वजह से वे इंपोर्ट पर निर्भर रहते हैं। भारत उनका पड़ोसी होने की वजह से सबसे बड़ा सप्लायर है – लॉजिस्टिक्स आसान, फ्रेट कम और डिलीवरी तेज। पिछले सालों में हमने लाखों टन चावल वहां निर्यात किया है। इस बार भी यही ट्रेंड जारी है। पट्टाभी एग्रो फूड्स जैसी कंपनियां पहले भी कई निविदाओं में सफल रही हैं। बगड़िया ब्रदर्स और अन्य भी मजबूत दावेदार हैं। मेरे जैसे कई व्यापारी मानते हैं कि यह निर्यात न केवल कंपनियों को फायदा देगा, बल्कि भारतीय किसानों की आय भी बढ़ाएगा, क्योंकि घरेलू मंडियों में भाव मजबूत होंगे।
कुल मिलाकर, यह खबर भारतीय चावल इंडस्ट्री के लिए पॉजिटिव है। वैश्विक बाजार में हमारी पोजीशन और मजबूत हो रही है। लेकिन याद रखें, निविदाएं अनिश्चित होती हैं – अंतिम फैसला तक इंतजार करना पड़ता है। अगर यह डील फाइनल होती है, तो आने वाली दूसरी निविदा में और बेहतर मौके मिल सकते हैं। निर्यातक सतर्क रहें और क्वालिटी पर फोकस रखें। बाजार की यह हलचल देखकर लगता है कि 2025-26 सीजन भारतीय चावल के लिए शानदार रहने वाला है।