अरहर /तुवर दाल की तेजी मंदी रिपोर्ट – 28 जनवरी 2026

अरहर /तुवर दाल की तेजी मंदी रिपोर्ट – 28 जनवरी 2026

अरहर दाल के बाजार में इन दिनों लगातार तेजी का दौर चल रहा है। साथियों, पिछले कुछ दिनों से घरेलू बाजार में अरहर की कीमतें लगातार मजबूत हो रही हैं। इसका मुख्य कारण आयातित अरहर का महंगा होना और स्टॉकिस्टों की तरफ से सक्रिय खरीदारी है। मंगलवार को भी घरेलू और आयातित दोनों तरह की अरहर में अच्छी तेजी देखने को मिली, जहां कीमतें 350 से 450 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गईं।

ये तेजी सिर्फ घरेलू स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से भी प्रभावित है। खासकर बर्मा (म्यांमार) में अरहर की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिसका सीधा असर हमारे यहां पड़ रहा है। बर्मा से आने वाली लेमन अरहर के डॉलर भाव बढ़ने से चेन्नई पोर्ट पर आयातित माल महंगा हो गया। शाम के कारोबार में चेन्नई में लेमन अरहर 7,800 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई, जबकि दिल्ली में ये 8,100 रुपये और मुंबई में 7,800 रुपये के स्तर पर ट्रेड हो रही है। ये स्तर पिछले कुछ हफ्तों के मुकाबले काफी ऊंचे हैं और बाजार में सप्लाई टाइट होने का संकेत दे रहे हैं।

उत्पादक मंडियों की बात करें तो देसी अरहर की आवक उम्मीद से काफी कम बनी हुई है। किसान अभी भी अपने स्टॉक को होल्ड कर रहे हैं या फिर कम मात्रा में बेच रहे हैं, जिससे सप्लाई साइड पर दबाव बना हुआ है। सोलापुर मंडी में कल देसी अरहर के भाव अच्छे से बढ़े, जबकि अन्य ज्यादातर मंडियों में भाव स्थिर से लेकर मजबूत बने रहे। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक की प्रमुख उत्पादक मंडियां इस समय कम आवक से जूझ रही हैं। इससे दाल मिलों को कच्चा माल जुटाने में परेशानी हो रही है और वे अपनी खरीद में तेजी ला रही हैं।

खपत का सीजन चल रहा है, ऐसे में दाल मिलों ने अपनी खरीदारी बढ़ा दी है। घरेलू बाजार में डिमांड मजबूत है, क्योंकि अरहर हर भारतीय घर की थाली का अहम हिस्सा है। दाल-चावल, सांभर, रस्म जैसे व्यंजनों में अरहर का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है। ऐसे में जब सप्लाई कम हो और डिमांड बढ़े, तो कीमतों में तेजी आना लाजमी है। केंद्र सरकार ने अरहर का एमएसपी 8,000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है, लेकिन कर्नाटक में एमएसपी पर खरीद अभी भी सीमित मात्रा में ही हो पा रही है। ज्यादा किसान खुले बाजार में बेहतर भाव मिलने की वजह से बेच रहे हैं।

आयातित अरहर की स्थिति भी मजबूत बनी हुई है। मुंबई बाजार में सूडान से आयातित अरहर 350 रुपये की तेजी के साथ 7,000 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई। गजरी अरहर 300 रुपये बढ़कर 6,550 रुपये, मतवारा 6,450 रुपये और सफेद अरहर 6,750 रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रही है। आयातित माल की ये कीमतें घरेलू दालों को सहारा दे रही हैं, क्योंकि मिलर्स को सस्ता आयातित माल मिलने की उम्मीद कम हो गई है।

मंडियों में तुवर (अरहर) का स्टॉक ज्यादा नहीं बचा है। कटनी और हाथरस लाइन की दाल एक बार फिर ऊंचे भाव पर बिक रही है। मध्य प्रदेश से बटरी, खेसारी दाल और मटर की खेप बिहार, बंगाल, असम और ओडिशा की मंडियों में जा रही है। वहां तुवर दाल में मिक्सिंग की वजह से चालानी मांग बढ़ गई है। इससे दाल मिलों की पकड़ कुछ कमजोर हुई है और बाजार में तेजी का माहौल बना हुआ है। फिलहाल लेमन तुवर का औसत भाव 7,950 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रहा है।

मंडी मार्केट के जानकारों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर सप्लाई इसी तरह कमजोर बनी रही, तो आने वाले दिनों में अरहर की कीमतों में 100 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की और बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन एक बात ध्यान रखनी होगी कि अचानक तेज उछाल आने पर मुनाफा वसूली भी शुरू हो सकती है। स्टॉकिस्ट और ट्रेडर्स ज्यादा मुनाफा बुक करने के लिए बेचना शुरू कर सकते हैं, जिससे बीच-बीच में थोड़ा-बहुत करेक्शन (मतलब गिरावट) भी देखने को मिल सकता है। बाजार में ऐसे उतार-चढ़ाव आम हैं, खासकर जब कीमतें तेजी से बढ़ रही हों।

कुल मिलाकर, अरहर का बाजार अभी बुलिश मोड में है। आयात महंगा होना, घरेलू आवक कम होना, मिलों की सक्रिय खरीद और अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर—ये सब मिलकर कीमतों को ऊपर धकेल रहे हैं। किसानों के लिए ये अच्छा समय है, क्योंकि बेहतर भाव मिल रहे हैं। लेकिन उपभोक्ताओं के लिए महंगाई का बोझ बढ़ रहा है। आने वाले हफ्तों में मौसम, आयात की स्थिति और सरकार की नीतियां बाजार को और प्रभावित करेंगी। फिलहाल ट्रेडर्स को सतर्क रहना होगा—तेजी का फायदा उठाएं, लेकिन अचानक गिरावट से बचने के लिए तैयार भी रहें।

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