
अरहर /तुवर दाल की तेजी मंदी रिपोर्ट – 03 जनवरी 2026 : शुक्रवार की शाम मंडी से लौटते वक्त मन में एक अलग ही खुशी थी। अरहर का बाजार जिस तरह से संभला और ऊपर उठा, उसे देखकर लगा कि इस बार त्योहारों का सीजन सचमुच रंग लाएगा। पूरे दिन बाजार में जो हलचल रही, वो बताती है कि अरहर अभी आसानी से नीचे नहीं आने वाली। मैं पिछले कई सालों से इस बाजार को देख रहा हूं – कभी आयात सस्ता हो जाए तो दबाव आता है, कभी फसल अच्छी हो जाए तो भाव ढीले पड़ जाते हैं – लेकिन इस बार परिस्थितियां थोड़ी अलग हैं।
शुक्रवार को घरेलू अरहर में करीब 75 रुपए प्रति क्विंटल की अच्छी तेजी दर्ज की गई। इसका सबसे बड़ा कारण रहा आयात का महंगा पड़ना और दाल मिलों की जोरदार खरीदारी। डॉलर जिस तरह से मजबूत हुआ है, उसने आयातकों की कमर तोड़ दी है। चेन्नई में जनवरी शिपमेंट की लेमन अरहर के आयात भाव 10 डॉलर बढ़कर 765 डॉलर प्रति टन CAF हो गए। इसका मतलब है कि आयातित माल अब पहले से काफी महंगा पड़ेगा। नतीजा ये हुआ कि आयातकों की बिकवाली लगभग रुक सी गई और घरेलू बाजार को खुलकर सांस लेने का मौका मिला।
शाम तक चेन्नई में लेमन अरहर के भाव 75 रुपए उछलकर 6,825 प्रति क्विंटल पर पहुंच गए। दिल्ली में ये 7,225 और मुंबई में भी 6,825 के आसपास बंद हुए। देसी अरहर की मंडियों में भी यही रुझान दिखा – इंदौर, सोलापुर और अकोला में भाव मजबूती के साथ बंद हुए। आयातित किस्मों में सूडान की अरहर 5,900, गजरी 5,500, मतवारा 5,450 और सफेद अरहर 5,600 प्रति क्विंटल पर बोली जा रही थी। कुल मिलाकर हर किस्म में सुधार दिखा।
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मुझे याद है, कुछ दिन पहले ही लेमन अरहर में थोड़ी करेक्शन आई थी और कई साथी चिंता कर रहे थे कि कहीं बाजार फिर नीचे न चला जाए। लेकिन अब लग रहा है कि वो करेक्शन बस एक सांस लेने की मोहलत थी। चालू सप्ताह में ही अरहर के भाव करीब 200 रुपए प्रति क्विंटल तक चढ़ चुके हैं। ये तेजी अचानक नहीं आई – इसके पीछे ठोस कारण हैं।
सबसे पहले तो खपत का पीक सीजन चल रहा है। पोंगल, मकर संक्रांति और अन्य त्योहार नजदीक आ रहे हैं, खासकर दक्षिण भारत में अरहर दाल की मांग हमेशा जोरदार रहती है। दाल मिलें जानती हैं कि स्टॉक कम है, इसलिए वे अभी से सक्रिय खरीद कर रही हैं। दूसरा बड़ा फैक्टर है फसल का नुकसान। इस बार अधिक बरसात और अक्टूबर में आई बेमौसमी बारिश ने कई क्षेत्रों में तुवर की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया। उत्पादन पिछले साल से कम रहने के अनुमान हैं और ये बात बाजार को लगातार सपोर्ट दे रही है।
सरकारी स्तर पर भी कुछ सकारात्मक खबरें हैं। केंद्र सरकार ने अरहर का MSP 8,000 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है और कर्नाटक की मंडियों में MSP पर खरीद शुरू हो चुकी है। फिलहाल ये खरीद सीमित मात्रा में हो रही है, लेकिन आगे चलकर अगर ये बढ़ी तो बाजार को मजबूत नीचे का सपोर्ट मिलेगा। किसान भी अब अपना माल जल्दबाजी में नहीं बेच रहे, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि MSP के आसपास या उससे ऊपर भाव मिल सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो रंगून में अभी माल उपलब्ध है, लेकिन वहां के निर्यातक भी भाव बढ़ाकर बोलने लगे हैं। इसका मतलब है कि बाहर से भी कोई बड़ा दबाव आने की संभावना कम है। कुल मिलाकर ग्लोबल संकेत भी घरेलू बाजार के पक्ष में हैं।
अब आगे की सोचें तो मेरी नजर में लेमन अरहर में हालिया करेक्शन के बाद फिर से 100-150 रुपए तक की तेजी की गुंजाइश बन रही है। त्योहारों की मांग और आयात का महंगा होना – ये दोनों फैक्टर मिलकर बाजार को ऊपर ले जा सकते हैं। दक्षिण भारत में तो मांग और भी जोरदार रहने वाली है। लंबे समय में देखें तो घरेलू उत्पादन कम रहने और आयात पर निर्भरता के चलते अरहर बाजार में सुधार का रुझान बना रह सकता है।
लेकिन साथियों, बाजार हमेशा अप्रत्याशित होता है। अगर अचानक कोई बड़ी आयात खेप सस्ते में आ गई या मिलों की खरीद थोड़ी धीमी पड़ी, तो थोड़ी नरमी भी आ सकती है। इसलिए मैं हमेशा यही कहता हूं कि बड़ा दांव लगाने से पहले अच्छे से सोच-विचार लें। जो साथी शॉर्ट टर्म में ट्रेड कर रहे हैं, वे छोटे-छोटे उछाल पर मुनाफा बुक करते चलें। लंबे होल्ड की सोच वाले साथी धैर्य रखें, क्योंकि फंडामेंटल्स अभी भी पॉजिटिव हैं।
मैं तो बस इतना कहूंगा कि बाजार अपना रास्ता खुद चुनता है, हम सिर्फ उसकी भाषा समझकर साथ चल सकते हैं। त्योहारों का सीजन है, मांग अच्छी है, सप्लाई टाइट है – इन सबको देखते हुए सतर्क लेकिन सकारात्मक रहें।
व्यापार अपने विवेक और जोखिम सहन करने की क्षमता के अनुसार करें। आने वाला सप्ताह फिर नई कहानी लिखेगा, तब तक सुरक्षित रहें और खुश रहें।