अरहर/तूवर दाल की तेजी-मंदी अपडेट (8जनवरी 2026) 🚨 क्लिक करके चौंक जाओ!

दोस्तों,मैं लंबे समय से अरहर (तुअर) के बाजार पर नजर रखता हूं, और पिछले कुछ दिनों से इसमें अच्छी तेजी चल रही थी। लेकिन मंगलवार को थोड़ा ब्रेक लगा – पूरे दिन की तेजी के बाद 75 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई। वजह साफ है: घरेलू कीमतें बढ़ने से दाल मिलों की खरीदारी थोड़ी कमजोर पड़ गई। मिल वाले अब सोच-समझकर माल ले रहे हैं, क्योंकि भाव ऊपर चले गए हैं।
शाम तक के भाव देखें तो चेन्नई में आयातित अरहर नींबू 7,000 रुपये, दिल्ली में 7,300 रुपये और मुंबई में 7,000 रुपये प्रति क्विंटल पर टिके रहे। घरेलू अरहर की बात करें तो कानपुर और नागपुर जैसे बाजारों में मांग बढ़ रही है, जो अच्छा संकेत है। लेकिन लातूर और इंदौर में कीमतें थोड़ी कमजोर बताई जा रही हैं, जबकि बाकी ज्यादातर मंडियों में भाव स्थिर रहे। मुंबई में अफ्रीकी देशों से आने वाली आयातित अरहर की पोजीशन स्थिर से मजबूत बनी हुई है। सूडान वाली 6,150 रुपये, गजरी 5,700 रुपये, मतवारा 5,600 रुपये और सफेद अरहर 5,750 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर टिकी हुई है।
मुझे लगता है कि बाजार में बिक्री का ज्यादा दबाव नहीं है, क्योंकि स्टॉकिस्ट भाई लोग लगातार सक्रिय हैं और आयात भी महंगा पड़ रहा है। नतीजा ये कि कीमतें ज्यादा नीचे नहीं गिर रही हैं। कर्नाटक की मंडियों में सरकारी खरीद 8,000 रुपये प्रति क्विंटल के सपोर्ट प्राइस पर चल रही है, लेकिन कुल आवक की तुलना में अभी सरकारी खरीद की मात्रा कम ही है। आने वाले दिनों में घरेलू अरहर की आवक बढ़ने वाली है, और आयातित माल भी बाजार में पहुंचना शुरू हो जाएगा।
इस साल खरीफ में तुअर की बुवाई तो ज्यादा हुई थी, लेकिन अक्टूबर में हुई भारी बारिश से फसल को नुकसान की खबरें भी आ रही हैं। इसका असर आगे उत्पादन पर पड़ेगा। चेन्नई में हाल ही में सस्ते दामों पर बिक्री हुई थी, लेकिन पिछले तीन-चार दिनों में नींबू तुअर के भाव में करीब 400 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। पिछले हफ्ते ये 7,000 रुपये से नीचे था, अब 7,400 रुपये तक पहुंच गया है। महाराष्ट्र से पुराना और नया दोनों तरह का माल बाजार में आ रहा है – सोलापुर, गुलबर्गा और काली कोठी रूट से छिटपुट आवक शुरू हो गई है।
एक पॉजिटिव बात ये है कि कम कीमतों पर दालों की शिपमेंट की मांग बढ़ने लगी है, यानी निर्यात में थोड़ा सुधार दिख रहा है। इससे बाजार को अच्छा सपोर्ट मिल रहा है। स्टॉकिस्टों की होल्डिंग और महंगे आयात की वजह से सप्लाई पर कंट्रोल बना हुआ है।
मंडी मार्केट मीडिया का मानना है कि मौजूदा स्तरों से अरहर के भाव में करीब 200 रुपये प्रति क्विंटल की और मजबूती आ सकती है। हां, इस दौरान बीच-बीच में कुछ गिरावट भी आएगी, क्योंकि मुनाफावसूली तो चलती रहती है। इसलिए मेरी सलाह यही है कि हर उछाल पर थोड़ा-थोड़ा मुनाफा बुक करते रहें। किसान भाइयों, अगर आपके पास स्टॉक है तो पूरा माल एकदम न बेचें, क्योंकि आगे और तेजी के संकेत हैं। लेकिन जरूरत हो तो अच्छे भाव पर बिक्री कर लें। व्यापारियों को भी सावधानी बरतनी चाहिए – ज्यादा बड़ी पोजीशन बनाने से पहले बाजार की नब्ज टटोलें।
कुल मिलाकर अरहर का बाजार अभी भी पॉजिटिव ट्रेंड में है। गिरावट आई है, लेकिन वो मामूली है और जल्दी रिकवर होने की उम्मीद है। घरेलू मांग, निर्यात की संभावना और सीमित सप्लाई – ये सारे फैक्टर सपोर्टिव हैं। बस धैर्य रखें और स्मार्टली ट्रेड करें।
अगर कोई सवाल हो तो कमेंट करें, मैं जवाब दूंगा। व्यापार हमेशा अपने विवेक से करें, कोई जल्दबाजी न करें।
जय जवान, जय किसान!