आंध्र प्रदेश की चावल खरीद: रफ्तार और रिकॉर्ड, किसानों के लिए बड़ी राहत

आंध्र प्रदेश की चावल खरीद रफ्तार और रिकॉर्ड, किसानों के लिए बड़ी राहत
आंध्र प्रदेश की चावल खरीद रफ्तार और रिकॉर्ड, किसानों के लिए बड़ी राहत

आंध्र प्रदेश की चावल खरीद रफ्तार और रिकॉर्ड, किसानों के लिए बड़ी राहत

साथियों, मैं पिछले कई सालों से चावल बाजार और सरकारी खरीद की प्रक्रिया को बहुत करीब से देखता आ रहा हूं, और इस बार आंध्र प्रदेश ने जो प्रदर्शन दिखाया है, वह सच में काबिले तारीफ है। आंध्र प्रदेश ने चावल की सरकारी आपूर्ति के मोर्चे पर काफी तेज़ी दिखाई है और सिर्फ 15 दिनों के भीतर एफसीआई को 1.7 लाख टन से अधिक चावल भेज दिया है। यह आंकड़ा सुनकर हैरानी होती है, लेकिन राज्य सरकार के अनुसार यह उपलब्धि अचानक नहीं बल्कि तेज़ खरीद, बेहतर मैनेजमेंट और मजबूत लॉजिस्टिक प्लानिंग का नतीजा है। मैंने खुद कई खरीद केंद्रों के बारे में जानकारी ली है, और वहां का माहौल बताता है कि इस बार सिस्टम कितना चुस्त चल रहा है।

खास बात यह है कि 10 दिसंबर को अकेले एक दिन में 1.4 लाख टन से ज्यादा धान की खरीद दर्ज की गई, जो इस सीजन के सबसे बड़े दैनिक आंकड़ों में गिनी जा रही है। इतनी बड़ी मात्रा में एक दिन में खरीद होना आसान नहीं होता, लेकिन आंध्र की टीम ने इसे संभव बना दिखाया। अब तक करीब 3.5 लाख किसानों से 20 लाख टन से अधिक धान की खरीद पूरी हो चुकी है, जिससे पता चलता है कि किसानों की भागीदारी भी मजबूत बनी हुई है। किसान भाई बताते हैं कि इस बार केंद्रों पर लाइन कम लग रही है, पेमेंट समय पर हो रहा है और धान की गुणवत्ता जांच भी पारदर्शी तरीके से हो रही है। यह भरोसा ही सबसे बड़ी ताकत है।

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खरीदे गए धान को तेजी से मिलों और फिर एफसीआई तक पहुंचाने के लिए 32 हजार से ज्यादा लॉरी, ट्रैक्टर और अन्य साधनों का इस्तेमाल किया गया है, साथ ही स्पेशल ट्रेनें भी चलाई गई हैं। मैंने सुना है कि कई जगहों पर रात-दिन ट्रकों की लाइन लगी रहती है, ताकि धान खरीद केंद्रों पर जमा न हो और स्टॉक तुरंत आगे शिफ्ट हो सके। सरकार का फोकस साफ तौर पर यही है कि कहीं भी स्टॉक पड़ा न रहे, क्योंकि देरी से नमी या कीट का खतरा बढ़ जाता है। एमएसपी पर पारदर्शी खरीद, मिल मालिकों की कड़ी निगरानी और लगातार मॉनिटरिंग को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि किसानों का भरोसा बना रहे। सिविल सप्लाई विभाग बढ़ती आवक को संभालने और कस्टम मिल्ड राइस को समय पर एफसीआई तक पहुंचाने के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट लगातार बढ़ा रहा है। यह सब देखकर लगता है कि इस बार कोई कोना नहीं छोड़ा गया है।

आने वाले 2025-26 खरीफ सीजन के लिए राज्य ने 51 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य रखा है, जो पिछले साल की 34 लाख टन की खरीद से काफी ज्यादा है। यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य है, लेकिन मौजूदा रफ्तार देखकर लगता है कि इसे हासिल करना मुश्किल नहीं होगा। सरकार का दावा है कि वित्तीय दबाव के बावजूद चावल मिल मालिकों को समय पर भुगतान किया जाएगा। यह वादा बहुत जरूरी है, क्योंकि मिलर्स ही खरीद प्रक्रिया की रीढ़ हैं – अगर उनका पेमेंट अटकता है, तो पूरी चेन प्रभावित होती है। साथ ही पीडीएस चावल की तस्करी रोकने पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। तस्करी रोकने के लिए सख्त चेकिंग और ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया है, ताकि सरकारी चावल काला बाजार में न जाए।

मैंने कई किसानों और मिल मालिकों से बात की है, और सबका कहना है कि इस बार राज्य सरकार ने पहले से बेहतर प्लानिंग की है। खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई, स्टोरेज की व्यवस्था मजबूत की गई और लॉजिस्टिक्स पर खास फोकस है। एफसीआई को इतनी जल्दी चावल सप्लाई करने से केंद्र सरकार की पीडीएस जरूरतें भी समय पर पूरी होंगी, और देशभर में चावल की उपलब्धता बनी रहेगी। आंध्र प्रदेश चावल उत्पादन में हमेशा आगे रहा है, और इस बार की यह तेजी राज्य की अर्थव्यवस्था को भी बूस्ट देगी। किसानों को एमएसपी मिल रहा है, मिलर्स को काम, ट्रांसपोर्टर्स को रोजगार – सबको फायदा।

कुल मिलाकर आंध्र प्रदेश में चावल की खरीद, सप्लाई और ट्रांसपोर्टेशन तीनों मोर्चों पर रफ्तार बनी हुई है। यह मॉडल दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण हो सकता है। उम्मीद है कि यह गति बनी रहे और सीजन के अंत तक लक्ष्य से ज्यादा खरीद हो जाए। किसान भाइयों, अपना धान बेचते समय सतर्क रहें और सरकारी केंद्रों का ही इस्तेमाल करें। आने वाला समय आंध्र के चावल सेक्टर के लिए और बेहतर होने वाला है।

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