उड़द दाल की तेजी मंदी रिपोर्ट – 18 दिसम्बर 2025

उड़द दाल की तेजी मंदी रिपोर्ट - 18 दिसम्बर 2025
उड़द दाल की तेजी मंदी रिपोर्ट – 18 दिसम्बर 2025

उड़द दाल की तेजी मंदी रिपोर्ट – 18 दिसम्बर 2025

नमस्कार मेरे प्यारे किसान भाइयों और बहनों, सर्दियों का मौसम शुरू हो चुका है और रसोई में उड़द की दाल की खुशबू फिर से घर करने लगी है। इडली, डोसा, पापड़ या सादा दाल-चावल – उड़द हर रूप में हमारी थाली का हिस्सा है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से उड़द बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। अब अच्छी खबर यह है कि गिरावट रुकती नजर आ रही है और भावों में स्थिरता के साथ हल्की मजबूती के संकेत मिलने लगे हैं। कई व्यापारी और मिल मालिक अब मौजूदा स्तरों पर खरीदारी शुरू करने की सोच रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो बर्मा से आने वाली उड़द पर थोड़ा दबाव दिखा। दिसंबर-जनवरी शिपमेंट के लिए एफएक्यू उड़द के भाव 5 डॉलर गिरकर 755 डॉलर प्रति टन सीएंडएफ हो गए, जबकि बेहतर क्वालिटी वाली एसक्यू उड़द 10 डॉलर कमजोर होकर 840 डॉलर प्रति टन पर आ गई। लेमन अरहर के भाव इस दौरान 735 डॉलर पर स्थिर बने रहे। घरेलू स्तर पर दाल मिलों की खरीदारी थोड़ी सुस्त रही, जिससे आयातित उड़द की कीमतों में नरमी आई, लेकिन देसी उड़द के दाम ज्यादातर जगहों पर टिके रहे।

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देश की प्रमुख मंडियों में देखें तो चेन्नई में आयातित एफएक्यू उड़द 25 रुपये गिरकर 7000 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई, जबकि एसक्यू 50 रुपये कमजोर होकर 7600 रुपये पर बोली गई। दिल्ली में एफएक्यू 25 रुपये नरम पड़कर 7325 रुपये और एसक्यू करीब 7950 रुपये प्रति क्विंटल रही। मुंबई में एफएक्यू के भाव 7025 रुपये पर स्थिर टिके रहे, तो कोलकाता में 7125 से 7150 रुपये के दायरे में कारोबार हुआ। दक्षिण भारत की बड़ी मंडियों में गुंटूर में पॉलिश उड़द 7350 रुपये और विजयवाड़ा में 7500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर रही।

बाजार के अंदर की हकीकत यह है कि रंगून पोर्ट से लोडिंग ज्यादा जोरदार नहीं चल रही। आयातकों को मौजूदा भावों पर लागत और बिक्री के बीच ज्यादा अंतर महसूस हो रहा है, इसलिए नीचे के स्तर पर बेचने की जल्दबाजी कम हो गई है। हाजिर बाजार में माल की उपलब्धता सीमित है – पहले से आए रैक का स्टॉक दाल मिलों को बिक चुका है। सट्टेबाजों के दबाव से जो गिरावट आई थी, अब वही सट्टा बाजार भावों को सहारा देने लगा है। खरीफ उड़द की आवक अभी भी मंडियों में आ रही है, लेकिन सर्दी का सीजन होने से खपत अच्छी चल रही है। खासकर दक्षिण भारत में इडली-डोसा की डिमांड ने बाजार को मजबूती दी है।

कुल मिलाकर अब उड़द में बड़ी गिरावट की संभावना बहुत कम लग रही है। बल्कि मौजूदा स्तरों से आगे 100 से 200 रुपये प्रति क्विंटल तक की हल्की-फुल्की तेजी बन सकती है। अगर आपके पास स्टॉक है तो घबराकर न बेचें, और अगर खरीदारी का प्लान है तो मौजूदा भावों पर धीरे-धीरे माल उठाना समझदारी हो सकती है।

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किसान भाइयों, उड़द हमारी छोटी लेकिन कीमती फसल है। इसकी मेहनत का फल सही समय पर मिले, यही कामना है। बाजार को ध्यान से देखें, अपनी जरूरत और जोखिम के हिसाब से फैसला लें।

सभी साथियों को ढेर सारी शुभकामनाएं। घर में उड़द की दाल की खुशबू बनी रहे और खुशहाली आए।

जय जवान, जय किसान!

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