उड़द दाल के भाव पर बड़ा अपडेट – 18 फरवरी 2026 की ताजा रिपोर्ट

साथियों, उड़द बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन मिलाजुला माहौल देखने को मिला। कहीं हल्की तेजी रही तो कहीं मंदी का असर दिखाई दिया। कुल मिलाकर बाजार न तो पूरी तरह मजबूत कहा जा सकता है और न ही कमजोर, बल्कि यह मांग और सप्लाई के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
पिछले कुछ दिनों में जब भाव थोड़ा नीचे आए, तो दाल मिलों की मांग फिर से निकलने लगी। मिलर्स ने जरूरत के हिसाब से खरीद बढ़ाई, जिससे बाजार में करीब ₹100 प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज हुई। लेकिन जैसे ही भाव ऊपर की ओर बढ़े, ऊंचे स्तर पर मिलर्स की खरीद धीमी पड़ गई और ₹50 तक की दबाव वाली बिकवाली भी देखने को मिली। यानी बाजार अभी सीमित दायरे में ही घूम रहा है।
मंडी भावों की बात करें तो चेन्नई में उड़द FAQ ₹7,900 पर ₹50 की तेजी के साथ बंद हुआ, जबकि SQ क्वालिटी ₹8,500 पर ₹50 कमजोर रही। दिल्ली में FAQ ₹8,200 पर ₹50 मजबूत रहा और SQ ₹8,925 पर ₹25 की कमजोरी दर्ज हुई। मुंबई में FAQ ₹8,050 पर स्थिर रहा, कोलकाता में ₹8,000 के आसपास हल्की गिरावट रही। विजयवाड़ा पॉलिश ₹8,800 पर स्थिर रहा और इंदौर देसी उड़द ₹8,500 के दायरे में कारोबार करता रहा। यानी अलग-अलग मंडियों में रुख अलग-अलग रहा, लेकिन बड़ी हलचल नहीं दिखी।
आयातित उड़द की बात करें तो चेन्नई में भाव स्थिर रहे। 17 फरवरी तक बर्मा मार्केट अवकाश के कारण बंद है, जिससे आयातकों को डिस्पैरिटी का सामना करना पड़ रहा है। जब आयात महंगा पड़ता है और बाजार में अनिश्चितता रहती है, तो आयातक भी आक्रामक बिकवाली नहीं करते। इसी वजह से आयातित माल में दबाव कम देखने को मिल रहा है।
सरकार की तरफ से भी एक अहम फैसला आया है। केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश से MSP पर 3,54,000 मीट्रिक टन उड़द की खरीद को मंजूरी दी है। इससे किसानों को सहारा मिलेगा और बाजार को भी एक तरह का सपोर्ट मिल सकता है। MSP खरीद की खबर से आमतौर पर बाजार में गिरावट सीमित हो जाती है, क्योंकि एक न्यूनतम भाव का भरोसा बन जाता है।
घरेलू स्तर पर दाल मिलें अभी जरूरत आधारित खरीद कर रही हैं। वे स्टॉक बढ़ाने की बजाय मांग के अनुसार ही खरीद कर रही हैं। यही वजह है कि फिलहाल बड़ी तेजी देखने को नहीं मिल रही। हालांकि हाल की करेक्शन के बाद बाजार में फिर से उछाल की गुंजाइश बनी हुई है। दक्षिण भारत में इस समय खपत का सीजन है, जिससे मांग को अच्छा सपोर्ट मिल रहा है।
सप्लाई साइड की बात करें तो तेलंगाना की आवक पहले से कम हो चुकी है। संभावना है कि इस साल फरवरी के अंत तक वहां की सप्लाई लगभग खत्म हो जाए, जबकि पिछले साल यह अप्रैल के पहले सप्ताह तक चली थी। इस बार तेलंगाना की फसल का साइज भी औसत से कमजोर बताया जा रहा है। इससे आगे चलकर सप्लाई टाइट हो सकती है।
अब बाजार की नजर कृष्णा जिले की नई आवक पर है। वहां से सप्लाई शुरू होने पर राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक के मिलर्स खरीद बढ़ा सकते हैं, क्योंकि इन राज्यों में ज्यादा स्टॉक नहीं बचा है। अगर नई आवक उम्मीद से कम रहती है, तो बाजार में तेजी का माहौल बन सकता है।
ऑल ओवर देखा जाए तो चेन्नई और दिल्ली में स्टॉक ज्यादा नहीं बताया जा रहा। ऐसे में हर करेक्शन के बाद रुक-रुक कर तेजी आने की संभावना बनी हुई है। हालांकि ऊंचे भावों पर बिकवाली भी शुरू हो जाती है, जिससे बाजार एकदम से भाग नहीं पा रहा। MSP खरीद की मंजूरी भी कीमतों को नीचे से सहारा दे रही है।
फिलहाल उड़द बाजार धीरे-धीरे आगे बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। बड़ी तेजी या बड़ी गिरावट की संभावना तुरंत नहीं दिख रही, लेकिन सप्लाई कम और मांग स्थिर रहने से आने वाले समय में रुक-रुक कर मजबूती देखने को मिल सकती है। ऐसे में व्यापार सोच-समझकर और अपने विवेक से ही करें।