अरहर/तुवर दाल में आगे क्या होगा? जानिए 18 फरवरी 2026 की पूरी रिपोर्ट

साथियों, अरहर बाजार इस समय एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ा है। न तो इसमें बहुत तेज़ी दिख रही है और न ही बड़ी गिरावट, बल्कि बाजार तेज़ी और करेक्शन के बीच संतुलन बनाकर चल रहा है। लगभग दो सप्ताह पहले बाजार में जोरदार रैली आई थी और भाव में करीब ₹2000 प्रति क्विंटल की छलांग लगी थी। उस समय लग रहा था कि बाजार लगातार ऊपर की तरफ जाएगा, लेकिन हर तेजी के बाद थोड़ा ठहराव आना स्वाभाविक है। यही हुआ — तेजी के बाद ₹800 से ₹1000 तक की करेक्शन आई और बाजार फिलहाल सीमित दायरे में आकर टिक गया।
अब स्थिति यह है कि नीचे दाम मिलने पर दाल मिलों की मांग फिर से निकलने लगी है। मिलर्स को जब माल थोड़ा सस्ता दिखता है तो वे खरीद में सक्रिय हो जाते हैं। इसी वजह से घरेलू बाजार में दोबारा हल्की मजबूती देखने को मिली है। इस सप्ताह करीब ₹250 प्रति क्विंटल की रिकवरी दर्ज की गई, जिससे बाजार में थोड़ा आत्मविश्वास लौटा है।
मंगलवार को अकोला बिल्टी तुअर का चालू बाजार भाव (CMP) ₹8,150 प्रति क्विंटल के आसपास रहा। अगर शॉर्ट टर्म यानी फरवरी-मार्च की बात करें तो बाजार का दायरा ₹7,800 से ₹8,500 के बीच माना जा रहा है। वहीं मीडियम से लॉन्ग टर्म यानी अप्रैल से जून तक ₹9,000 से ₹9,500 तक की संभावना जताई जा रही है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि बाजार ₹7,800 के सपोर्ट के नीचे बंद न हो। अगर यह स्तर टूटता है तो तस्वीर थोड़ी कमजोर हो सकती है।
मंडी भावों पर नजर डालें तो चेन्नई में नई लेमन अरहर ₹7,900 पर रही, जो ₹100 तेज रही। पुरानी लेमन ₹7,700 पर ₹50 की मजबूती के साथ दर्ज हुई। दिल्ली में लेमन अरहर ₹8,150 पर ₹50 की तेजी में रही। हालांकि मुंबई में लेमन ₹7,900 पर ₹100 कमजोर दर्ज की गई। यानी अलग-अलग मंडियों में रुख थोड़ा अलग-अलग दिखा, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में स्थिरता और हल्की मजबूती का माहौल है।
आयातित माल की बात करें तो सूडान अरहर ₹7,000 पर स्थिर रही। गजरी ₹6,550 पर ₹50 तेज, मतवारा भी ₹6,550 पर ₹50 मजबूत और सफेद अरहर ₹6,750 पर स्थिर दर्ज हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। गजरी अरहर $710-715 प्रति टन, सफेद $715-720 और सूडान $915 प्रति टन (मार्च/अप्रैल शिपमेंट) तक बोली गई। रंगून में भाव थोड़ा घटकर $880-885 प्रति टन तक आए, लेकिन वहां उपलब्धता सीमित बताई जा रही है। आयातकों को इस समय डिस्पैरिटी का सामना करना पड़ रहा है, यानी आयात महंगा पड़ रहा है। यही वजह है कि वे ऊंचे बोल लगाने को मजबूर हैं।
सरकार ने इस साल अरहर का MSP ₹8,000 प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन सरकारी खरीद बहुत ज्यादा सक्रिय नहीं है। उत्पादन की बात करें तो इस बार अनुमान करीब 37-38 लाख मीट्रिक टन का है, जो पिछले साल के 54-55 लाख टन से काफी कम है। उत्पादन घटने का मुख्य कारण कई राज्यों में बारिश से हुआ फसल नुकसान है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और नीमच-कटनी बेल्ट में बारिश ने फसल को प्रभावित किया है।
कर्नाटक में स्थिति यह है कि किसान अच्छी क्वालिटी का माल रोककर रख रहे हैं और औसत क्वालिटी का माल बेच रहे हैं। इससे बाजार में बढ़िया माल की उपलब्धता सीमित हो रही है। वहीं छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के मिलर्स विदर्भ क्षेत्र से खरीद कर रहे हैं, जिससे वहां मांग बनी हुई है।
अगर कुल मिलाकर तस्वीर देखें तो अभी अरहर बाजार में बड़ी तेजी की उम्मीद तुरंत नहीं दिख रही। लेकिन सप्लाई टाइट है और आयात महंगा है, इसलिए बड़ी गिरावट की संभावना भी कम नजर आ रही है। बाजार धीरे-धीरे करके रिकवरी की तरफ बढ़ता दिख रहा है। फिलहाल यह कहा जा सकता है कि बाजार एक मजबूत आधार बनाने की कोशिश कर रहा है।
ऐसे समय में व्यापारियों और किसानों को जल्दबाजी से बचना चाहिए। नीचे के स्तर पर घबराकर माल निकालना और ऊपर के स्तर पर लालच में ज्यादा खरीद करना दोनों ही जोखिम भरे हो सकते हैं। बाजार को समझकर, सपोर्ट और रेजिस्टेंस के स्तर ध्यान में रखकर ही फैसला लेना बेहतर रहेगा। अंत में यही कहेंगे कि व्यापार हमेशा अपने विवेक और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर करें।