उड़द दाल की तेजी मंदी रिपोर्ट – 28 जनवरी 2026

उड़द दाल की तेजी मंदी रिपोर्ट – 28 जनवरी 2026

उड़द दाल की तेजी मंदी रिपोर्ट - 28 जनवरी 2026
उड़द दाल की तेजी मंदी रिपोर्ट – 28 जनवरी 2026

साथियों, उड़द के बाजार में ये दिन तेजी के हैं। हर तरफ से आंकड़े यही बता रहे हैं कि उड़द की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और अभी ये रुख बना रहेगा। मंगलवार को बर्मा (म्यांमार) में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उड़द के दाम 30 से 35 डॉलर प्रति टन तक बढ़ गए। इसका सीधा असर हमारे घरेलू बाजार पर पड़ा। यहां कीमतें 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल तक ऊपर चढ़ गईं। शाम के समय चेन्नई में उड़द FAQ का भाव 7,775 रुपये और SQ का 8,500 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। दिल्ली में FAQ 8,100 रुपये और SQ 8,900 रुपये, मुंबई में FAQ उड़द 7,875 रुपये, कोलकाता में 8,000 रुपये पर ट्रेड हुई। दक्षिण भारत की मंडियों में भी अच्छी तेजी दिखी—गुंटूर में पॉलिश उड़द 8,400 रुपये और विजयवाड़ा में 8,650 रुपये प्रति क्विंटल हो गई, दोनों जगह 200 रुपये की बढ़ोतरी हुई।

ये बढ़ोतरी सिर्फ घरेलू बाजार तक नहीं रुकी। चेन्नई पोर्ट पर आयातित उड़द के भाव भी काफी ऊंचे हैं। जनवरी-फरवरी के शिपमेंट के लिए FAQ उड़द 850 डॉलर प्रति टन CAF तक जा रही है, जबकि SQ उड़द 925 डॉलर प्रति टन CAEF पर बोली लग रही है। डॉलर मजबूत होने से आयात करने वाले लोग ज्यादा बिकवाली नहीं कर पा रहे। जो कंटेनर चेन्नई पहुंच रहे हैं, वे ज्यादातर सीधे मिलों में चले जा रहे हैं। स्टॉक ज्यादा देर बाजार में नहीं टिक पा रहा। अब मोटे माल से ज्यादा छोटे (फाइन) माल की मांग है, इसलिए FAQ और SQ के बीच का भाव का फर्क पहले जितना नहीं रहा। दोनों क्वालिटी के दाम करीब-करीब आ गए हैं।

अभी खपत का अच्छा सीजन चल रहा है। खासकर दक्षिण भारत में उड़द की डिमांड बहुत तेज है। इडली, डोसा, वड़ा, सम्भर जैसे रोज के खाने में उड़द का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है। दाल धोया (washed) और छिलका वाली उड़द की बिक्री भी अच्छी चल रही है। इससे दाल मिलें पूरी तरह एक्टिव हैं। मिल वाले लगातार खरीदारी कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें कच्चा माल चाहिए।

सप्लाई की तरफ देखें तो स्टॉक ज्यादा नहीं बचा है। पाइपलाइन में माल कम है। सबसे बड़ी बात बुआई की है—इस रबी सीजन में उड़द की बुआई काफी कम हो गई। आंकड़ों के मुताबिक, इस बार सिर्फ 4.31 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई, जबकि पिछले साल इसी समय 5.25 लाख हेक्टेयर थी। यानी अच्छी-खासी कमी। उत्तर प्रदेश में फसल अच्छी आई थी, लेकिन कुल रकबा कम होने से और महंगे आयात के कारण बाजार में उपलब्धता को लेकर चिंता है। रुपए की कमजोरी ने भी घरेलू कीमतों को सपोर्ट दिया, क्योंकि आयात महंगा पड़ रहा है।

सब कुछ जोड़कर देखें तो उड़द का बाजार अभी मजबूत है। हल्की से मध्यम तेजी की उम्मीद है। अगर सप्लाई इसी तरह कम रही और डिमांड अच्छी बनी रही, तो दाम और बढ़ सकते हैं। लेकिन जब कीमतें बहुत ऊपर जाती हैं, तो स्टॉकिस्ट और व्यापारी मुनाफा बुक करने लगते हैं। ऐसे में बीच-बीच में थोड़ी गिरावट या करेक्शन आ सकता है। बाजार में ये आम बात है, खासकर तेजी के दौर में।

उड़द जैसी दाल हमारे घर की थाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसानों के लिए ये अच्छा समय है क्योंकि अच्छे दाम मिल रहे हैं। लेकिन आम आदमी के लिए महंगाई का बोझ बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में नई फसल, मौसम, आयात की स्थिति और सरकार की नीतियां बाजार को प्रभावित करेंगी। फिलहाल बाजार ऊपर की तरफ है, लेकिन सावधानी बरतनी जरूरी है।

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