सरसों बाजार की तेजी: एक विस्तृत मंडी रिपोर्ट – 16 दिसंबर 2025

सरसों बाजार की तेजी

नमस्कार, दोस्तों! मैं हूं राजेश शर्मा, एक अनुभवी कृषि बाजार विश्लेषक, जो पिछले 15 सालों से मंडी की हलचलों पर नजर रखता हूं। आज मैं आपके लिए सरसों के बाजार की ताजा रिपोर्ट लेकर आया हूं। आप जानते ही हैं कि सरसों भारत की प्रमुख तिलहन फसलों में से एक है, जो न केवल खाद्य तेल उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि किसानों की आय का बड़ा स्रोत भी। इस साल की फसल अच्छी रही है, लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव ने सभी को चौकन्ना कर रखा है। 16 दिसंबर 2025 की इस रिपोर्ट में हम देखेंगे कि पिछले सप्ताह की गिरावट के बाद आज बाजार में क्या बदलाव आया है। मैं इस रिपोर्ट को सरल भाषा में लिख रहा हूं, ताकि किसान भाई, व्यापारी और आम उपभोक्ता सभी समझ सकें। चलिए, शुरू करते हैं।

पिछले सप्ताह सरसों के बाजार में लगातार गिरावट देखी गई थी। कीमतें नीचे की ओर जा रही थीं, जिससे किसानों में चिंता का माहौल था। लेकिन आज, 16 दिसंबर को, कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं। समाचारों के अनुसार, सरसों की कीमतों में 25 से 50 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह सुधार मुख्य रूप से तेल मिलों की बढ़ती मांग और विदेशी निर्यात की वजह से आया है। आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह बदलाव क्यों? दरअसल, सर्दियों का मौसम शुरू हो चुका है, और सरसों का तेल खाना पकाने से लेकर स्वास्थ्य लाभ के लिए इस्तेमाल होता है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सरसों के डेरिवेटिव्स की डिमांड बढ़ी है, जो भारतीय निर्यातकों के लिए अच्छी खबर है।

यह भी जरूर पड़े – चना बाजार रिपोर्ट 16 दिसंबर 2025

आइए अब विभिन्न मंडियों की स्थिति पर नजर डालें। सबसे पहले बात करते हैं सलोनी प्लांट की। यहां सरसों की कीमतों में शानदार सुधार देखा गया है। शमली में 225 रुपये की बढ़ोतरी के साथ कीमत 7750 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई है। यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि स्थानीय मिलों ने अपनी खरीद बढ़ा दी है। इसी तरह, जयपुर में 7200 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिरता है, जबकि हाल ही में यहां हल्की गिरावट थी। मैंने देखा है कि जयपुर की मंडी राजस्थान की सरसों व्यापार का केंद्र है, जहां किसान दूर-दूर से माल लेकर आते हैं। यहां की बाजार समिति ने हाल ही में बेहतर सुविधाएं प्रदान की हैं, जैसे कि डिजिटल वजन कांटे और ऑनलाइन बिडिंग सिस्टम, जो व्यापार को पारदर्शी बनाता है।

अब चलते हैं भारतपुर की ओर। यहां सरसों की कीमत 6811 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई है, जो 9 रुपये की बढ़ोतरी दर्शाती है। दिल्ली में 6950 रुपये और चरखी दादरी में 7000 रुपये प्रति क्विंटल। ये आंकड़े बताते हैं कि उत्तर भारत में सरसों का बाजार धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। ब्रांडेड तेल मिलों ने शर्म की वजह से अपनी दरें बढ़ाई हैं, जहां 225 से 350 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी देखी गई है। मेरे अनुभव से, जब मिलें अपनी खरीद बढ़ाती हैं, तो किसानों को सीधा फायदा मिलता है। लेकिन सावधान रहें, बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा रहता है।

सरसों के बाजार को समझने के लिए हमें आवक पर भी ध्यान देना चाहिए। आज की रिपोर्ट में कुछ प्रमुख मंडियों की आवक का जिक्र है। उदाहरण के लिए, मंडी बाजार में सरसों की तेल की कीमत कल 10 रुपये बढ़कर जयपुर में कुछ जगहों पर पहुंची। पवन सरसों तेल 1431 और भारतपुर में 1440 रुपये प्रति 10 किलो। कोलकाता में यहां भाव 1,550 रुपये प्रति 10 किलो पर रिकॉर्ड किया गया। आधुनपुर में सरसों तेल एक्सपेलर 1,415 रुपये प्रति 10 किलो। ये कीमतें बताती हैं कि तेल का बाजार भी सरसों की फसल से जुड़ा हुआ है। जब सरसों की कीमत बढ़ती है, तो तेल की कीमतें भी प्रभावित होती हैं, जो अंततः उपभोक्ताओं पर असर डालती हैं।

अब बात करते हैं कुछ अन्य मंडियों की। भिवानी में सरसों तेल की तेजी देखी गई, जहां 30 रुपये की बढ़ोतरी के साथ कीमतें ऊपर गईं। सरसों खल में भारतपुर 2880, अलवर 2800 और चरखी दादरी मंडी में 2,750 रुपये प्रति क्विंटल। मीडिया के अनुसार, अनुशासन चरखी बाजार में सरसों तेल की चाल आगे चलकर काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्भर रहेगी। तकनीकी चार्ट्स देखें तो, सरसों के फ्यूचर्स में हल्की मजबूती है, लेकिन निकट भविष्य में गिरावट का खतरा भी है। मैं सलाह दूंगा कि किसान भाई अपनी फसल को होल्ड करें, अगर संभव हो, क्योंकि जनवरी में नई फसल आने से पहले कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।

सरसों के बाजार में गिरावट के पीछे कई कारण हैं। पिछले हफ्ते, मौसम की वजह से फसल की क्वालिटी प्रभावित हुई थी, जिससे खरीदार सतर्क हो गए। इसके अलावा, आयातित तेलों की उपलब्धता ने घरेलू बाजार पर दबाव डाला। लेकिन अब, सरकार की नीतियां मदद कर रही हैं। हाल ही में, कृषि मंत्रालय ने सरसों के निर्यात को प्रोत्साहन दिया है, जो यूरोप और एशिया के बाजारों में डिमांड बढ़ा रहा है। मेरे एक किसान मित्र ने बताया कि इस साल सरसों की बुआई 20% बढ़ी है, जो आने वाले महीनों में आवक बढ़ाएगी, लेकिन अगर डिमांड बनी रही तो कीमतें स्थिर रहेंगी।

यह भी जरूर पड़े – चना बाजार रिपोर्ट 16 दिसंबर 2025

बाजार की इस हलचल में, कुछ चुनौतियां भी हैं। जैसे कि, परिवहन की समस्या। सर्दियों में fog और ठंड की वजह से ट्रकिंग में देरी होती है, जो माल की डिलीवरी प्रभावित करती है। इसके अलावा, महंगाई का असर भी है। डीजल की कीमतें बढ़ने से परिवहन लागत ऊपर जाती है, जो अंत में किसानों की जेब पर असर डालती है। लेकिन अच्छी खबर यह है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स जैसे कि ई-नाम (e-NAM) अब सरसों व्यापार को आसान बना रहे हैं। किसान घर बैठे अपनी फसल बेच सकते हैं, बिना मंडी जाने। यह एक क्रांतिकारी बदलाव है, जो पारदर्शिता लाता है।

आगे की बात करें तो, दिसंबर के अंत तक बाजार 50-100 रुपये ऊपर जा सकता है, अगर स्टॉक खाली करने की होड़ न लगे। लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोई उथल-पुथल हुई, जैसे कि यूक्रेन-रूस संकट से प्रभावित सूरजमुखी तेल की सप्लाई, तो सरसों की डिमांड और बढ़ सकती है। भारत सरसों का बड़ा उत्पादक है, और हमारी फसल की क्वालिटी विश्व स्तर पर सराही जाती है। किसानों को सलाह है कि वे अपनी फसल की क्वालिटी बनाए रखें – सही समय पर कटाई, सुखाना और स्टोरेज। इससे बेहतर दाम मिलते हैं।

अंत में, मैं कहना चाहूंगा कि सरसों का बाजार हमेशा गतिशील रहता है। आज की तेजी कल की गिरावट में बदल सकती है, इसलिए सूचित रहें। मंडी मार्केट मीडिया की इस स्पेशल रिपोर्ट को पढ़ने के लिए धन्यवाद। अगर आपके कोई सवाल हैं, तो कमेंट में बताएं।

Leave a Comment