तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचे चावल के रेट

नए साल की शुरुआत होते ही चावल के बाजार ने फिर से अपना पुराना रंग दिखाना शुरू कर दिया है – ऊंचे भाव, सुस्त मांग और चारों तरफ अनिश्चितता का माहौल। मैं पिछले कई सालों से एशियाई चावल बाजार को बहुत करीब से देखता आ रहा हूं, और इस बार का जनवरी का पहला सप्ताह कुछ ऐसा ही लग रहा है जैसा अक्सर सर्दियों के बाद होता है। भारत में स्थानीय धान की लागत बढ़ने का असर सीधे निर्यात भावों पर पड़ा और हमारे चावल के दाम लगभग तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए।

5% टूटे पारबॉयल्ड चावल के निर्यात भाव अब 355 से 360 डॉलर प्रति टन तक बोले जा रहे हैं। सिर्फ एक सप्ताह पहले यही माल 350-357 डॉलर के बीच कारोबार कर रहा था। ये स्तर 2 अक्टूबर के बाद का सबसे ऊंचा है। मुझे याद है, अक्टूबर में जब भाव नीचे गए थे तो कई निर्यातकों ने सोचा था कि शायद साल भर यही मंदी रहेगी, लेकिन अब लग रहा है कि भारत का चावल फिर से अपनी ताकत दिखा रहा है। स्थानीय मंडियों में धान महंगा होने का फायदा सीधे निर्यातकों को मिल रहा है।

लेकिन साथियों, ये तेजी जितनी सुनने में अच्छी लग रही है, उतनी जमीन पर नहीं है। भारतीय निर्यात बाजार में खरीदारी की रफ्तार बेहद सुस्त है। अफ्रीकी खरीदार, जो हमारे सबसे बड़े ग्राहक होते हैं, भाव और नीचे आने की उम्मीद में सौदे टाल रहे हैं। वे सोच रहे हैं कि शायद कुछ दिन इंतजार करें तो सस्ते में माल मिल जाएगा। नतीजा ये कि बड़े सौदे नहीं हो रहे, सिर्फ जरूरत का माल ही उठाया जा रहा है। कई निर्यातकों से बात हुई तो वे यही कह रहे थे कि गोदाम भरे हुए हैं, लेकिन शिपमेंट की बुकिंग कम है।

अब थाईलैंड की तरफ नजर दौड़ाएं तो वहां का माहौल और भी ठंडा है। 5% कच्चे चावल के भाव 410 डॉलर प्रति टन पर स्थिर जरूर हैं, लेकिन व्यापारी बताते हैं कि क्रिसमस सप्ताह के बाद से मांग लगभग ठप पड़ गई है। सिर्फ कुछ सीमित खेपें ही आगे बढ़ी हैं। पूरे साल थाई चावल के दाम गिरते रहे, जिसने वहां के निर्यातकों और व्यापारियों दोनों के लिए कारोबार को बहुत चुनौतीपूर्ण बना दिया। कई पुराने व्यापारी तो कह रहे हैं कि इतना मुश्किल साल पहले कभी नहीं देखा। थाई चावल हमेशा प्रीमियम पर बिकता था, लेकिन इस बार भारतीय चावल ने उसे कड़ी टक्कर दी है।

वियतनाम का हाल भी कुछ अलग नहीं है। वहां 5% कच्चे चावल के भाव 360-365 डॉलर प्रति टन पर टिके हुए हैं – पिछले सप्ताह से कोई बदलाव नहीं। मेकोंग डेल्टा में छोटी फसल की कटाई पूरी हो चुकी है और अब व्यापारिक गतिविधियां धीमी पड़ गई हैं। अंतरराष्ट्रीय मांग कमजोर बनी हुई है, जिससे वियतनामी निर्यातकों को आगे और मुश्किलों का डर सता रहा है। वे चिंता कर रहे हैं कि बड़े खरीदार जैसे फिलीपींस अगले साल फिर से चावल आयात पर प्रतिबंध लगा सकता है। इंडोनेशिया तो पहले जैसा बड़ा बाजार रह ही नहीं गया। ऐसे में सभी की निगाहें भारत पर टिकी हैं – अगर भारत मजबूत सप्लाई बनाए रखता है तो पूरे एशिया में दामों पर दबाव बना रहेगा।

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हालांकि एक अच्छी खबर बांग्लादेश से आई। 22 दिसंबर की अंतरराष्ट्रीय निविदा में भारतीय कंपनी बगड़िया ब्रदर्स ने सबसे कम बोली लगाई और उन्हें 50,000 मीट्रिक टन चावल 359.77 डॉलर प्रति टन की दर से सप्लाई करने की मंजूरी मिली। ये सौदा भारतीय निर्यातकों के लिए मनोबल बढ़ाने वाला है, क्योंकि इससे साबित होता है कि हमारे चावल की कीमत अभी भी प्रतिस्पर्धी है। लेकिन बांग्लादेश के घरेलू बाजार की बात करें तो वहां चावल की कीमतें पिछले एक साल में 15-20 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। आयात बढ़ाने और शुल्क में कटौती के बावजूद वहां भाव ऊंचे बने हुए हैं। इससे साफ पता चलता है कि पूरे एशिया में चावल की मांग और सप्लाई का संतुलन अभी बिगड़ा हुआ है।

मेरी नजर में पूरा एशियाई चावल बाजार इस समय तीन चीजों के बीच फंसा हुआ है – ऊंचे दाम, कमजोर मांग और भविष्य की अनिश्चितताएं। भारत में अगर धान की कीमतें और बढ़ीं तो निर्यात भाव ऊपर जा सकते हैं, लेकिन अगर अफ्रीकी या एशियाई खरीदार और इंतजार करते रहे तो बड़े सौदे नहीं होंगे। थाईलैंड और वियतनाम दोनों ही मंदी से जूझ रहे हैं, इसलिए वे भारत से कॉम्पिटिशन झेलने की स्थिति में नहीं हैं। लेकिन अगर भारत से सप्लाई ज्यादा रही तो वैश्विक बाजार में दाम नीचे आने का दबाव बनेगा।

मुझे लगता है कि आने वाले कुछ सप्ताह महत्वपूर्ण होंगे। अगर अफ्रीकी खरीदार लौटे और बड़े टेंडर आए तो भाव और मजबूत हो सकते हैं। लेकिन अगर मांग सुस्त रही तो करेक्शन भी आ सकता है। फिलहाल बाजार संतुलन तलाश रहा है – न बहुत बड़ी तेजी, न बहुत बड़ी मंदी।

मैं तो यही कहूंगा कि जो साथी इस बाजार में हैं, वे धैर्य रखें। बड़े सौदे की जल्दबाजी न करें, जरूरत के हिसाब से पोजीशन बनाएं। बाजार अपना रास्ता खुद बनाता है, हम सिर्फ उसकी दिशा समझकर साथ चल सकते हैं। नए साल में उम्मीद है कि चावल का कारोबार फिर से रफ्तार पकड़ेगा, लेकिन अभी सतर्क रहने का समय है।

व्यापार अपने विवेक और जोखिम सहने की क्षमता के अनुसार करें। आने वाला समय नई कहानी लिखेगा, तब तक सुरक्षित रहें और सकारात्मक रहें।

जय हिंद, जय किसान!

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