
मूंगफली के बाजार में क्या बन रहा है रुझान : नए साल की शुरुआत के साथ ही मूंगफली का बाजार भी कुछ ऐसा ही रंग दिखा रहा है – शुरू में जोश भरी तेजी, बीच में थोड़ा सुकून और अंत में हल्की सी मुनाफावसूली। मैं पिछले कई सालों से इस बाजार को करीब से देख रहा हूं और इस बार का सप्ताह भी कुछ वैसा ही रहा, जैसा अक्सर सर्दियों के अंत में होता है। सप्ताह की शुरुआत में तो लग रहा था कि भाव आसमान छू लेंगे, लेकिन जैसे-जैसे सप्ताह आगे बढ़ा, खरीदारों ने थोड़ा ब्रेक लगाया और बाजार ने भी सांस ली।
मुझे याद है, सोमवार-मंगल को गुजरात की मंडियों में जो माहौल था, वो देखकर दिल खुश हो गया। गोंडल में रोजाना करीब 50 हजार बोरी और राजकोट में 40 हजार बोरी के आसपास आवक के बावजूद खरीदारी इतनी जोरदार थी कि किसान और स्टॉकिस्ट मुस्कुराते हुए मंडी से लौट रहे थे। सीमित सप्लाई और मिलर्स की सक्रिय खरीद ने भावों को एक झटके में ऊपर धकेल दिया। गुजरात में तो कुछ क्वालिटी के भाव ₹750 प्रति क्विंटल तक उछल गए और ऊपरी स्तर पर ₹9000 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए। ये देखकर लगा कि शायद इस बार रबी की कम बुवाई का असर जल्दी ही दिखने लगा है।
राजस्थान की तरफ नजर दौड़ाएं तो बीकानेर मंडी में भी कुछ ऐसा ही नजारा था। वहां औसत भाव करीब ₹300 बढ़कर ₹5800 प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच गए। ऊपरी स्तर पर तो ₹7500 तक बोली लग रही थी। लेकिन जैसा कि इस बाजार में अक्सर होता है, ऊंचे भाव पर कुछ व्यापारियों ने मुनाफा बुक करना शुरू कर दिया और सप्ताह के अंत तक ₹300 की नरमी भी देखने को मिली। फिर भी, कुल मिलाकर बीकानेर में बाजार पॉजिटिव ही बंद हुआ।
महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की मंडियों की बात करें तो सोलापुर में भाव ₹8400 के आसपास स्थिर रहे, जबकि महोबा और मऊरानीपुर में करीब ₹400 और झांसी में ₹200 की अच्छी मजबूती दर्ज की गई। ये क्षेत्र हमेशा से मूंगफली के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं और इस बार भी इन मंडियों ने बाजार को अच्छा सपोर्ट दिया।
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सबसे दिलचस्प बदलाव राजस्थान में आवक का देखने को मिला। जहां पहले सीजन में रोजाना 1.5 लाख कट्टे तक आवक होती थी, अब वो घटकर मात्र 50-60 हजार बोरी रह गई है। ये कमी बाजार के लिए एक मजबूत नीचे का सपोर्ट बन गई है। किसान अब अपना माल ज्यादा नहीं निकाल रहे, शायद उन्हें लग रहा है कि अभी और बेहतर भाव मिल सकते हैं। इस कमी का फायदा सीधे भावों को मिला और बाजार को नीचे गिरने से रोका।
मूंगफली दाने के बाजार में भी अच्छी हलचल रही। बीकानेर में दाने के भाव ₹200 तक मजबूत हुए, जबकि सोलापुर और नागपुर में तो ₹500 तक की तेजी देखी गई। मिलर्स की डिमांड दाने में भी अच्छी बनी रही, क्योंकि उन्हें लग रहा है कि कच्चा माल अभी और महंगा हो सकता है।
अब बात करते हैं मूंगफली तेल की, क्योंकि यही वो प्रोडक्ट है जो अंततः उपभोक्ता तक पहुंचता है। कच्चे माल के ऊंचे भाव का सीधा असर तेल पर पड़ा। गुजरात के बड़े केंद्रों – राजकोट, गोंडल, जूनागढ़ और जामनगर में लूज तेल के भाव ₹1600 प्रति 10 किलो तक पहुंच गए थे। लेकिन पिछले दो दिनों में थोड़ी करेक्शन आई और अच्छी क्वालिटी के भाव ₹1575 तक फिसल गए। राजकोट में 15 किलो टीन का भाव करीब ₹2525 के आसपास बना रहा। वहीं बीकानेर, मुंबई और चेन्नई में तेल के भाव ₹50 प्रति 10 किलो तक मजबूत बोले गए। कुल मिलाकर तेल का बाजार भी कच्चे माल के साथ-साथ चलता दिखा।
अब सवाल ये है कि आगे क्या? मेरी नजर में मौसमी खरीद अब लगभग खत्म हो चुकी है। किसान अपना ज्यादातर माल बेच चुके हैं और अब जो बचा है, वो चुनिंदा हाथों में है। मिलर्स की डिमांड इसलिए थोड़ी धीमी पड़ गई है। रिटेल लेवल पर भी अभी वो जोरदार मांग नहीं दिख रही, जो बड़ी तेजी के लिए जरूरी होती है। ऐसे में तत्काल कोई बड़ा उछाल आने की संभावना कम लग रही है।
लेकिन दूसरी तरफ, गिरावट की भी ज्यादा गुंजाइश नहीं दिखती। राजस्थान से सप्लाई अब लगभग बंद सी हो चुकी है और रबी सीजन में मूंगफली का रकबा सिर्फ 2.77 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले सालों से काफी कम है। ये आंकड़ा बाजार को लंबे समय तक सपोर्ट देगा। यानी नीचे बहुत गहराई तक गिरने का डर नहीं है।
इस समय अगर दूसरे खाद्य तेलों से तुलना करें तो मूंगफली तेल निवेश के लिहाज से थोड़ा बेहतर दिख रहा है। सोया और सनफ्लॉवर तेल की तुलना में इसका प्रीमियम बना हुआ है और मांग भी स्थिर है। मूंगफली के बाहों (बाय-प्रोडक्ट्स) में भी हल्की तेजी का रुझान बना हुआ है।
कुल मिलाकर बाजार अभी “रुक-रुक कर आगे बढ़ने” वाली स्थिति में है। कभी एक-दो दिन तेजी, फिर थोड़ा स्थिर या हल्की नरमी। जो व्यापारी धैर्य रख सकते हैं, उनके लिए ये अच्छा समय है। लेकिन जल्दबाजी में बड़ा दांव लगाना ठीक नहीं। हमेशा की तरह मेरा यही मानना है कि बाजार अपना रास्ता खुद बनाता है – हम सिर्फ उसकी दिशा को समझकर साथ चल सकते हैं।
अंत में यही कहूंगा – व्यापार अपने विवेक और जोखिम लेने की क्षमता के अनुसार करें। मैं तो बस अपनी नजर से जो देख रहा हूं, वो आपके साथ साझा कर रहा हूं। आने वाला सप्ताह फिर नई कहानी लिखेगा, तब तक सतर्क रहें, सकारात्मक रहें।
जय हिंद, जय किसान!