
चावल निर्यात के मामले में टूट सकते हैं पुराने रिकॉर्ड – रिपोर्ट
प्यारे किसान भाइयों और बहनों,
नमस्कार! भारत का चावल एक बार फिर वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बना रहा है। निर्यात रफ्तार पकड़ रहा है, लेकिन सरकारी गोदामों में जमा होता भारी स्टॉक नीति निर्माताओं के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। आइए, आज हम चावल की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से बात करें।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 दिसंबर 2025 तक केंद्रीय पूल में चावल का स्टॉक रिकॉर्ड 575.7 लाख टन तक पहुंच चुका है। यह 1 जनवरी के बफर नॉर्म से करीब 76 लाख टन ज्यादा है और पिछले साल की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाता है। वजह साफ है – खुले बाजार में चावल की कीमतें MSP से नीचे रहने के कारण खरीफ सीजन में धान की सरकारी खरीद जोरदार रही। किसान भाइयों ने MSP पर अपनी फसल बेची, जिससे गोदामों में चावल का ‘पहाड़’ खड़ा हो गया है। यह स्टॉक घरेलू आपूर्ति को सहज बनाए रखता है, लेकिन भंडारण लागत और गुणवत्ता बनाए रखने में बड़ी चुनौती पैदा करता है।
अब अच्छी खबर निर्यात के मोर्चे पर है। मार्च 2025 में चावल निर्यात पर लगे अंतिम प्रतिबंध हटने के बाद बाजार खुला, और जनवरी से नवंबर 2025 के बीच निर्यात में 184.9 लाख टन की शानदार बढ़ोतरी दर्ज हुई, जो साल-दर-साल करीब 37 प्रतिशत अधिक है। राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन का अनुमान है कि पूरे 2025 में कुल चावल निर्यात 225 लाख टन तक पहुंच सकता है, जो पिछले साल से लगभग 25 प्रतिशत ज्यादा होगा। यह भारत को वैश्विक बाजार में 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी दिला रहा है।
एपीडा के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच गैर-बासमती चावल का निर्यात मजबूत रहा, जबकि बासमती भी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। मजबूत घरेलू उत्पादन और रिकॉर्ड फसल के चलते भारत थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान जैसे प्रतिद्वंद्वी देशों पर दबाव बना रहा है। फिलहाल वैश्विक मांग बहुत तेज नहीं है, लेकिन रुपये के कमजोर होने से भारतीय चावल अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बना हुआ है। निर्यातकों को स्टॉक जुटाने में कोई बड़ी दिक्कत नहीं आ रही, क्योंकि सरकारी और निजी दोनों स्तर पर पर्याप्त माल उपलब्ध है।
किसान भाइयों, यह स्थिति आपके लिए भी सकारात्मक है। रिकॉर्ड उत्पादन और निर्यात से बाजार भाव स्थिर रहेंगे, और MSP पर खरीद जारी रहेगी। लेकिन आगे की नीतियां महत्वपूर्ण होंगी – सरकार को स्टॉक प्रबंधन, भंडारण सुविधा बढ़ाने और निर्यात को प्रोत्साहन देने पर ध्यान देना होगा। अगर स्टॉक ज्यादा रहा तो खुले बाजार में दबाव पड़ सकता है, लेकिन निर्यात बढ़ने से संतुलन बना रहेगा।
हमारा उद्देश्य आपको सटीक जानकारी देना है ताकि आप अपनी फसल की योजना बेहतर बना सकें। चावल की खेती में मेहनत करने वाले सभी किसान भाइयों को बधाई – आपकी फसल न केवल देश की थाली भर रही है, बल्कि दुनिया भर में भारत का नाम रोशन कर रही है। आगे भी अपडेट देते रहेंगे। कोई सवाल हो तो जरूर बताएं।
जय किसान! जय हिंद!