गेहूं के बुवाई रकबे के बदल रहे हैं रुझान – रिपोर्ट

गेहूं के बुवाई रकबे के बदल रहे हैं रुझान - रिपोर्ट
गेहूं के बुवाई रकबे के बदल रहे हैं रुझान – रिपोर्ट

प्यारे किसान भाइयों और बहनों,

नमस्कार! रबी सीजन की बुवाई अब अपने अंतिम चरण में है, और गेहूं जैसी प्रमुख फसल की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। इस बार चालू रबी सीजन 2025-26 में गेहूं के बुवाई क्षेत्र में कुल मिलाकर मामूली बढ़त तो दर्ज की गई है, लेकिन यह बढ़त पिछले वर्षों की तुलना में काफी धीमी रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 19 दिसंबर 2025 तक गेहूं का कुल बुवाई क्षेत्र 301.64 लाख हेक्टेयर पहुंच चुका है, जो पिछले साल की समान अवधि के 300.34 लाख हेक्टेयर से करीब 1.30 लाख हेक्टेयर अधिक है। यह आंकड़ा सकारात्मक जरूर लगता है, लेकिन औसत सामान्य क्षेत्रफल 312.35 लाख हेक्टेयर की तुलना में अभी भी लगभग 11 लाख हेक्टेयर पीछे है।

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कुछ प्रमुख राज्यों में बुवाई का काम अभी भी जारी है, इसलिए आने वाले दिनों में क्षेत्रफल में थोड़ी और वृद्धि हो सकती है। हालांकि, शुरुआती अनुमानों में उम्मीद थी कि इस बार रकबा 330 लाख हेक्टेयर को पार कर जाएगा, लेकिन बुवाई की रफ्तार धीमी पड़ने से अब ये लक्ष्य चुनौतीपूर्ण नजर आ रहे हैं। पिछले रबी सीजन 2024-25 में गेहूं का कुल क्षेत्रफल रिकॉर्ड 328.04 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा था, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर था। इस बार किसानों का उत्साह पहले जैसा नहीं दिख रहा, और कई इलाकों में क्षेत्रफल स्थिर या थोड़ा कम भी रहा है।

खासकर देश के सबसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में स्थिति चिंताजनक है। यहां किसान भाई गेहूं की बजाय सरसों, चना और अन्य दलहन-तिलहन फसलों की ओर ज्यादा झुकाव दिखा रहे हैं। वजह साफ है – सरसों और चना जैसी फसलों में बाजार भाव बेहतर चल रहे हैं, साथ ही कम पानी और कम लागत की जरूरत पड़ती है। अन्य राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी गेहूं के रकबे में कोई बड़ी छलांग नहीं लगी है। कुछ क्षेत्रों में तो पिछले साल के मुकाबले कमी भी दर्ज की गई है। किसानों के बीच गेहूं को लेकर पहले वाला जोश कम होने की मुख्य वजहें हैं – बढ़ती लागत, पानी की अनिश्चितता, मौसम के मिजाज और वैकल्पिक फसलों का बेहतर रिटर्न।

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सरकार ने इस सीजन के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2425 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो पिछले साल से 150 रुपये अधिक है। यह बढ़ोतरी किसानों को राहत देने वाली है और उम्मीद है कि इससे बुवाई में देर से भी कुछ प्रोत्साहन मिलेगा। लेकिन अभी तक का ट्रेंड बताता है कि MSP अकेला गेहूं की खेती को आकर्षक बनाने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाया। अगर मौसम अनुकूल रहा और सिंचाई की अच्छी व्यवस्था हुई, तो उत्पादन पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन क्षेत्रफल की यह धीमी गति आगे उत्पादन अनुमान और बाजार भाव दोनों को प्रभावित कर सकती है।

किसान भाइयों, गेहूं हमारी खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है। अगर आपने अभी तक बुवाई नहीं की है या देर से कर रहे हैं, तो पछेती किस्मों का चुनाव करें, जैसे HD-2967, DBW-187 या स्थानीय अनुशंसित वैरायटी। अच्छी बीज दर, उर्वरक संतुलन और समय पर सिंचाई से अच्छी पैदावार ली जा सकती है। हमारा मकसद आपको ताजा और सटीक जानकारी देना है ताकि आप अपनी स्थिति के अनुसार बेहतर निर्णय ले सकें। बाजार और मौसम दोनों अप्रत्याशित होते हैं, इसलिए अपनी आर्थिक स्थिति, पानी की उपलब्धता और मिट्टी की सेहत को देखकर फैसला लें।

आगे भी हम रबी फसलों की अपडेट देते रहेंगे। कोई सवाल हो तो जरूर बताएं। आपकी फसल लहलहाए और मेहनत रंग लाए, यही दुआ है।

जय जवान, जय किसान!

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