
प्यारे किसान भाइयों और बहनों,
नमस्के! आप सभी की मेहनत और फसल की सफलता के लिए हार्दिक बधाई। आज हम मक्का के वर्तमान बाजार की स्थिति पर विस्तार से चर्चा करेंगे। इस समय मक्का का बाजार एक संतुलित ठहराव की स्थिति में है, जहां तेजी और मंदी दोनों पक्ष साथ-साथ चल रहे हैं। भाव मुख्य रूप से मक्का की क्वालिटी पर निर्भर कर रहे हैं – अच्छी नमी वाली, चमकदार और स्वस्थ दाने वाली मक्का को बेहतर दाम मिल रहे हैं, जबकि औसत या नमी ज्यादा वाली फसल में थोड़ी कमजोरी दिख रही है।
हाल की मंडी रिपोर्ट्स के अनुसार, विभिन्न स्थानों पर भाव इस प्रकार रहे: छिंदवाड़ा में 1820 रुपये, सांगली में 2125 रुपये, सह्याद्री स्टार्च पर 2000 रुपये, खरगोन में 1770 रुपये, तिरुपति स्टार्च प्लांट इंदौर पर 1835 रुपये और इंदौर में बिल्टी रेट 1800 रुपये प्रति क्विंटल। दक्षिण भारत और इंडस्ट्रियल क्षेत्रों में NCDEX जैसे प्लेटफॉर्म पर इरोड में 2125 रुपये का स्तर बना हुआ है। महाराष्ट्र और गुजरात की प्रोसेसिंग यूनिट्स बाजार को मजबूत सहारा दे रही हैं, जिससे इन क्षेत्रों में मांग स्थिर बनी हुई है।
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अब आवक की बात करें तो उत्तर प्रदेश और बिहार की पुरानी मक्का की सप्लाई लगभग समाप्त हो चुकी है। वर्तमान में मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र से नई फसल की आवक बाजार को दिशा दे रही है। इसी कारण एक ही राज्य में अलग-अलग मंडियों में भावों में अंतर दिख रहा है – कहीं थोड़ी गिरावट तो कहीं समान तेजी। मंडियों में औसत क्वालिटी की मक्का 1600 रुपये के आसपास और बेस्ट क्वालिटी वाली 1770 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में कारोबार कर रही है, जिसमें 20-25 रुपये का मामूली उतार-चढ़ाव सामान्य है।
उत्पादन के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2024-25 सीजन में मक्का का कुल उत्पादन लगभग 434 लाख टन रहा, जबकि 2025-26 के लिए अनुमान 500 लाख टन तक पहुंचने का है। यह बढ़ोतरी अच्छे मानसून और बेहतर बीजों का नतीजा है। हालांकि, इथेनॉल कंपनियों की मांग इस समय सुस्त पड़ी हुई है। पोल्ट्री और पशु चारा उद्योग को सस्ता माल उपलब्ध होने से बाजार में बड़ी तेजी नहीं बन पा रही। इसके अलावा, सरकार की नीति से चावल का 40% हिस्सा इथेनॉल उत्पादन में अनिवार्य होने से मक्का पर दबाव कम हुआ है, लेकिन घरेलू खपत मजबूत बनी हुई है। सरकारी डेटा के मुताबिक, नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के इथेनॉल सीजन में करीब 125.75 लाख टन मक्का का उपयोग हुआ, जिससे 477.80 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई। यह आंकड़े बताते हैं कि इंडस्ट्री की बेसिक मांग तो बरकरार है।
आगे की संभावनाओं पर विचार करें तो फिलहाल बाजार में कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नजर नहीं आ रहा। क्रिसमस और नए साल की छुट्टियों के कारण मंडियों में थोड़ी शांति है, लेकिन जनवरी में निर्यात की गतिविधियां बढ़ने पर 50-75 रुपये की मामूली तेजी आ सकती है। व्यापारी सूत्रों से मिली जानकारी भी यही कहती है कि बाजार स्थिर रहेगा, लेकिन क्वालिटी अच्छी रखें तो बेहतर दाम मिलेंगे।
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किसान भाइयों, अगर आपकी जरूरत हो तो अभी के भावों पर बिक्री कर सकते हैं, क्योंकि स्तर संतोषजनक है। लेकिन अगर भंडारण की सुविधा है और इंतजार कर सकते हैं, तो जनवरी तक रुकना भी फायदेमंद हो सकता है। हमारा मकसद सिर्फ सटीक जानकारी देना है ताकि आप अपनी मेहनत की फसल को सही समय और सही दाम पर बेच सकें। बाजार की अनिश्चितताएं हमेशा रहती हैं – मौसम, निर्यात नीतियां, इंडस्ट्री की मांग सब प्रभाव डालते हैं। इसलिए, हमारी सलाह को आधार मानें, लेकिन अंतिम फैसला अपनी स्थानीय स्थिति, आर्थिक जरूरतों और विवेक से लें।
हम हमेशा आपके हित में खड़े हैं और ताजा अपडेट देते रहेंगे। कोई सवाल हो तो जरूर पूछें। आपकी फसल सोने जैसी चमके, यही कामना है।
जय किसान! जय हिंद!