
उड़द दाल की तेजी मंदी रिपोर्ट – 23 दिसम्बर 2025
साथियों, उड़द का बाजार पिछले पूरे सप्ताह से एक निरंतर दबाव की गिरफ्त में रहा और सोमवार को भी यह सिलसिला बिना रुके आगे बढ़ता दिखा। पूरे हफ्ते जहां बिकवाली का बोझ बना रहा, वहीं सोमवार को उड़द में करीब ₹25 की और नरमी दर्ज हुई। खरीदारी बेहद सुस्त पड़ी हुई है, जबकि आयातकों की तरफ से बिकवाली में तेजी देखी जा रही है – यही असंतुलन बाजार को नीचे खींच रहा है।
सोमवार के प्रमुख बाजारों में चेन्नई में उड़द FAQ ₹6,950 और SQ ₹7,525 पर रहा। दिल्ली में FAQ ₹7,250 और SQ ₹7,875 बोले गए, जहां SQ क्वालिटी में ₹50 तक की कमजोरी साफ दिखी। मुंबई में FAQ ₹6,950 और कोलकाता में ₹7,050 के स्तर पर कारोबार हुआ। दक्षिण भारत में पॉलिश उड़द की बात करें तो गुंटूर में भाव ₹7,350 पर स्थिर बने रहे, लेकिन विजयवाड़ा में ₹7,400 के दायरे में ₹100 की गिरावट आई – यह वहां की मिलों की सुस्त डिमांड को साफ दर्शाती है।
ज्यादातर मिलें इस समय सिर्फ रोजमर्रा की जरूरत भर ही माल उठा रही हैं, बड़ा स्टॉक बनाने से कतरा रही हैं। खरीफ उड़द की आवक उत्पादक मंडियों में लगातार बनी हुई है, जिससे सप्लाई साइड का दबाव किसी तरह कम नहीं हो पा रहा। नतीजा यह कि भावों पर ऊपरी छत कमजोर बनी हुई है।
आयात के मोर्चे पर चेन्नई पोर्ट में बर्मा से दिसंबर-जनवरी शिपमेंट की FAQ उड़द 740 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई, जिसमें 10 डॉलर की कमजोरी आई। SQ उड़द हालांकि 830 डॉलर पर स्थिर बनी रही। बर्मा के घरेलू बाजार में SQ के दाम कमजोर बताए जा रहे हैं, जबकि FAQ अपेक्षाकृत टिका हुआ है। मौजूदा स्तरों पर आयातकों को रेट डिस्पैरिटी का सामना करना पड़ रहा है – पहले ऊंचे दाम पर लिया माल अब घाटे की स्थिति में दिख रहा है।
फिर भी, एक राहत की बात यह है कि दक्षिण भारत में खपत का सीजन चल रहा है। इडली-डोसा की थालियों में उड़द की जरूरत पूरी तरह गायब नहीं हुई, इसलिए बाजार को नीचे के स्तर पर कुछ मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। बहुत तेज गिरावट की गुंजाइश कम ही लग रही है। गंगोह-सहारनपुर लाइन का पड़ता भी इन भावों से नीचे बैठता नहीं दिख रहा, जो एक मनोवैज्ञानिक आधार दे रहा है।
कुल मिलाकर, निकट अवधि में उड़द में कोई लंबी तेजी की उम्मीद कम है, लेकिन मौजूदा स्तर बहुत कमजोर भी नहीं लग रहे। दिसंबर के अंत तक बाजार शायद ₹25-50 के संकीर्ण दायरे में ही सांस लेता रहेगा – न बहुत ऊपर उछलेगा, न गहरे नीचे जाएगा।
किसान भाइयो और व्यापारी साथियो, ऐसे मंदे दौर में धैर्य और सावधानी सबसे बड़ा हथियार है। अच्छी क्वालिटी का माल संभालकर रखें, जरूरत से ज्यादा स्टॉक न पकड़ें। खपत जब जोर पकड़ेगी, तब बाजार फिर अपना रंग दिखाएगा। अभी जल्दबाजी न करें, सही समय का इंतजार करें।
व्यापार हमेशा अपने विवेक, अपनी जानकारी और पूंजी की सुरक्षा को ध्यान में रखकर करें। बाजार का यह दौर भी गुजर जाएगा, और जो समझदारी से चलेगा, वही आगे मुस्कुराएगा।