
साथियों, खपत का पीक सीजन चल रहा है – त्योहारों की थालियों में अरहर दाल की खुशबू फैलनी चाहिए थी – मगर सोमवार को अरहर के बाजार में मंदी का हल्का साया साफ नजर आया। पिछले हफ्ते स्टॉकिस्टों ने थोड़ी तेजी लाने की कोशिश की थी, भावों को ऊपर धकेला था, लेकिन दाल मिलों की तरफ से खरीद का मजबूत साथ न मिलने से वह जोश ज्यादा देर टिक नहीं पाया और बाजार फिर दबाव में आ गया।
शाम के सत्र में लेमन अरहर के भाव चेन्नई में ₹6,550, दिल्ली में ₹6,950 और मुंबई में ₹6,550 प्रति क्विंटल रहे – हर जगह करीब ₹25 की नरमी दर्ज हुई। देसी अरहर में सोलापुर और इंदौर जैसे बाजार थोड़े कमजोर दिखे, जबकि बाकी उत्पादक मंडियों में भाव लगभग स्थिर बने रहे। मिलें इस समय सिर्फ रोज की जरूरत भर ही माल उठा रही हैं, बड़ा स्टॉक बनाने से कतरा रही हैं – मार्जिन का दबाव और आगे की अनिश्चितता उन्हें सतर्क बनाए हुए है।
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आयात के मोर्चे पर फिलहाल शांति है। चेन्नई में बर्मा की लेमन अरहर दिसंबर-जनवरी शिपमेंट के लिए 730 डॉलर प्रति टन (C&F) पर स्थिर बनी हुई है। बर्मा के घरेलू बाजार में भी कोई हलचल नहीं। आयातकों के गोदामों में पहले ऊंचे भाव पर लिया माल पड़ा है, इसलिए वे घटे दाम पर जल्दी बिकवाली नहीं कर रहे – यह नीचे के स्तर को कुछ हद तक सहारा दे रहा है।
घरेलू मंडियों में कर्नाटक, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से आवक लगातार आ रही है, लेकिन मिलें आक्रामक खरीद में नहीं आ रही हैं। फिर भी, खपत का सीजन होने से अरहर दाल की मांग पूरी तरह सूखी नहीं है – यही वजह है कि बाजार में बहुत बड़ी गिरावट की गुंजाइश कम लग रही है।
मुंबई में अफ्रीकी लाइन की अरहर में सूडान ₹5,600, गजरी ₹5,300, मतवारा ₹5,200 और सफेद अरहर ₹5,400 प्रति क्विंटल पर रही – यहां ₹50 की कमजोरी दिखी। हालिया गिरावट के बाद दाल के भावों में ₹2-3 प्रति किलो की नरमी आई थी, लेकिन इन स्तरों पर मुंबई-चेन्नई में बड़े सौदे पड़ते नहीं दिख रहे। अच्छी बात यह है कि रंगून बाजार से भाव 5-7 डॉलर प्रति टन ऊपर बोले जा रहे हैं, जिससे नीचे की तरफ मजबूत सपोर्ट बनता नजर आ रहा है।
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कुल मिलाकर, बाजार इस समय एक संयमित मोड़ पर खड़ा है। मंडी मार्केट मीडिया का मानना है कि यहां से अरहर में ₹150-200 प्रति क्विंटल की धीमी रिकवरी संभव है – वह भी जनवरी के दिनों में धीरे-धीरे आती हुई। फिलहाल बाजार सीमित दायरे में ही सांस लेगा, न बहुत ऊपर उछलेगा, न गहरे नीचे जाएगा।
किसान भाइयो और व्यापारी साथियो, ऐसे समय में धैर्य सबसे बड़ा साथी है। जो माल अच्छी क्वालिटी का है, उसे संभालकर रखें – सही समय पर सही दाम जरूर मिलेगा। मिलों की खरीद जब जोर पकड़ेगी, तब बाजार फिर रंग दिखाएगा।
व्यापार हमेशा अपने विवेक, अपनी जानकारी और सावधानी के साथ करें। बाजार का खेल लंबा होता है – जो धैर्य रखता है, वही अंत में मुस्कुराता है।
जय किसान! जय व्यापार!