मक्का बाजार विश्लेषण और आगे की चाल पर रिपोर्ट

मक्का बाजार विश्लेषण और आगे की चाल पर रिपोर्ट
मक्का बाजार विश्लेषण और आगे की चाल पर रिपोर्ट

साथियों, सोमवार को मक्का के बाजार में एक संयमित लेकिन मजबूत रुख देखने को मिला। अलग-अलग राज्यों में थोड़ी भिन्नता तो थी, मगर अब साफ नजर आ रहा है कि नीचे के स्तर पर भाव इतनी आसानी से नहीं टूटेंगे। किसान भाइयों की मेहनत और मंडियों में घटती आवक ने बाजार को एक मजबूत आधार दे दिया है।

बिहार की मशहूर गुलाब बाग मंडी में कल महज 80-90 गाड़ियों की ही आवक हुई – जो सामान्य दिनों से काफी कम है। नतीजा यह कि बिकवाली का कोई दबाव नहीं बना, और अच्छी क्वालिटी का माल खरीदारों की पकड़ में रहा। नंबर एक क्वालिटी के भाव ₹2200 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए। गुलाब बाग इस समय मात्रा से ज्यादा क्वालिटी पर टिका बाजार बन चुकी है – जहां अच्छा माल बेचने वाले किसान को नीचे का डर कम ही सताता है।

दूसरी मंडियों की बात करें तो दाहोद में ₹2150, सह्याद्री स्टार्च प्लांट पर ₹1940, खरगोन में ₹1830, सांगली में ₹2125 और तिरुपति स्टार्च प्लांट पर ₹1875 प्रति क्विंटल के भाव रहे। ये आंकड़े बताते हैं कि क्षेत्रीय मांग और प्लांटों की जरूरत के हिसाब से भावों में स्थिरता बनी हुई है।

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महाराष्ट्र में कल भाव सीमित दायरे में घूमते रहे, लेकिन रुझान हल्का नकारात्मक जरूर लगा। क्रिसमस और नए साल की छुट्टियों का असर साफ दिखा – बाजार में सुस्ती छाई रही, उत्तर महाराष्ट्र में रैक खरीद भी धीमी पड़ी, जिससे भावों को अतिरिक्त ताकत नहीं मिल सकी। फिर भी, पहले के निचले स्तरों से मक्का के दाम ₹150-200 प्रति क्विंटल तक सुधर चुके हैं। अब एक्सपोर्ट पैरिटी थोड़ी कमजोर पड़ गई है, जो आगे चलकर घरेलू बाजार को और मजबूती दे सकती है।

बिहार और पूर्वी भारत में भी कल भाव संकीर्ण दायरे में रहे, रुख हल्का कमजोर। निर्यात की बात करें तो फिलहाल चुनौतियां हैं – श्रीलंका को अस्थायी रूप से शिपमेंट रुका हुआ है, जबकि भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच वहां निर्यात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। उत्तर भारत के खरीदार भी थोड़े पीछे हटते नजर आए, हरियाणा में ₹20-30 प्रति क्विंटल की नरमी दर्ज हुई।

कुल मिलाकर देखें तो मंडियों में आवक घटने और अच्छी क्वालिटी के माल की कमी ने गिरावट को रोका हुआ है। दूसरी ओर, महाराष्ट्र व पूर्वी भारत में निर्यात से जुड़ी चिंताएं और छुट्टियों का प्रभाव बाजार को सीमित रख रहा है। लेकिन क्रिसमस-नया साल बीतते ही जनवरी में तस्वीर बदल सकती है – मक्का के भावों में ₹50 से ₹100 तक की और तेजी की उम्मीद जग रही है। स्टार्च प्लांटों की मांग, पोल्ट्री फीड की जरूरत और रबी फसल की प्रगति सब मिलकर बाजार को ऊपर की ओर धकेल सकते हैं।

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किसान भाइयो और व्यापारी साथियो, बाजार की यह स्थिति सिखाती है कि धैर्य और सही समय का इंतजार फायदेमंद होता है। अच्छी क्वालिटी का माल तैयार रखें, आवक कम होने का फायदा उठाएं। लेकिन व्यापार हमेशा अपने विवेक और जोखिम समझकर ही करें। आने वाला समय मक्का उत्पादकों के लिए उम्मीद भरा लग रहा है – मेहनत रंग लाएगी!

जय किसान!

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