खाद्य तेलों के बाजार में क्या है रुझान देखें रिपोर्ट

खाद्य तेलों के बाजार में क्या है रुझान देखें रिपोर्ट
खाद्य तेलों के बाजार में क्या है रुझान देखें रिपोर्ट

खाद्य तेलों के बाजार में क्या है रुझान देखें रिपोर्ट

दोस्तों, खाद्य तेलों के बाजार में पिछले हफ्ते भी कुछ दबाव बना रहा, लेकिन ग्लोबल स्तर पर कमजोरी के बावजूद भारत का घरेलू मार्केट काफी हद तक संतुलित दिखा। मैं तो कहता हूं कि ये बाजार हमेशा सरप्राइज देता है – कभी तेजी, कभी मंदी, लेकिन लंबे समय में स्मार्ट ट्रेडर ही फायदा उठाते हैं। चलिए, आज पाम ऑयल और सोयाबीन ऑयल की स्थिति पर विस्तार से बात करते हैं, क्योंकि ये दोनों ही हमारे किचन का मुख्य हिस्सा हैं।

पाम ऑयल की अगर बात करें तो कुआलालंपुर कमोडिटी एक्सचेंज (KLC) में पिछले हफ्ते लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट आई। वजह साफ थी – चीन के DCE मार्केट में कमजोरी, दुनिया भर में पाम ऑयल के हाई स्टॉक और सोयाबीन ऑयल में नरमी। लेकिन दोस्तों, हर बादल में चांदी की लाइनिंग होती है। इंडोनेशिया में अक्टूबर के अंत तक पाम ऑयल स्टॉक 10 प्रतिशत तक घट गया, जो लॉन्ग टर्म में अच्छा सपोर्ट देगा। ऊपर से इंडोनेशिया ने B50 बायोडीजल (यानी 50 प्रतिशत पाम ऑयल मिक्स) के रोड ट्रायल शुरू कर दिए हैं, जो भविष्य के लिए बहुत पॉजिटिव सिग्नल है। इससे डोमेस्टिक डिमांड बढ़ेगी और ग्लोबल सप्लाई पर प्रेशर आएगा।

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भारत में नवंबर के दौरान पाम ऑयल का इम्पोर्ट महीने-दर-महीने 5 प्रतिशत बढ़ा, लेकिन साल-दर-साल 25 प्रतिशत कम रहा। नतीजा? घरेलू उपलब्धता अभी सीमित है, जो कीमतों को ज्यादा नीचे नहीं गिरने दे रही। मलेशिया से 1 से 20 दिसंबर तक एक्सपोर्ट 2.4 प्रतिशत बढ़ा, जो पहले 1-15 दिसंबर की 16 प्रतिशत गिरावट के बाद एक राहत की खबर है। फिर भी, स्टॉक हाई रहने की आशंका बनी हुई है। तकनीकी चार्ट देखें तो KLC ने 4000 का सपोर्ट ब्रेक किया और अब 3800-4100 के रेंज में ट्रेडिंग हो सकती है। हमारे यहां लूज पाम ऑयल की कीमत करीब 1215 रुपये प्रति किलो पर स्थिर है, और 1210 रुपये मजबूत सपोर्ट लेवल बना हुआ है।

मांग अभी सुस्त है, त्योहारों का सीजन खत्म हो गया तो खपत में ब्रेक लगा है। लेकिन नीचे की गिरावट लिमिटेड लग रही है। मैंने कई ट्रेडर्स से बात की, सब कहते हैं कि पाम में लॉन्ग टर्म रिकवरी की अच्छी संभावना है। बस धैर्य रखो, जल्दबाजी मत करो।

अब सोयाबीन ऑयल की बारी। यहां पिछले हफ्ते इंटरनेशनल प्रेशर ज्यादा रहा। CBOT सोया ऑयल 3.2 प्रतिशत गिरा, अमेरिका में NOPA स्टॉक 1.513 बिलियन पाउंड तक पहुंच गया – ये 15.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। अर्जेंटीना का सोया ऑयल भी 25 डॉलर प्रति टन टूटकर 1170 डॉलर के सपोर्ट के पास आ गया। घरेलू मार्केट में कांडला सोया ऑयल 1250 रुपये और मुंबई में 1265 रुपये तक पहुंच गया। इम्पोर्ट डिस्पैरिटी सिर्फ 2 रुपये प्रति किलो रह गई है। लैंडिंग कॉस्ट लगातार गिर रही है, तो घरेलू कीमतों पर दबाव स्वाभाविक है।

हालांकि एक पॉजिटिव न्यूज ये है कि निकट भविष्य में 1 लाख टन से ज्यादा शिपमेंट कैंसल या लेट होने की खबरें आ रही हैं, जो आगे सप्लाई को टाइट कर सकती हैं। लेकिन फिलहाल त्योहारों की कमी से डिमांड को कोई बड़ा सपोर्ट नहीं मिल रहा। मंडी के जानकारों का मानना है कि सोया ऑयल में जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करो – ज्यादा स्टॉक मत रखो, क्योंकि शॉर्ट टर्म में और दबाव आ सकता है।

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कुल मिलाकर, बाजार में मिक्स्ड सेंटिमेंट है। ग्लोबल कमजोरी तो है, लेकिन घरेलू फैक्टर्स जैसे लिमिटेड इम्पोर्ट, बायोडीजल प्लान और सीमित सप्लाई कीमतों को ज्यादा क्रैश नहीं होने दे रहे। मैं तो यही सलाह दूंगा कि पाम ऑयल में लॉन्ग टर्म नजर रखो, क्योंकि इंडोनेशिया का B50 और स्टॉक में कमी बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकता है। सोया में सावधानी बरतो, जरूरत भर की खरीद करो।

दोस्तों, ट्रेडिंग में सबसे बड़ी बात है अपना रिसर्च और रिस्क मैनेजमेंट। ये विश्लेषण सिर्फ जानकारी के लिए है, मैं कोई निवेश सलाह नहीं दे रहा। बाजार बदलता रहता है, इसलिए अपना विवेक इस्तेमाल करो और प्रॉफिट बुक करते रहो। अगर कोई सवाल हो तो कमेंट करो, अगले अपडेट में फिर मिलते हैं। शुभ ट्रेडिंग!

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