
मैं पिछले कई सालों से बासमती चावल के बाजार को करीब से देख रहा हूं। दिसंबर 2025 में सर्दी की ठंड बढ़ते ही मंडियों में बासमती की आवक कम हो गई है। मिलों और गोदामों में पुराना स्टॉक तेजी से खाली हो रहा है, जबकि निर्यात की डिमांड रिकॉर्ड तोड़ रही है – मुझे लगता है कि अब बड़ी उछाल आने वाली है।
सर्दी में बासमती स्टॉक कम, निर्यात डिमांड तेज: बाजार में आने वाली है बड़ी उछाल?
इस साल भारत का बासमती निर्यात पहले ही 59 लाख टन के करीब पहुंच चुका है, और कुल चावल निर्यात 20 मिलियन टन से ऊपर जा रहा है। मध्य पूर्व के देश जैसे सऊदी अरब, ईरान, इराक और UAE में त्योहारों और नए ऑर्डर्स की वजह से मांग जबरदस्त बढ़ी है। यूरोप और अमेरिका में ऑर्गेनिक और प्रीमियम बासमती की डिमांड भी तेज है। मैंने कई एक्सपोर्टर्स से बात की – वे बता रहे हैं कि नए ऑर्डर्स आने शुरू हो गए हैं, लेकिन स्टॉक कम होने से कीमतें स्थिर नहीं रह पा रही हैं।
उत्तर भारत के इलाकों में सर्दी की वजह से नई फसल की तैयारी तो चल रही है, लेकिन अभी पुराने स्टॉक पर ही निर्भरता है। पंजाब, हरियाणा और यूपी की मंडियों में 1121 वैरायटी की आवक घटी हुई है। पिछले महीने जहां 1121 सेला का भाव 9000-9500 रुपये क्विंटल था, अब वह धीरे-धीरे ऊपर चढ़ रहा है। मिल मालिक बता रहे हैं कि गोदामों में करीब-करीब स्टॉक खत्म होने की स्थिति है, क्योंकि पिछले साल की फसल अच्छी थी लेकिन निर्यात ने सब कुछ सोख लिया।
मैंने अमृतसर और करनाल की मंडी घूमी तो वहां ट्रेडर्स चर्चा कर रहे थे कि जनवरी-फरवरी तक अगर निर्यात ऐसे ही चला तो कीमतें 10-15% तक उछल सकती हैं। खासकर 1121 और 1509 वैरायटी में, क्योंकि ये निर्यात के लिए सबसे पसंदीदा हैं। गल्फ देशों में भारतीय बासमती की ब्रांडिंग मजबूत हो रही है, और पाकिस्तानी सप्लाई में कुछ दिक्कतें आने से हमारा फायदा हो रहा है।
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किसानों के लिए यह अच्छी खबर है। जो किसान पुराना स्टॉक रोककर रखे हैं, उन्हें अब अच्छा दाम मिल सकता है। मैं खुद कई किसान भाइयों को जानता हूं जो पिछले साल कम भाव में बेचकर पछता रहे थे, लेकिन इस बार वे इंतजार कर रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल उत्पादन अच्छा रहने की उम्मीद है, लेकिन सर्दी में स्टॉक कम होने से बाजार में सस्पेंस बना हुआ है।
निर्यात के नए बाजार जैसे जापान, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका में भारतीय बासमती की पहुंच बढ़ रही है। ऑर्गेनिक बासमती की डिमांड तो अलग से爆 बढ़ रही है – कई कंपनियां दोगुना उत्पादन करने की योजना बना रही हैं। इससे प्रीमियम वैरायटी के दाम और मजबूत होंगे। मैंने देखा है कि शहरों में भी लोग अब अच्छी क्वालिटी का बासमती ही खरीद रहे हैं, त्योहारों में तो डिमांड पीक पर होती है।
हालांकि कुछ चुनौतियां भी हैं। फ्रेट चार्जेस बढ़े हैं, और कुछ देशों में टैरिफ की बातें चल रही हैं, लेकिन कुल मिलाकर डिमांड सप्लाई से ज्यादा है। ट्रेडर्स बता रहे हैं कि दिसंबर के अंत तक अगर नई आवक नहीं बढ़ी तो बाजार में हलचल मच जाएगी। 1121 स्टीम का भाव जो अभी 10,000 रुपये क्विंटल के आसपास है, वह जल्दी ही ऊपर जा सकता है।
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मेरे अनुभव से कहूं तो बासमती का बाजार हमेशा सर्दियों में गर्म होता है। पिछले साल भी ऐसा ही हुआ था – स्टॉक कम पड़े तो कीमतें आसमान छू गईं। इस बार भी वही संकेत मिल रहे हैं। निर्यात कंपनियां नए कॉन्ट्रैक्ट साइन कर रही हैं, और मिलें फुल कैपेसिटी पर चल रही हैं। अगर आप किसान हैं तो स्टॉक रोकें, अगर ट्रेडर हैं तो स्मार्टली खरीदारी करें।
दोस्तों, 2026 की शुरुआत बासमती के लिए शानदार होने वाली है। बाजार में यह सुस्ती सिर्फ तूफान से पहले की शांति है। मैं लगातार मंडियां घूमता रहता हूं, और जो देख रहा हूं उससे लगता है कि बड़ी उछाल बस आने ही वाली है। अगर आपके पास कोई अनुभव या सवाल है तो जरूर शेयर करें – मिलकर बाजार को बेहतर समझते हैं। खेती और व्यापार दोनों खुशहाल रहें!