
हाल ही में बासमती धान के बाजार को ट्रैक कर रहा हूं तो एक बात साफ नजर आ रही है – उत्तर भारत की मंडियों में अब धान की आवक काफी कम हो गई है। हरियाणा की बड़ी मंडियां जैसे गोहाना, जुलाना, सफीदों और जीटी रोड वाली बेल्ट अब लगभग खाली-खाली सी दिख रही हैं। पंजाब में भी यही हाल है। राजस्थान के कोटा और बूंदी इलाकों में अभी थोड़ी बहुत आवक बाकी है, लेकिन कुल मिलाकर सप्लाई सिकुड़ रही है।
इस कम होती आवक का असर बाजार पर तो सकारात्मक दिख रहा है, यानी कीमतों में कुछ सहारा मिला है, लेकिन चावल के भाव स्थिर रहने की वजह से धान में तेजी की रफ्तार बेहद धीमी है। फिलहाल 1121 वैरायटी के टॉप रेट 4200 रुपये क्विंटल के आसपास टिके हैं, जबकि 1718 में 3900 तक की रेंज देखी जा रही है। कुछ चुनिंदा मंडियों में 4000 का लेवल भी छुआ गया। पहले सीजन शुरू होने से काफी पहले जो अनुमान लगाया था 1718 के लिए, वह बिल्कुल सटीक साबित हुआ। वहीं 1121 के 4500 तक पहुंचने में अभी वक्त लगता नजर आ रहा है। इस समय 1718, 1401 और PB-1 जैसी वैरायटीज सीजन के हाई लेवल पर ट्रेड कर रही हैं।
यह भी जरूर पढ़ें – इथेनॉल की बढ़ती भूख: मक्का बन रहा है नया स्टार रॉ मटेरियल, NCDEX तैयार कर रहा वायदा बाजार
मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां तस्वीर उलट है। पिपरिया, विदिशा, उदयपुरा, रायसेन जैसी मंडियों में 1718, 1886 और पूसा बासमती-1 की अच्छी-खासी आवक जारी है – रोजाना 500 ट्रॉलियों के करीब वाहन आ रहे हैं। नतीजा यह कि भाव ऊपरी स्तरों से थोड़े फिसल गए। कल पिपरिया में PB-1 का टॉप 3399, 1886 का 3440 और 1718 का 3398 रुपये तक रहा। आसपास की मंडियों में भी यही रेंज चल रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में PB-1 स्टीम चावल करीब 727 डॉलर प्रति टन पर है, जो घरेलू स्तर पर 6400-6500 रुपये क्विंटल के बराबर बैठता है। इसे देखते हुए PB-1 धान के भाव 3300 से ऊपर बने रहने चाहिए। ट्रेंड की बात करें तो आमतौर पर जनवरी के पहले हफ्ते तक धान अपने पीक लेवल के करीब पहुंच जाता है। इसलिए जो किसान या व्यापारी माल होल्ड करना चाहते हैं, वे 10 जनवरी तक इंतजार कर सकते हैं। लेकिन सावधानी जरूरी है – अगर PB-1 3300 के नीचे फिसला तो बेचने का सोचना बेहतर होगा।
आने वाले दिनों में गल्फ फूड मेला बड़ा फैक्टर बनेगा, जो 26 जनवरी से दुबई में शुरू हो रहा है। यहां भारतीय बासमती की अच्छी प्रस्तुति बाजार को नई दिशा दे सकती है। इधर ईरान ने बासमती खरीद शुरू तो की है, लेकिन Jahad Sabz कंपनी ने 10,000 टन पाकिस्तानी 1121 के लिए टेंडर निकाला है। फिर भी उम्मीद है कि अरब देशों से भारत को जल्द बड़े ऑर्डर मिल सकते हैं।
कुल मिलाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका से टैरिफ विवाद और ईरान की करेंसी में गिरावट को छोड़कर कोई बड़ा नेगेटिव फैक्टर नहीं दिख रहा जो बासमती को नीचे धकेले। ये दोनों मुद्दे भी बाजार को गहराई से प्रभावित करेंगे, ऐसा नहीं लगता। इसलिए होल्ड करने वाले थोड़ा और रुक सकते हैं, लेकिन रोजाना धान और चावल के भाव पर नजर रखें। सही टाइमिंग पर माल निकालना सबसे जरूरी है – व्यापार अंततः अपने विवेक और रिस्क पर ही करें।