
अरहर / तूवर दाल की तेजी मंदी रिपोर्ट – 18 दिसम्बर 2025
नमस्कार मेरे प्यारे किसान भाइयों और बहनों, सर्दियों की रौनक बढ़ रही है और घरों में अरहर (तुवर) की दाल की खुशबू फिर से महकने लगी है। यह दाल हमारी थाली की शान है – चाहे सादा दाल-चावल हो या कोई खास व्यंजन। लेकिन पिछले दो दिनों से अरहर बाजार में थोड़ी नरमी देखी गई है, जहां भावों में करीब 50 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई है। फिर भी, बड़ी मंदी की आशंका अभी दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही। वजह साफ है – घरेलू स्तर पर पुराना स्टॉक अब बहुत कम बचा है और मांग का आधार अभी भी मजबूत बना हुआ है।
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शाम के सत्र में लेमन अरहर के भाव चेन्नई में लगभग 6575 रुपये, दिल्ली में 6975 रुपये और मुंबई में करीब 6575 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए। घरेलू मंडियों में कर्नाटक, महाराष्ट्र और अन्य उत्पादक राज्यों से आवक तो जारी है, लेकिन दाल मिलें सिर्फ अपनी जरूरत भर का माल ही उठा रही हैं – ज्यादा स्टॉक नहीं जमा कर रही हैं। आयात के मोर्चे पर बर्मा की लेमन अरहर के दाम स्थिर बने हुए हैं, जबकि अफ्रीकी मूल की अरहर में भी कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं दिखा। सूडान की अरहर 5700 रुपये, गजरी 5400 रुपये, मतवारा 5300 रुपये और सफेद अरहर 5400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास टिकी रही।
देसी अरहर की बात करें तो कटनी, कानपुर, सोलापुर, अकोला और रायपुर जैसी प्रमुख मंडियों में दूसरे दिन भाव थोड़े नरम जरूर पड़े, लेकिन बाकी जगहों पर कीमतें स्थिर बनी रहीं। आयातकों के गोदामों में पुराना माल तो पड़ा है, लेकिन मौजूदा बाजार भावों में उन्हें लागत और बिक्री के बीच अच्छा अंतर नहीं मिल रहा, जिससे बाजार में हल्का सा खींचतान का माहौल बना हुआ है।
खपत का मौसम जोरों पर है – त्योहार, शादियां और रोजमर्रा की रसोई में अरहर दाल की डिमांड लगातार बनी हुई है। यही कारण है कि इन भावों में भी दाल का कारोबार सुचारू रूप से चल रहा है। दूसरी तरफ, तुवर के कंटेनर दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में बहुत सीमित संख्या में उतर रहे हैं। पाइपलाइन में नया माल कम है और दाल मिलों की खरीदारी बढ़ने से भाव हाल के दिनों में उछलकर 7100 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर तक पहुंच गए हैं। कर्नाटक से आने वाला नया माल 7000 से 7200 रुपये के दायरे में बिक रहा है, जिससे उत्तर भारत में यह सस्ता नहीं पड़ रहा।
कुल मिलाकर अरहर बाजार में फिलहाल एक ठहराव सा आया है, लेकिन इस ठहराव के बाद फिर से मजबूती लौटने के संकेत ज्यादा मजबूत दिख रहे हैं। बड़ी गिरावट की गुंजाइश बहुत कम लग रही है, क्योंकि स्टॉक सीमित है और मांग का दबाव बना हुआ है।
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किसान भाइयों और व्यापारी साथियों, अगर आपके पास स्टॉक है तो घबराकर बेचने की जल्दबाजी न करें। बाजार को करीब से देखें और अपनी स्थिति के हिसाब से फैसला लें। अरहर हमारी महत्वपूर्ण फसल है – मेहनत का सही फल मिले, यही दुआ है।
सभी को ढेर सारी शुभकामनाएं। घर में दाल की खुशबू बनी रहे और खुशहाली आए।
जय जवान, जय किसान!