
चना बाजार रिपोर्ट 16 दिसंबर 2025
चना बाजार रिपोर्ट 16 दिसंबर 2025 : मैं अनाज बाजार का एक पुराना विश्लेषक हूं और पिछले 20 सालों से दालों और अनाज की मंडियों की हर छोटी-बड़ी हलचल पर नजर रखता हूं। आज, 16 दिसंबर 2025 को, मैं आपको चना बाजार की ताजा और विस्तृत रिपोर्ट दे रहा हूं। जैसा कि मैंने कल भी बताया था, चना के भाव अपने निचले स्तर पर पहुंच चुके हैं और यहां से आगे गिरावट की ज्यादा गुंजाइश नहीं दिख रही। बल्कि बाजार में हल्की स्थिरता और तेजी के संकेत मिल रहे हैं।
पिछले कुछ दिनों में बाजार ने जो रुख दिखाया है, वह काफी दिलचस्प है। दिल्ली में राजस्थान का बेस्ट चना 5625 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया, जबकि विदिशा में भाव 5500 रुपये, खरगोन में 5100 रुपये, अकोला में 5500 रुपये, इंदौर में 5450 रुपये, हरदा में 5200 रुपये और जयपुर में 5525 रुपये रहे। चना दाल की बात करें तो वह 6200 रुपये प्रति क्विंटल पर कारोबार कर रही है। ऑस्ट्रेलियन चना मुंबई में 5400 रुपये और कांडला पर 5250 रुपये बोला गया, जबकि तंजानिया चना 5150 रुपये पर स्थिर रहा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चने की कीमतें कमजोर होकर ऑस्ट्रेलिया चना 5510 रुपये और तंजानिया 5560 रुपये पर लुढ़क गईं।
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अब सवाल यह है कि बाजार इतना कमजोर क्यों है? दाल मिलों की लगातार खरीद चल रही है, लेकिन नीचे दाम पर मांग तो बनी हुई है, जबकि ऊपरी स्तर पर भारी तेजी की कोई ठोस वजह नहीं दिख रही। चालू महीने में ऑस्ट्रेलिया से करीब 2,81,300 टन चना भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने वाला है, जिसमें से 33,000 टन का जहाज 16 दिसंबर को मुंद्रा पोर्ट पर आने की उम्मीद है। इससे सप्लाई साइड का दबाव बना हुआ है। इसके अलावा, बावजूद खपत का सीजन चलने से चना दाल और बेसन की मांग फिलहाल ठीक-ठाक बनी हुई है। मटर के भाव 100-150 रुपये ऊंचे रहने से भी देसी चना की खपत को कुछ सहारा मिला है।
ऑस्ट्रेलियन माल सस्ता जरूर है, लेकिन दाने छोटे होने से मिलों में उसकी क्वालिटी पर सवाल उठ रहे हैं। राजस्थानी चने जैसी बेस्ट क्वालिटी नहीं मिल रही, जिससे राजस्थान, एमपी और महाराष्ट्र के अच्छे माल में शॉर्टेज बनी हुई है। नई घरेलू फसल मार्च-अप्रैल में आने तक मौजूदा स्टॉक पर ही मिलों की प्रोसेसिंग निर्भर है। तब तक बढ़िया माल की कमी के कारण हल्का और सुधार संभव माना जा रहा है।
चना भारत की प्रमुख दाल फसलों में से एक है। यह प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है और लाखों घरों की थाली का हिस्सा। देश में राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्य मुख्य उत्पादक हैं। इस साल रबी बुआई अच्छी हुई है और मौसम अनुकूल रहने से पैदावार रिकॉर्ड स्तर पर जाने की उम्मीद है। लेकिन अभी ऑफ-सीजन में आयात और स्टॉक का दबाव बाजार को नीचे रखे हुए है।
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mandikabhav का मेरा व्यक्तिगत अनुमान है कि चना बाजार में मंदी फिलहाल रुकती दिख रही है, लेकिन भारी मात्रा में चने के आयात को देखते हुए जब तक भाव 5800 रुपये से ऊपर नहीं टिकते, तब तक बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं की जा सकती। अगर आयात कम हुआ या घरेलू खपत बढ़ी, तो जनवरी-फरवरी तक 200-300 रुपये की रिकवरी संभव है। लेकिन फिलहाल बाजार 50-100 रुपये के छोटे दायरे में ही घूमता रहेगा।
किसान भाइयों को सलाह है कि अगर स्टॉक है तो थोड़ा इंतजार करें, क्योंकि निचला स्तर करीब आ चुका है। व्यापारियों और मिलर्स को भी सतर्क रहना चाहिए – सस्ता आयातित माल लेने से पहले क्वालिटी जरूर चेक करें। बाजार में हमेशा उतार-चढ़ाव रहता है, लेकिन सही जानकारी और धैर्य से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।