आज का अश्वगंधा का भाव क्या रहा 24 दिसंबर

आज का अश्वगंधा का भाव क्या रहा 24 दिसंबर

नमस्कार! आज हम औषधीय जड़ी-बूटियों के बाजार की ताजा स्थिति पर बात करेंगे, खासकर अश्वगंधा (असगंध), चिरायता और मोरंगा जैसी महत्वपूर्ण फसलों पर। ये फसलें न केवल आयुर्वेदिक दवाओं में उपयोग होती हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर तनाव कम करने, इम्यूनिटी बढ़ाने और स्वास्थ्य लाभ के लिए तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। नीमच मंडी, जो इन जड़ी-बूटियों का प्रमुख केंद्र है, में हाल की आवक और भावों की जानकारी आपके लिए लेकर आए हैं।

सबसे पहले अश्वगंधा की बात करें। इसकी जड़ें मुख्य रूप से बाजार में बिकती हैं और क्वालिटी के आधार पर अलग-अलग ग्रेड में विभाजित होती हैं। आज की रिपोर्ट के अनुसार, अश्वगंधा की आवक 170 बोरी रही। कुल मिलाकर यह 16000 से 33800 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकी। बड़ी और अच्छी तार (पतली, लंबी जड़ें) वाली क्वालिटी 19000 से 19500 रुपये, एवरेज तार 17000 से 17500 रुपये रही। खेत बोज स्पेशल (खेत से सीधी उच्च गुणवत्ता) 24000 से 25000, टुकड़ी (छोटे टुकड़े) 25000 से 26000, साफ माल (साफ-सुथरी जड़ें) 31000 से 32000 और अंगूठा गट्टा (मोटी, उंगली जैसी जड़ें, सबसे प्रीमियम) 35000 से 37000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकी। यह भाव क्वालिटी, मोटाई, लंबाई और सफाई पर निर्भर करते हैं। अच्छी जड़ें जो लंबी, सीधी और बिना क्षति वाली होती हैं, उन्हें ज्यादा दाम मिलते हैं।

अश्वगंधा की पत्तियों की अलग से आवक 450 बोरी रही और ये 770 से 910 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकीं, जिसमें बड़ीया क्वालिटी 850 से 900 रुपये रही। पत्तियां भी आयुर्वेद में उपयोगी हैं, लेकिन मुख्य मांग जड़ों की ही है।

अश्वगंधा बीज की आवक कम रही – केवल 30 बोरी। रेगुलर बीज 1900 से 2200 रुपये और पीला (उच्च गुणवत्ता वाला) 4000 रुपये तक बिका। बीज की मांग बुवाई के लिए बढ़ रही है, क्योंकि किसान भाई इस फसल की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं।

अब चिरायता की स्थिति देखें। नई चिरायता की आवक अच्छी रही – 600 बोरी। यह 8000 से 11500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकी। पत्ती वाली चिरायता 11100 से 11400 और बड़ीया क्वालिटी 10500 से 10800 रुपये रही। चिरायता कड़वी औषधि है, जो पाचन, बुखार और लीवर संबंधी समस्याओं में उपयोगी मानी जाती है। इसकी मांग आयुर्वेदिक कंपनियों से स्थिर बनी हुई है। चिरायता बीज की आवक शून्य रही, इसलिए कोई कारोबार नहीं हुआ।

मोरंगा (सहजन की फली या ड्रमस्टिक) की आवक 25 बोरी रही और यह 5500 से 7250 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकी। मोरंगा पोषक तत्वों से भरपूर है और सूप, सब्जी के अलावा पाउडर के रूप में निर्यात भी होता है। इसकी मांग स्वास्थ्य जागरूकता से बढ़ रही है।

अंत में, लैंडिंग पीपल (शायद सफेद पिपली या लंबी पिपर) 32000 रुपये प्रति क्विंटल बिकी। यह भी एक दुर्लभ और महंगी औषधि है।

किसान भाइयों, इन जड़ी-बूटियों का बाजार वैश्विक मांग से मजबूत हो रहा है। अश्वगंधा विशेष रूप से स्ट्रेस रिलीफ सप्लीमेंट्स में उपयोग हो रही है, और निर्यात बढ़ने से भाव अच्छे बने हुए हैं। लेकिन क्वालिटी पर विशेष ध्यान दें – साफ, सूखी और अच्छी ग्रेड की जड़ें ही ज्यादा दाम दिलाती हैं। अगर आप इन फसलों की खेती कर रहे हैं, तो जैविक तरीके अपनाएं, क्योंकि विदेशी बाजार में ऑर्गेनिक की मांग ज्यादा है।

हमारा मकसद आपको ताजा और विश्वसनीय जानकारी देना है ताकि आप अपनी फसल को सही समय पर और उचित दाम पर बेच सकें। बाजार में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं – मौसम, निर्यात और घरेलू मांग सब प्रभाव डालते हैं। इसलिए, स्थानीय मंडी की स्थिति देखकर और अपनी जरूरत के अनुसार निर्णय लें।

आगे भी ऐसी अपडेट देते रहेंगे। कोई सवाल हो तो जरूर बताएं। आपकी फसल हमेशा लहलहाए और मेहनत का पूरा फल मिले, यही कामना है।

जय जवान, जय किसान!

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